उनसे झुकने को कहा गया वो रेंगने लग गए

मार्च 1971 में हुए चौथी लोकसभा के चुनाव अपने आप में खासे महत्वपूर्ण थे। कांग्रेस इंदिरामयी हो चुकी थी। तब मार्गदर्शक-मण्डल शब्द तो गढ़ा नहीं गया था लेकिन इंदिरा गांधी को चुनौती दे सकने वाले सभी वरिष्ठ धुरंधर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (ओ) में सिमट गए थे। अपने तूफानी चुनावी दौरों में इंदिरा गांधी जनता को ये बताना नहीं भूलती थीं कि वे जवाहरलाल नेहरू की बेटी हैं और देश सेवा, त्याग, बलिदान उनके परिवार की परंपरा है। माहौल ऐसा बन गया था कि अमेरिका की पत्रिका ‘न्यूज़वीक’ ने लिखा रैलियों…

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अपनी कथाओं में बाहरी दर्शक नहीं, खुद भी सम्मिलित हैं अमरकांत : प्रो राजेन्द्र कुमार

कथाकार अमरकान्त की स्मृति में सेंट जोसेफ़ में कार्यक्रम इलाहाबाद,  17 फरवरी. आज सेंट जोसेफ़ स्कूल के होगेन हॉल में जसम, जलेस, प्रलेस, परिवेश और अभिव्यक्ति की ओर से कथाकार अमरकान्त की याद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर  ‘समकालीन चुनौती’ और ‘स्मृति में अमरकान्त’ पत्रिकाओं का अमरकान्त पर केंद्रित विशेषांक का विमोचन रविकिरण जैन, प्रो राजेन्द्र कुमार, सुधीर, अशोक सिद्धार्थ, अनीता गोपेश, रमेश ग्रोवर और शिवानंद ने किया. इस अवसर पर नीलम शंकर ने अमरकान्त की अप्रकाशित कहानी ‘साड़ियाँ’ और अरविंद बिंदु ने उनके अप्रकाशित…

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