कबीर और नागार्जुन की जयंती से जन एकता सांस्कृतिक यात्रा आरम्भ

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बेगूसराय. आज ज्येष्ठ पूर्णिमा दिनांक 28/06/2018 को जन संस्कृति मंच की ओर से कबीर और आधुनिक कबीर नागार्जुन की सम्मिलित जयंती मनायी गयी। इस जयंती के अवसर पर जसम ने जन एकता सांस्कृतिक यात्रा का आयोजन किया, जो वर्तमान व्यवस्था में पल रहे फासीवादी तत्त्व के खिलाफ जन-जागृति का अभियान था। जन एकता सांस्कृतिक यात्रा की शुरुआत बेगूसराय से हुई, जहां नागार्जुन जी की छोटी बेटी मंजू देवी तथा दामाद अग्निशेखर जी ने झंडी दिखाकर जत्था को विदा किया। इस प्रथम जत्थे का नेतृत्व जसम के राज्य उपाध्यक्ष दीपक सिन्हा ने किया। यह जत्था समस्तीपुर होते हुए दरभंगा पहुंचा।

दूसरे जत्थे का नेतृत्व जसम राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा समकालीन चुनौती के संपादक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमन तथा जसम दरभंगा के जिला सचिव रामबाबू आर्य ने किया। यहां ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा में केंद्रीय पुस्तकालय के समीप स्थित नागार्जुन जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. चंद्रभानु प्रसाद सिंह समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने माल्यार्पण किया । यहां से सांस्कृतिक जत्था में हिंदी-विभाग के शोधार्थीगण सम्मिलित हुए ।इस जत्था का अगला पड़ाव बना गांव हुसैनपुर सतलखा ।यह बाबा नागार्जुन के ननिहाल होने के साथ ही उनका जन्म स्थल भी है। यहां पर सांस्कृतिक जत्थे ने बाबा की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के अलावा उनके लेखन और व्यक्तित्व पर व्याख्यान तथा काव्य-पाठ का कार्यक्रम भी किया।

इस कार्यक्रम में जसम, मधुबनी के जिलाध्यक्ष डॉ. चंद्रमोहन झा, डॉ. मोहित ठाकुर तथा शोधप्रज्ञों में ऋचा मिश्रा,शंकर कुमार, उमेश कुमार शर्मा, हरिओम कुमार, सरोजिनी गौतम तथा खुशबू कुमारी ने अपने उद्गार व्यक्त किए। यहां स्थानीय कवि प्रीतम निषाद ने अपनी स्वरचित मैथिली कविता से जनसमूह को मंत्रमुग्ध किया।

अशोक कुमार पासवान द्वारा नागार्जुन की मैथिली कविता का गायन किया गया। रंगनायक की टीम में दीपक सिन्हा द्वारा अन्न पचीसी कविता का गायन हुआ तथा देवेंद्र कुमार ने भोजपुरी के गीत का गायन किया।यहां कार्यक्रम का समापन रामबाबू आर्य के संबोधन से हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमन के द्वारा हुआ।

हुसैनपुर सतलखा के बाद सांस्कृतिक यात्रा का जत्था नागार्जुन जी के गांव तरौनी पहुंचा, वहां के पुस्तकालय के अवलोकन के बाद नागार्जुन जी के घर पर जाकर उनके छोटे बेटे तथा अन्य परिजनों से मिला गया ।भोक्कर यादव तथा गंगिया देवी की स्मृति में बने ‘जोड़ा मंदिर’, जिनपर नागार्जुन जी ने कविता लिखी है, इस स्थल को भी सांस्कृतिक यात्रा के जत्थे ने देखा तथा भोक्कर यादव के पोते घुरन यादव से भेंट कर इस बारे में जानकारी हासिल की गयी और सांकृतिक जत्थे की यात्रा के मंतव्य को समझाया।

इसके बाद यात्रा का समापन नागार्जुन नगर कबीर चक के नज़दीक कॉलेज गेट के पास हुआ, जहां बेगूसराय के दीपक सिन्हा के नेतृत्व में जनवादी गीतों एवं बाबा की रचना ‘तेरी खोपड़ी के अंदर’ की नाट्य प्रस्तुति की गई। इस कार्यक्रम को भी जत्था में सम्मिलित सभी वक्ताओं ने संबोधित किया ।इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सत्ता संपोषित फासीवादी बर्बरता और लोकतंत्र तथा संविधान पर मंडराते खतरे के खिलाफ जन-जागृति पैदा करना है।

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