भिखारी ठाकुर लिखित ‘ गबरघिचोर ‘ के मंचन के साथ नाट्योत्सव का समापन

भोजपुरी के नामी कवि-नाटककार भिखारी ठाकुर का यह नाटक अभी भी प्रासंगिक है. ‘गबरघिचोर’ सामाजिक संरचना में स्त्री की जगह, महिला-पुरुष सम्बंध और विभिन्न क़िस्म की सांस्कृतिक सत्ताओं से हमारा साक्षात कराता है

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‘कुच्ची का कानून’ के मंचन के साथ ‘कोरस’ का ‘आज़ाद वतन-आज़ाद जुबाँ’ नाट्योत्सव प्रारंभ

आसिफ़ा की याद में ‘कोरस’ नाट्य समूह द्वारा ‘आज़ाद वतन-आज़ाद जुबाँ’ नाट्योत्सव की शुरुआत आज से महिलाओं का सवाल सिर्फ़ महिलाओं का नहीं, वरन पुरुषों का भी है, पूरे समाज का: प्रो. डेजी नारायण अभिव्यक्ति की आज़ादी पर ख़तरे के दौर में हम, अंग्रेजों के समय से ही चला जा रहा है  ड्रेमेटिक परफ़ारमेंस ऐक्ट : परवेज़ अख़्तर आज शाम छः बजे से पटना के कालिदास रंगालय में ‘कोरस’ नाट्यसमूह द्वारा आयोजित ‘आज़ाद वतन-आज़ाद जुबाँ’ नाट्योत्सव की शुरुआत हुई। इस नाट्योत्सव में बम्बई की टीम ‘आरम्भ मुम्बई प्रोडक्शन’ अपना नाटक ‘बंदिश’, बेगूसराय से ‘द फ़ैक्ट रंगमंडल’ अपना नाटक ‘गबरघिचोर’ और पटना…

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