पठनीयता का संबंध वास्तविकता से होता है

(प्रेमचंद की परंपरा को नये संदर्भ और आयाम देने वाले हिंदी भाषा के कहानीकारों में अमरकांत अव्वल हैं। अमरकांत से शोध के सिलसिले में सन् 2002 की शरद में मिलना हुआ।अमरकांत के प्रस्तुत बात-विचार उसी मुलाकात और वार्तालाप से निकले हैं-दुर्गा सिंह ।) प्रेमचंद की परंपरा- प्रेमचंद ने ग्रामीण जीवन से विषय उठाया है। शहरी जीवन पर भी लिखा लेकिन मुख्य जोर ग्रामीण जीवन और समाज पर रहा। ग्रामीण जीवन से उन्होंने जो पात्र उठाए उसमें भी दबे-कुचले, शोषित, गरीब पर केंद्रित हैं। इन पात्रों के जरिये प्रेमचंद ने सामाजिक…

Read More

नफरत के खिलाफ अदब का प्रोटेस्ट है ‘मै मुहाजिर नहीं हूं ’ – शारिब रुदौलवी

कथाकार-उपन्यासकार बादशाह हुसैन रिजवी के उपन्यास ‘मै मुहाजिर नहीं हूं’ के उर्दू संस्करण का 9 जून को यूपी प्रेस क्लब में विमोचन हुआ. इस उपन्यास का हिन्दी संस्करण 2011 में आ चुका है. इसका उर्दू अनुवाद डाॅ वजाहत हुसैन रिजवी ने किया है.

Read More