1984 के सिख क़त्ले-आम के मुजरिमों की तलाश का 34 साल लम्बा पाखंड !

1984 के सिखों के क़त्लेआम के मामले में आरएसएस/भाजपा अपने आप को कांग्रेस से भिन्न साबित करने के लिए चाहे जो भी दावे करे लेकिन दोनों में तनिक भी अंतर नहीं है। इन दोनों से कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। मुजरिमों की खोज और उनको उचित सज़ा दिलाने का मक़सद तभी पूरा हो सकता है, जब हम भारतीय एक साथ 34 साल से चल रहे ‘न्याय के पाखंड’ के खिलाफ लामबंद होंगे। यह लड़ाई सिखों को इन्साफ दिलाने के लिए ही नहीं है बल्कि एक प्रजातान्त्रिक-धर्मनिरपेक्ष देश को बचने की भी है।

Read More

संघ-हिन्दू महासभा द्वारा आज़ाद हिन्द फौज के साथ किये गये विश्वासघात की लीपापोती कर रहे हैं मोदी

जो लोग नेताजी और उनके साथियों और भारत की आज़ादी के लिये अपना सर्वाेत्तम निछावर कर देनेवाले आज़ाद हिन्द फौज के नायकों और सिपाहियों से प्यार करते हैं उन्हें यह माँग करनी चाहिये कि मोदी लाल किले से नेताजी और उनकी आज़ाद हिन्द फौज के प्रति आर.एस.एस. और हिन्दू महासभा दोनों ने जो अपराध किये हैं, उनके लिये वह माफ़ी माँग लें।

Read More

‘ भविष्य का भारत ’ की संघी दृष्टि

संघ भविष्य के भारत को हिन्दू राष्ट्र मानेगा। इसे सभी नहीं मान सकते। राजनीतिक दलों को वोट की चिन्ता है। इसलिए वे खुलकर हिन्दू राष्ट्र के विरोध में खड़े नहीं होंगे, पर बौद्धिक वर्ग जो क्रीतदास नहीं है, वह हिन्दू राष्ट्र का सदैव विरोध करेगा। भविष्य का भारत केवल हिन्दुओं का भारत नहीं हो सकता। नहीं होना चाहिए। हिन्दुत्व और भारतीय तत्व दोनों एक नहीं है। कभी हो भी नहीं सकते हैं।

Read More

अटल बिहारी वाजपेयी और भारतीय दक्षिणपंथ की विकास यात्रा

आरएसएस के सिद्धांतकार गोविन्‍दाचार्य ने उन्‍हें भाजपा का उदारवादी ‘मुखौटा’ कहा था, जबकि आडवाणी भाजपा का असली चेहरा थे. वे एक ऐसे दौर में भाजपा के सर्व प्रमुख प्रतिनिधि थे जब भाजपा को अपनी साम्‍प्रदायिक फासीवादी राजनीति के लिए एक मुखौटे की जरूरत थी. प्रथम राजग गठबंधन सरकार के सहयोगियों के लिए जिन्‍हें आडवाणी या मोदी जैसे ‘कट्टर’ माने जाने वाले संघियों को समर्थन देने में असुविधा हो सकती थी, बाजपेयी का मुखौटा उनके लिए उपयोगी था.

Read More

कृषि अर्थव्यवस्था पर हमला है गौ रक्षा कानून

देश के जिन राज्यों में भी गौ रक्षा कानून लागू किया गया है मेरे खुद के सर्वे के अनुसार उन राज्यों में गौ-वंश की संख्या दो तिहाई तक कम हो गयी है. इससे देश भर में घाटे की खेती की मार झेल रहे छोटे व मध्यम किसानों के सामने आर्थिक संकट ज्यादा गहरा गया है. हमारे देश में छोटी व माध्यम जोतों की संख्या अस्सी प्रतिशत के करीब है. इसमें भी बहुतायत छोटी जोतों की है. यही कारण है कि यहाँ छोटी खेती या ग्रामीण मजदूरी पर निर्भर हर परिवार…

Read More

दक्षिणपंथ की कीलें

भगवा खेमे के लिये अपने मंसूबो को पूरा करने के लिए 2019 का चुनाव निर्णायक है और इसके लिये वे कुछ भी करेंगे. यह चुनाव इतना भव्य और नाटकीय होगा जिसकी अभी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं.

Read More

सेक्युलर इंडिया से इतनी दिक़्क़त क्यों है ?

डर या लालच के मारे किसी राजनैतिक दल का पिछलग्गू हो जाना या सरकारी भोंपा बन जाना तो समझ आता है, लेकिन क्या अब भारतीय मीडिया के इस धड़े का संपादकीय नागपुर में लिखा जा रहा है.

Read More

विज्ञान से बैर की वैचारिकी

28 फरवरी को प्रसिद्ध नोबल पुरुस्कार विजेता सी.वी.रामन के जन्मदिन को भारत में विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता.इस बार इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी में आयोजित विज्ञान दिवस के आयोजन के उद्घाटन के लिए अकादमी द्वारा केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह को आमंत्रित किया गया था. सत्यपाल सिंह मुंबई पुलिस के कमिश्नर रहे हैं.वे बागपत से भाजपा के टिकट पर जीत कर लोकसभा पहुंचे हैं और पिछले वर्ष सितम्बर में  केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री पद से नवाजे गए.इस वर्ष जनवरी में उन्होंने…

Read More