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मजदूर-किसानों और कामकाजी हिस्से की व्यापक एकता भाजपा को परास्त करेगी : दीपंकर भट्टाचार्य

मजदूर-किसानों और कामकाजी हिस्से की व्यापक एकता भाजपा को परास्त करेगी : दीपंकर भट्टाचार्य

जहानाबाद के गांधी मैदान में भाजपा भगाओ-गरीब बचाओ रैली के साथ खेग्रामस का राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू जहानाबाद. जहानाबाद के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 19 नवम्बर को दसियों हजार गरीब-गुरबों, मजदूरों का जुटान हुआ. यह ऐतिहासिक जुटान अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के छठे ...

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विभाजन को समझे बिना हल नहीं होगा सौहार्द का प्रश्न

विभाजन को समझे बिना हल नहीं होगा सौहार्द का प्रश्न

सामाजिक सौहार्द का मतलब केवल शांतिपूर्ण सहअस्तित्व नहीं होता. शांति तो ताकत और दमन से भी कायम की जा सकती है. शांति तो युद्धविराम की भी हो सकती है. शांति तो मजबूरी की भी हो सकती है. पर ऐसी शांतियों के भीतर भीषण अशांतियाँ खौलती रहती हैं. कभी भी फुट पड़ने को आतुर. सौहार्द्र का मतलब है एक दूसरे की जरूरत महसूस करना। अपने अधूरेपन को समझना और महसूस करना कि दूसरे के बिना वो पूरा नहीं हो सकता.

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स्त्री की खुली दुनिया का वृत्त हमारे समक्ष प्रस्तुत करतीं कविताएँ

स्त्री की खुली दुनिया का वृत्त हमारे समक्ष प्रस्तुत करतीं कविताएँ

अच्युतानंद मिश्र निर्मला गर्ग की कविताओं में मौजूद सहजता ध्यान आकृष्ट करती है. सहजता से यहाँ तात्पर्य सरलीकरण नहीं है, बल्कि सहजता का अर्थ है विषय के प्रति साफ़ दृष्टि. ऐसे समय ,जब साहित्य को विमर्शवाद की तंग गली में ले जाने का प्रयत्न व्यापक तौर पर अंजाम दिया जा रहा...

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कहानी दो फैसलों की : आसिया बीबी और सबरीमाला

कहानी दो फैसलों की : आसिया बीबी और सबरीमाला

आज दोनों पड़ोसी देशों में कई मामलों मे एक-से हालात हैं। कुछ दशक पहले तक भारत का चरित्र अपेक्षाकृत लोकतांत्रिक, उदार एवं धर्मनिरपेक्ष था किंतु सन् 1990 के दशक से भारत में पाकिस्तान की तरह रूढ़िवाद हावी हो रहा है और राजनीति में धर्म का दखल बढ़ता जा रहा है।

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अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) का छठा राष्ट्रीय सम्मेलन 19-20 नवंबर को जहानाबाद में

अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) का छठा राष्ट्रीय सम्मेलन 19-20 नवंबर को जहानाबाद में

पटना. भाकपा-माले से संबद्ध अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) का छठा राष्ट्रीय सम्मेलन 19-20 नवंबर को जहानाबाद में होगा. पटना में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए खेग्रामस के राष्ट्रीय महासचिव का. धीरेन्द्र झा ने कहा कि यह सम्मेलन ‘मजदूर-किसानों ने...

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मजदूर-किसानों और कामकाजी हिस्से की व्यापक एकता भाजपा को परास्त करेगी : दीपंकर भट्टाचार्य

जहानाबाद के गांधी मैदान में भाजपा भगाओ-गरीब बचाओ...

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विभाजन को समझे बिना हल नहीं होगा सौहार्द का प्रश्न

सामाजिक सौहार्द का मतलब केवल शांतिपूर्ण सहअस्तित्व नहीं होता. शांति तो ताकत और दमन से भी कायम की जा सकती है. शांति तो युद्धविराम की भी हो सकती है. शांति तो मजबूरी की भी हो सकती है. पर ऐसी शांतियों के भीतर भीषण अशांतियाँ खौलती रहती हैं. कभी भी फुट पड़ने को आतुर. सौहार्द्र का मतलब है एक दूसरे की जरूरत महसूस करना। अपने अधूरेपन को समझना और महसूस करना कि दूसरे के बिना वो पूरा नहीं हो सकता.

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स्त्री की खुली दुनिया का वृत्त हमारे समक्ष प्रस्तुत करतीं कविताएँ

अच्युतानंद मिश्र निर्मला गर्ग की कविताओं में...

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कहानी दो फैसलों की : आसिया बीबी और सबरीमाला

आज दोनों पड़ोसी देशों में कई मामलों मे एक-से हालात हैं। कुछ दशक पहले तक भारत का चरित्र अपेक्षाकृत लोकतांत्रिक, उदार एवं धर्मनिरपेक्ष था किंतु सन् 1990 के दशक से भारत में पाकिस्तान की तरह रूढ़िवाद हावी हो रहा है और राजनीति में धर्म का दखल बढ़ता जा रहा है।

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अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) का छठा राष्ट्रीय सम्मेलन 19-20 नवंबर को जहानाबाद में

पटना. भाकपा-माले से संबद्ध अखिल भारतीय खेत व...

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‘ स्‍वच्‍छ भारत अभियान मोदी का एक और जुमला है ’

राष्‍ट्रीय कन्‍वेंशन में जंतर मंतर पर जुटे देश...

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एक तरफ ‘ स्वच्छ भारत ‘ का ढोंग दूसरी तरफ हर 3 दिन में एक सफाईकर्मी की मौत

उर्मिला चौहान पूरे देश मे सफाई कर्मचारियों की...

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जनसंवाद चौपाल में जोशीमठ नगरपालिका चुनाव के प्रत्याशियों ने रखी अपनी बात

उत्तराखंड में नगर निकायों के चुनावों का प्रचार...

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मजदूर-किसानों और कामकाजी हिस्से की व्यापक एकता भाजपा को परास्त करेगी : दीपंकर भट्टाचार्य

जहानाबाद के गांधी मैदान में भाजपा भगाओ-गरीब बचाओ रैली के साथ खेग्रामस का राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू जहानाबाद. जहानाबाद के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 19 नवम्बर को दसियों हजार गरीब-गुरबों, मजदूरों का जुटान हुआ. यह ऐतिहासिक जुटान अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के छठे ...

विभाजन को समझे बिना हल नहीं होगा सौहार्द का प्रश्न

सामाजिक सौहार्द का मतलब केवल शांतिपूर्ण सहअस्तित्व नहीं होता. शांति तो ताकत और दमन से भी कायम की जा सकती है. शांति तो युद्धविराम की भी हो सकती है. शांति तो मजबूरी की भी हो सकती है. पर ऐसी शांतियों के भीतर भीषण अशांतियाँ खौलती रहती हैं. कभी भी फुट पड़ने को आतुर. सौहार्द्र का मतलब है एक दूसरे की जरूरत महसूस करना। अपने अधूरेपन को समझना और महसूस करना कि दूसरे के बिना वो पूरा नहीं हो सकता.

अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) का छठा राष्ट्रीय सम्मेलन 19-20 नवंबर को जहानाबाद में

पटना. भाकपा-माले से संबद्ध अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) का छठा राष्ट्रीय सम्मेलन 19-20 नवंबर को जहानाबाद में होगा. पटना में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए खेग्रामस के राष्ट्रीय महासचिव का. धीरेन्द्र झा ने कहा कि यह सम्मेलन ‘मजदूर-किसानों ने...

‘ स्‍वच्‍छ भारत अभियान मोदी का एक और जुमला है ’

राष्‍ट्रीय कन्‍वेंशन में जंतर मंतर पर जुटे देश भर के सफाई कर्मचारी नई दिल्ली. जंतर मंतर पर 16 नवम्बर को देश भर के सफाई कर्मचारियों ने राष्‍ट्रीय कन्‍वेंशन का आयोजन किया. इसमें बिहार, कर्नाटक, तमिलनाडु, छत्‍तीसगढ़, उड़ीसा, उत्‍तर प्रदेश, दिल्‍ली सहित अन्‍य राज्‍यों से...

नेहरू की छवि के साथ खिलवाड़ छद्म इतिहास निर्माण की कोशिश है

रमा शंकर सिंह यह इतिहास की बिडम्बना है कि जिस जवाहरलाल नेहरु ने जीवन भर इतिहास पढ़ा, लिखा और इससे बढ़कर इतिहास बनाने का काम किया, उसी नेहरु को हमारे समय में निरादृत होना पड़ा है, विशेषकर उसके अपने देशवासियों से ही- उन देशवसियों से जिन्हें वे बेपनाह मोहब्बत करते थे. उनकी...

संस्‍कृति

कविता

स्त्री की खुली दुनिया का वृत्त हमारे समक्ष प्रस्तुत करतीं कविताएँ

अच्युतानंद मिश्र निर्मला गर्ग की कविताओं में मौजूद सहजता ध्यान आकृष्ट करती है. सहजता से यहाँ तात्पर्य सरलीकरण नहीं है, बल्कि सहजता का अर्थ है विषय के प्रति साफ़ दृष्टि. ऐसे समय ,जब साहित्य को विमर्शवाद की तंग गली में ले जाने का प्रयत्न व्यापक तौर पर अंजाम दिया जा रहा...

कहानी

प्रभा दीक्षित के नवगीतों में नारी मन के साथ आमजन भी – कमल किशोर श्रमिक

‘ गौरैया धूप की ’ का हुआ लोकार्पण  कानपुर। जन संस्कृति मंच, कानपुर के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ प्रभा दीक्षित के नवगीत संग्रह ‘गौरैया धूप की’ का लोकार्पण समारोह सिटी क्लब, कानपुर में  30 सितम्बर को आयोजित  हुआ जिसकी अध्यक्षता जनकवि कमल किशोर श्रमिक ने की।...

नाटक

कोरस के सालाना कार्यक्रम ‘अजदिया भावेले’ में रजिया सज्जाद ज़हीर की कहानियों का पाठ एवं मंचन

28 अक्टूबर, पटना आज कोरस के सालाना कार्यक्रम ‘अजदिया भावेले’ की शृंखला में इस बार साहित्यकार, नाट्यकर्मी व एक्टिविस्ट रज़िया सज़्ज़ाद ज़हीर के जन्म-शती वर्ष पर उनकी कहानियों का पाठ एवं मंचन का आयोजन किया गया। भारतीय उपमहाद्वीप में प्रगतिशील धारा के साहित्य पर...

सिनेमा

कल्पना लाज़मी के सिनेमा में एक सशक्त स्त्री की छवि उभरकर सामने आती है

यूनुस खान   कल्‍पना लाजमी का जाना हिंदी फिल्‍म जगत का एक बड़ा नुकसान है। बहुत बरस पहले एक सीरियल आया था ‘लोहित किनारे’। ये दूरदर्शन का ज़माना था। मुमकिन है आपको ये सीरियल याद भी हो। इसका शीर्षक गीत शायद भूपेन हजारिका ने गाया था। असम की कहानियों पर केंद्रित ये...

चित्रकला

कामरेड चंद्रशेखर का एक चित्र

  आज कामरेड चंद्रशेखर का जन्म दिन है. सत्तर के दशक में बनारस के कुछ प्रतिभाशाली चित्रकारों ने नक्सलवादी विचारधारा के करीब रहकर बहुत महत्वपूर्ण काम किया था। करूणानिधान, अनिल करनजई और विभास दास उनमें प्रमुख थे. कामरेड चंदू का यह चित्र विभास दास का बनाया हुआ...

जनभाषा

अमरेंद्र की अवधी कविताएँ: लोकभाषा में संभव राजनीतिक और समसामयिक अभिव्यक्तियाँ

( कवि-कथन : अवधी में कविता क्यों ? मुझसे मुखातिब शायद यही, किसी का भी, पहला सवाल हो। जवाब में कई बातें हैं लेकिन पहला कारण यही है कि जैसी सहजता मैं अपनी मातृभाषा अवधी में पाता हूँ वैसी कहीं दूसरी जगह नहीं। यह सहजता ‘प्रथम भाषा’ होने की सहजता है। यह सहजता वैसे ही है...

जेरे बहस

भारतीय संवैधानिक अदालतें और धर्मनिरपेक्षता (भाग-1)

भारतीय संवैधानिक अदालतें और धर्मनिरपेक्षता (भाग-1)

 इरफान इंजीनियऱ   पिछले कुछ वर्षों से, परंपराओं और रीति-रिवाजों के नाम पर, भारत में धर्मनिरपेक्षता को पुनर्परिभाषित करने और उसकी सीमाओं का पुनः निर्धारण करने का चलन हो गया है। संविधान निर्माताओं ने एकमत से न सही, परंतु बहुमत से धर्मनिरपेक्षता को संविधान का...

राफेल डील : कुछ तो है, जिसकी पर्दादारी है

राफेल डील : कुछ तो है, जिसकी पर्दादारी है

जाहिद खान राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर मोदी सरकार की लाख पर्देदारी और एक के बाद एक लगातार बोले जा रहे झूठ के बीच, इस विमान सौदे के सभी राज खुलते जा रहे हैं। ताजा खुलासा फ्रांस के पूर्व राट्रपति फ्रास्वां ओलांद ने खुद किया है। एक फ्रेंच अखबार को दिए इंटरव्यू में ओलांद ने...

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