जेल का भय रिश्ते का आधार नहीं, संवैधानिक नैतिकता से बनेगा लोकतांत्रिक समाज

अगर हमारे कानून सामाजिक नैतिकता के आधार पर बनने लगे तो सोचिए कि हमारे समाज का क्या होगा ! क्योंकि सामाजिक नैतिकता तो अक्सर यही कहती है कि जाति के बाहर विवाह अनैतिक है, समलैंगिक रिश्ते रखना अनैतिक है, किसी लड़की का अपनी मर्जी के कपड़े पहनना अनैतिक है, किसी लड़की का अपने लिए बराबरी आज़ादी पाना अनैतिक है, किसी दलित लड़की या लड़के का किसी सवर्ण लड़के या लड़की से प्रेम संबंध अनैतिक है। सामाजिक नैतिकता तो पितृसत्तात्मक और जातिवादी नैतिकता है। और इसीलिए हम सामाजिक नैतिकता की बजाए संवैधानिक नैतिकता की ओर कदम बढ़ाते हैं तो हमारा समाज ज्यादा सुन्दर, ज्यादा लोकतांत्रिक बनेगा । इसकी हमें कोशिश करनी चाहिए।

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माँ तुझे सलाम !

(माँ केवल ममता का ही खज़ाना नहीं है बल्कि समझदारी का भी स्रोत होती है.  समाज के बारे में, नैतिकता, यौनिकता, सही और गलत के विवेक के बारे में हमें एक नयी दृष्टि देने का भी निमित्त हो सकती है. आइये  ‘मदर्स डे’ के उपलक्ष्य में माँ की रूढ़ हो चुकी छवि से इतर कविता कृष्णन के इस लेख के माध्यम से माँ की एक नयी छवि से परिचित होते हैं, उस पर बात और बहस करते हैं) ‘टू किल अ मॉकिंगबर्ड’ उपन्यास 1950 के दशक के अमेरिका के दक्षिणी…

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आहेद को आज़ाद करो ! फिलिस्तीन को मुक्त करो !

  17 वर्षीय फिलिस्तीनी लड़की आहेद तमीमी इसरायली जेल में हैं क्योंकि उसने अपने घर को इसरायली सैनिकों से बचाने की कोशिश की थी. उसे ऐसा करते हुए इस वीडिओ में देख सकते हैं http://www.independent.co.uk/news/world/middle-east/ahed-tamini-trial-israel-palestinian-protest-icon-slapped-soldiers-court-west-bank-a8206361.html इसरायली सैनिकों ने आहेद के घर पर आँसू गैस छोड़ा था और खिड़कियों को तोड़ा था, उसके 14 वर्षीय भाई मोहम्मद के चेहरे को रबर बुलेट से घायल किया था, (जिसकी वजह से मोहम्मद को 72 घंटों के लिए कोमा में रखा जाना पड़ा). इसके बाद ही आहेद ने जाकर सैनिकों का सामना किया. आहेद…

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