नफरत के खिलाफ अदब का प्रोटेस्ट है ‘मै मुहाजिर नहीं हूं ’ – शारिब रुदौलवी

कथाकार-उपन्यासकार बादशाह हुसैन रिजवी के उपन्यास ‘मै मुहाजिर नहीं हूं’ के उर्दू संस्करण का 9 जून को यूपी प्रेस क्लब में विमोचन हुआ. इस उपन्यास का हिन्दी संस्करण 2011 में आ चुका है. इसका उर्दू अनुवाद डाॅ वजाहत हुसैन रिजवी ने किया है.

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ज़माना नाक़ाबिले-बर्दाश्त है…

मंटो की लगभग प्रत्येक कहानी दारूण यथार्थ से आंख मिलाने का साहस रखती है। ऐसी गूँज पैदा करती है कि वह मानवता के पक्ष में जाए। यथार्थ की दारूणता का पीछा करते हुए मंटो कहीं भी मौका नहीं देते कि दारूणता को छिपा लिया जाय। लेकिन यह भी सच है कि यथार्थ का रूप सामने रखकर वह उसके सामने समर्पण नहीं कर देते। यह संदेश देते हैं कि दारूणता का प्रतिकार भी हो सकता है।

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