यातना का प्रतिकार प्रेम

मंगलेश की कविता ने प्रेम को बराबर एक सर्वोच्च मूल्य के तौर पर प्रतिष्ठित किया है । लेकिन एकान्त में नहीं, यातना के बरअक्स; क्योंकि प्रेम को नष्ट किया जाना ही यातना का सबब है और मुक्ति अगर सम्भव है, तो प्रेम की ही मार्फ़त । इसलिए न उन्होंने प्रेम और यातना की अलग–अलग कोटियाँ निर्मित कीं, न कला और प्रतिबद्धता की ।

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