शैतान शासक की आकुल आत्मा का ‘चुपचाप अट्टहास’

( कवि लाल्टू के कविता-संग्रह ‘ चुपचाप अट्टहास ’  पर युवा लेखक आलोक कुमार श्रीवास्तव की टिप्पणी ) किसी देश की जनता के लिए यह जानना हमेशा दिलचस्प (और जरूरी भी) होगा कि उस देश की सत्ता के शिखर पर बैठा शैतान अगर कभी स्वयं से बतियाता होगा तो कैसे ? उसके ‘मन’ की बात क्या होगी ? वह ‘मन की बात’ नहीं जो वह रेडियो, टेलीविज़न से प्रसारित करवाता है। क्योंकि वह तो एक रिकॉर्डेड अभिनय है, यह जनता को खूब पता होता है। अपने छल, प्रपंच, कपट, अत्याचार,…

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