सामंती वैभव के प्रति नॉस्टेल्जिया से ग्रस्त है कहानी ‘ रज्जब अली ’

‘ रज्जब अली ’ कहानी में कथाकार बड़ा आख्यान रचने की कोशिश में कई ऐसी गलतियाँ कर बैठे हैं जिसकी वजह से अपने बड़े उद्देश्य के बावजूद इसकी विश्वसनीयता सन्देह के घेरे में आ जाती है. सबसे पहली बात यह कि आज के भारत का फासीवाद निश्चित तौर पर मुसलमानों और दलितों के दमन के जरिये आगे बढ़ रहा है लेकिन आज के दमन का रूप वह नहीं है जो प्रेमचंद के जमाने मे था या आज से चार-पांच दशक पहले तक था. आज दलित पीड़ित हैं लेकिन मजलूम नहीं हैं.

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नफरत के खिलाफ अदब का प्रोटेस्ट है ‘मै मुहाजिर नहीं हूं ’ – शारिब रुदौलवी

कथाकार-उपन्यासकार बादशाह हुसैन रिजवी के उपन्यास ‘मै मुहाजिर नहीं हूं’ के उर्दू संस्करण का 9 जून को यूपी प्रेस क्लब में विमोचन हुआ. इस उपन्यास का हिन्दी संस्करण 2011 में आ चुका है. इसका उर्दू अनुवाद डाॅ वजाहत हुसैन रिजवी ने किया है.

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भारतीय समाज के बदलते वर्गीय एवं जातीय चरित्र को बारीकी से व्यक्त करने वाले कथाकार हैं मार्कण्डेय

मार्कंडेय ने भारतीय समाज के बदलते वर्गीय एवं जातीय चरित्र को बहुत ही बारीकी से अपनी कथाओं में व्यक्त किया है. सामाजिक ताने-बाने एवं राजनीतिक अर्थशास्त्र पर उनकी गहरी पकड़ रही जिसके कारण आदर्श कल्याणकारी लोकतान्त्रिक नीतियाँ हों या ग्रामीण जीवन, किसी के प्रति उनका रोमान एक स्तर से आगे नहीं बढ़ता. उनकी सचेत समाजशास्त्रीय दृष्टि उन्हें तुरंत यथार्थ की ज़मीन पर खींच लाते हैं.

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मेरी कोख पर मेरा हक कब बनेगा ?

गोरखपुर. प्रेमचंद पार्क स्थित मुक्ताकाशी मंच पर आज शाम पटना से आयी सांस्कृतिक संस्था ‘ कोरस ‘ ने प्रसिद्ध कथाकार शिवमूर्ति की चर्चित कहानी ‘ कुच्ची का कानून ’ का मंचन किया. यह आयोजन प्रेमचन्द साहित्य संस्थान और अलख कला समूह ने किया था। नाटक को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक जुटे. नाटक के मंचन के बाद वरिष्ठ कथाकार मदन मोहन ने नाटक की निर्देशक एवं कोरस की सचिव समता राय को स्मृति चिन्ह प्रदान किया. ‘ कुच्ची का कानून ‘ गांव के गहरे अंधकूप से एक स्त्री…

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अपनी कथाओं में बाहरी दर्शक नहीं, खुद भी सम्मिलित हैं अमरकांत : प्रो राजेन्द्र कुमार

कथाकार अमरकान्त की स्मृति में सेंट जोसेफ़ में कार्यक्रम इलाहाबाद,  17 फरवरी. आज सेंट जोसेफ़ स्कूल के होगेन हॉल में जसम, जलेस, प्रलेस, परिवेश और अभिव्यक्ति की ओर से कथाकार अमरकान्त की याद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर  ‘समकालीन चुनौती’ और ‘स्मृति में अमरकान्त’ पत्रिकाओं का अमरकान्त पर केंद्रित विशेषांक का विमोचन रविकिरण जैन, प्रो राजेन्द्र कुमार, सुधीर, अशोक सिद्धार्थ, अनीता गोपेश, रमेश ग्रोवर और शिवानंद ने किया. इस अवसर पर नीलम शंकर ने अमरकान्त की अप्रकाशित कहानी ‘साड़ियाँ’ और अरविंद बिंदु ने उनके अप्रकाशित…

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