अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : अभी और लड़ाई लड़नी है

कंवलजीत कौर कहीं पढ़ रही थी जिसमें जिक्र था कि भारत के सबसे गरीब जिलों में से एक तमिलनाडु के पुडुकोट्टई की महिलाओं ने जो किया वह स्त्री अस्मिता, स्त्री स्वतंत्रता और स्त्री गतिशीलता के बेहतरीन उदाहरणों में से एक है. इन महिलाओं ने साइकिल को अपना प्रतीक बनाया. साइकिल से चलने के उनके फैसले की खूब आलोचना हुई पर वे अपने फैसले पर अडिग रहीं. माध्यमिक स्कूल में पढ़ाने वाली फातिमा कहती हैं – “साइकिल चलाने में एक खास तरह की आजादी है. हमें किसी पर निर्भर नहीं रहना…

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