गौरी लंकेश को अपने विचारों में जिंदा रखें

यह मातम मनाने का वक्त नहीं है. लंकेश के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम लंकेश की मुहिम को आगे बढ़ाएँ. ‘फेक न्यूज फैक्ट्री’ के षड़यंत्र को लगातार बेनकाब करते रहें. तार्किकता, वैज्ञानिकता, समाजवाद, लोकतंत्र, भाईचारे के प्रति अपनी निष्ठा प्रदर्शित करते रहें. लंकेश को अपने विचारों में जिंदा रखें.

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नफरत की विचारधारा और बढ़ती असहिष्णुता

हिन्दू राष्ट्रवादी ब्रिगेड अब इस भगवाधारी स्वामी को निशाना बना रही है. उन पर हमला, उसी श्रृंखला का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत डॉ दाभोलकर की हत्या से हुई थी. उसके बाद कामरेड गोविन्द पंसारे मारे गए, फिर डॉ कलबुर्गी और उनके बाद गौरी लंकेश. समाज में जैसे-जैसे असहिष्णुता बढ़ रही है, वैसे-वैसे असहमति के लिए स्थान कम होता जा रहा है. जो भी व्यक्ति शासकों की सोच से इत्तेफाक नहीं रखते, उन्हें चुन-चुन कर निशाना बनाया जा रहा है. चूंकि हमलावरों को पता है कि शासक दल के नेता न केवल उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होने देगें बल्कि वे उनकी प्रशंसा करेंगे इसलिए ऐसे लोगों की हिम्मत बढ़ रही है.

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