एक अंतहीन प्यास और तलाश की कथा विमलेश त्रिपाठी का उपन्यास ‘हमन हैं इश्क मस्ताना’

अनिला राखेचा हिंदी युग्म द्वारा प्रकाशित विमलेश त्रिपाठी  का ताज़ा-तरीन उपन्यास “हमन हैं इश्क मस्ताना” जितना अद्भुत है उतना ही बेजोड़ है इसका शीर्षक। उपन्यास का यह शीर्षक संत कवि कबीर दास जी के दोहे से लिया गया है- “हमन इश्क है मस्ताना हमन को होशियारी क्या… रहें आजाद या जग से हमन दुनिया से यारी क्या!” अर्थात, हम तो इश्क की मस्ती में हैं हमसे होशियारी क्या करते हो। हम संसार में रहें या संसार से दूर  इसमें लिप्त नहीं होते। यह कथन पूरी तरह उपन्यास के शीर्षक की सार्थकता…

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