‘ वह आग मार्क्स के सीने में जो हुई रौशन, वह आग सीन-ए-इन्साँ में आफ़ताब है आज ’

जटिल दार्शनिक-आर्थिक तर्क-वितर्क के संसार में रहने के बावजूद मार्क्स ने कई कविताएँ लिखीं और उन पर भी बहुत सी कविताएँ लिखी गयीं, जिनमें से कुछ यहाँ दी गयी हैं. हिंदी में मार्क्स पर बहुत कम कविताएँ मिलती हैं और बकौल सुरेश सलिल, हिंदी कविता लेनिन से पीछे नहीं गयी। ‘उर्दू में अल्लामा इकबाल शायद पहले बड़े शायर हैं जिन्होंने नज्मों में मार्क्स का ज़िक्र किया, लेकिन उनका अंदाज़ कहीं तारीफ़ और कहीं सख्त आलोचना का है। यहाँ प्रस्तुत रचनाओं में ज़्यादातर मार्क्स के ऐतिहासिक अवदान का रेखांकन हैं, हालांकि कुछ में विडम्बना और आलोचना का स्वर भी है।

Read More

दो सौ साल बाद मार्क्स का अर्थशास्त्र

2018 में लुलु.काम से माइकेल राबर्ट्स की किताब ‘ मार्क्स200: -ए रिव्यू आफ़ मार्क्स इकोनामिक्स 200 ईयर्स आफ़्टर हिज बर्थ ’ का प्रकाशन हुआ. किताब में मार्क्स के अर्थशास्त्र का संक्षिप्त परिचय देने के बाद पूंजीवाद की गति के नियमों (मूल्य का नियम, पूंजी संचय का नियम और मुनाफ़े की घटती दर का नियम) का विवरण देने के बाद संकट के उनके सिद्धांत का विवेचन किया गया है. इसके बाद मार्क्स के आलोचकों के तर्कों का जायजा लिया गया है. इसके बाद पूंजीवाद के बारे में मार्क्स की उन बातों का उल्लेख है जो अब भी प्रासंगिक लगती हैं. इनमें विषमता और साम्राज्यवाद के साथ उसकी अभिन्नता, धरती के विनाश, मशीन के आगमन तथा वर्ग संघर्ष की निरंतरता पर जोर दिया गया है.

Read More

एनादर मार्क्स: अर्ली मैनुस्क्रिप्ट्स टु द इंटरनेशनल : अर्थशास्त्र संबंधी काम की तैयारी

मार्चेलो मुस्तो की किताब ‘एनादर मार्क्स: अर्ली मैनुस्क्रिप्ट्स टु द इंटरनेशनल’ का दूसरा खंड राजनीतिक अर्थशास्त्र संबंधी मार्क्स के अध्ययन पर केंद्रित है जिसकी शुरुआत पेरिस प्रवास में हो चुकी थी. 1845 में ब्रसेल्स आए और पत्नी तथा पहली पुत्री जेनी के साथ तीन साल रहे. वहां रहने की इजाजत इस शर्त के साथ मिली कि वर्तमान राजनीति के बारे में कुछ नहीं लिखेंगे. अर्थशास्त्र की घनघोर पढ़ाई का सबूत यह कि शुरू के छह महीनों में ही छह नोटबुकें भर गईं. इसके बाद दो महीने मानचेस्टर रहकर अन्य अर्थशास्त्रियों खासकर अंग्रेजों के चिंतन का गहन अध्ययन किया और नौ नोटबुकें भर डालीं. इस समय ही इंग्लैंड के मजदूर वर्ग के हालात पर एंगेल्स की पहली किताब प्रकाशित हुई. अर्थशास्त्र के अध्ययन के अतिरिक्त इसी दौरान नए हेगेलपंथियों के विचारों के विरोध में ढेर सारा लेखन किया जो मरणोपरांत जर्मन विचारधारा के नाम से छपा. इस मेहनत का मकसद जर्मनी में लोकप्रिय नव हेगेलपंथ के ताजातरीन रूपों का खंडन करना और मार्क्स के क्रांतिकारी अर्थशास्त्रीय विचारों को ग्रहण करने की जमीन तैयार करना था. किताब पूरी तो नहीं हुई लेकिन जिसे बाद में एंगेल्स ने इतिहास की भौतिकवादी धारणा कहा उसकी पुख्ता जमीन तैयार हो गई.

Read More