महेश्वर स्मृति आयोजन में युवा कवि अदनान कफ़ील दरवेश और विहाग वैभव का काव्य पाठ

महेश्वर चाहते थे कि कवि-लेखकों और जनता के बीच कम से कम दूरी हो: आलोक धन्वा महेश्वर की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरूरत है: संतोष सहर पटना, 24 जून . ‘‘महेश्वर चाहते थे कि कवि-लेखकों और जनता के बीच कम से कम दूरी हो, क्योंकि जनता ही रचना का अनंत स्रोत होती है। वह जनता जो मेहनत करती है, ईमान की रोटी खाती है। खून और कत्लोगारत में डूबो देने की नृशंसता से संघर्ष करते हुए वही जीवन को बचाती है।’’ आज बीआईए सभागार में दो दिवसीय महेश्वर स्मृति…

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यातना का प्रतिकार प्रेम

मंगलेश की कविता ने प्रेम को बराबर एक सर्वोच्च मूल्य के तौर पर प्रतिष्ठित किया है । लेकिन एकान्त में नहीं, यातना के बरअक्स; क्योंकि प्रेम को नष्ट किया जाना ही यातना का सबब है और मुक्ति अगर सम्भव है, तो प्रेम की ही मार्फ़त । इसलिए न उन्होंने प्रेम और यातना की अलग–अलग कोटियाँ निर्मित कीं, न कला और प्रतिबद्धता की ।

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‘ हमारे वतन की नयी ज़िन्दगी हो ‘

कोरस ने पटना में ‘एक शाम गोरख के नाम’ अयोजीय किया पटना , 28 जनवरी. कोरस द्वारा जनकवि गोरख पांडेय की स्मृति दिवस के पूर्व संध्या पर 28 जनवरी को ‘एक शाम गोरख के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन ,गांधी मैदान में किया गया. यह कार्यक्रम वरिष्ठ कवि चंद्रकांत देवताले,कुंवर नारायण, गायिका गिरिजा देवी,साहित्यकार सुरेंद्र स्निग्ध ,दूध नाथ सिंह और प्रो. विनय कंठ को समर्पित था.कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि आलोक धन्वा थे. कार्यक्रम की शुरुआत गोरख पांडेय द्वारा लिखित ‘हमारे वतन की नयी ज़िन्दगी हो’ गीत से हुई.उसके बाद…

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