आम बजट : खुशफहमियों से भरा पिटारा

  इस चुनावी बजट में खुश होने की कई वजहें हैं पर क्या वे कारण इतने ठोस और विश्वसनीय भी हैं   संजय श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार आम बजट के बारे में खास बात यह है कि यह सालाना सरकारी संस्कार और अनिवार्य आर्थिक अनुष्ठान है. यह आर्थिक दस्तावेज ही नहीं राजनीतिक साहित्य भी है. बजट भी राजनीति का दर्पण होता है जैसे सहित्य समाज का. सियासी तकाजे और चाह इसका चरित्र हर साल बदल देते हैं. कभी यह सख्त होता है तो कभी वायवीय. इसकोको सही सही बांचना हमेशा से…

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