जनसंस्कृति की वाहक कला और सपना सिंह की रचना

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” द ट्रु आॅफ हाफ वर्ल्ड “ सपना सिंह के, एक चित्रण श्रृंखला का शीर्षक है.  इस तरह के विषय के चयन की परंपरा चित्रकला जगत में लगभग नहीं रही है. बिल्कुल इस सदी में कुछ चित्रकारों ने इस तरह के विषय केन्द्रित चित्रण की शुरुआत की. आम तौर पर कला की शिक्षा देने वाले हमारे विश्वविद्यालय, तमाम रचनात्मक संभावनाओं को विधिवत् कूट पीस कर एक ऐसा ड्राफ्टमैन बना डालते हैं, जिसे अपनी सृजनात्मकता हासिल करने में एक लंबा वक्त लगता है. बल्कि बहुत तो एक टूटपूंजिया कारीगरी में ही उमर गुजार देते हैं. उसके बाद शुरू होता है अकादमियों और कारपोरेटी कला संस्थानों की चक्करदार भूलभुलैया, जो बची-खुची संभावनाओं को एक किस्म की अबूझ और जादुई होड़ में झोक देती है.

यद्यपि यह उस भ्रष्ट सिस्टम की दास्तान है जिस पर लंबी बहस की जरूरत है. यह हर क्षेत्र की बात है जैसे हिन्दी से पढ़ाई करने वाले ज्यादातर लोग न कवि बनते हैं न कथाकार बल्कि एक अच्छे पाठक और श्रोता भी नहीं बन पाते. बहरहाल कला के क्षेत्र में यह कुछ ज्यादा गंभीर मामला इसलिए है क्योंकि हमारे देश का वृहद् लोक, समकालीन कला जगत से भयानक रूप से अनभिज्ञ है. ऐसी स्थिति में बहुत कम प्रतिभाएं अपने शर्तों पर कला सृजन कर रहीं हैं. ऐसी ही एक चित्रकार हैं सपना सिंह.

सपना सिंह ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से 2013 में बीएफए और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से 2015 में एमएफए की पढ़ाई पूरी की.  फिलहाल वे कला जगत में जनपक्षधर सृजन कर रही हैं.

सपना सिंह का जन्म 26 सितंबर 1992 को एक मध्य वर्गीय परिवार में हुआ. पिता जगत नारायण सिंह सेना में थे तथा माता श्रीमती मंजूला सिंह गृहणी हैं. सपना सिंह चार बहनों में सबसे छोटी हैं. वे बताती हैं कि मेरे घर में सभी की रुचि कला में रही है. बड़ी बहन सीमा सिंह की चित्रकला में बहुत रुचि रही है मगर कला की विधिवत् पढ़ाई करने का अवसर मुझे ही मिला. सपना का पालन-पोषण सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में हुआ. प्रारंभिक शिक्षा रानी मुरार बालिका इन्टर स्कूल, भोजूपुर वाराणसी से हुई.  ग्यारह बारह की पढ़ाई राघवराम वर्मा गर्ल्स इन्टर काॅलेज से हुई.  सपना सिंह की रुचि बचपन से ही कला में थी.  वे जब आठवीं कक्षा में गई, उसी समय उन का सम्पर्क चित्रकार राजकुमार सिंह से हुआ. इस तरह वे संभावना कला मंच से जुड़ी.

संभावना कला मंच से जुड़ाव ने सपना को वह कैनवास उपलब्ध कराया जहां उनका सुंदर सपना एक सार्थक सृजन बन गया. कला अकादमियों और कारपोरेटी कला संस्थानों के मकड़जाल में, सपने अक्सर सब्जबाग साबित होते हैं. सपना सिंह को वह मंजूर नहीं था.
फिलहाल वह ” द ट्रु आॅफ हाफ वर्ल्ड ” श्रृंखला के तहत चित्रण कर रही हैं। हमारे समाज में एक लड़की को असहनीय बंदिशों से गुजरना होता है. उसके रास्ते में कई रुकावटें डाली जाती है. रुढ़िवादी परंपरा और आधुनिक बाजारवादी नजरिया दोनों स्त्रियों को अंततः एक भोग की वस्तु ही समझते हैं. सबसे बड़ी त्रासदी तो यह है कि इस रुकावट में उसके अपने ही सबसे आगे होते हैं. किसी तरह वहाँ से संघर्ष कर आगे बढ़ती है तो रास्ते में दरिंदे जीभ लपलपाते नज़र आते हैं, जो उसे नोच खाना चाहते हैं. ऐसे असभ्य और दकियानूसी समाज में, सपना सिंह आधी दुनिया की सच्चाई लेकर ही नहीं आती हैं बल्कि उनकी गतिशील आकृतियों में वह आक्रोश भरा होता है, जो किसी भी जिंदा नस्ल में दरिंदों के खिलाफ होना चाहिए.

सपना कहती हैं, हाल के दिनों में जब लड़कियों ने अपने संघर्ष के बदौलत थोड़ी आजादी हासिल की है, दकियानूसी ताकतें समय की गति को पीछे मोड़ देना चाहती हैं. इस दरम्यान सपना सिंह का चित्रण कौशल दक्षता से परिपूर्ण नजर आता है. आकृतियों की रचना में सपना कहीं समझौता नहीं करतीं बल्कि तब तक जद्दोजहद करती हैं जब तक वह आकृति सम्प्रेषणीयता के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हो जाती.

यहां प्रस्तुत एक चित्र जो 68\46 इंच के कैनवास पर ऐक्रेलिक रंग में बना है, तीन स्त्री आकृतियाँ दिख रही हैं और बीच के भाग में ऊपर की तरफ एक दिवाल घड़ी का एक हिस्सा दिख रहा है.  सामने से दायीं तरफ की बैंगनी रंग की छट्टाओं में रंगी हुई स्त्री आकृति अपनी बाजुओं में सिर छुपाए बैठी है. जैसे उसके साथ बहुत बूरा हुआ है. जैसा कि आये दिन हमारे समाज में स्त्रियों के साथ होता है. उसके बाद नीले रंग की छटाओं की एक स्त्री आकृति जो बायीं तरफ किसी उम्मीद में देख रही है और सबसे बायीं तरफ लाल और पीले रंग की छटाओं में रंगी हुई आक्रोश से भरी आकृति जैसे इस जहालत से निकल कर आगे बढ़ने को तत्पर है. बीच में घड़ी की सुई टेढ़ी मेढ़ी है जैसे उसके साथ कोई जबरदस्ती हुई हो.

पृष्ठभूमि दो हिस्सों में विभाजित है. पृष्ठभूमि में दो विरोध वर्ण पीले और बैंगनी, गहरे और हल्के नीले लाल और सफेद का कुछ इस तरह प्रयोग किया गया है जैसे एक स्थिति यदि शोषण की है तो दूसरी स्थिति प्रतिरोध की भी है. एक स्थिति यदि अंधेरे की है तो दूसरी स्थिति प्रकाश पैदा करने की भी है. सामंती पुरुषवादी सत्ता स्त्रियों को जहालत के अंधेरे में कैद रखना चाहती है तो स्त्रियाँ अपने संघर्ष और साहस के बदौलत रौशनी और उम्मीद पैदा कर रही हैं.

यद्यपि यही स्थिति कमजोरों और दलितों की भी है मगर स्त्रियों की स्थिति तो बहुत बदतर है. मजबूत तुलिकाघातों, छाया प्रकाश का सिद्ध हस्त प्रयोग विषयानुकूल आकृति संयोजन और प्रभावशाली वर्णयोजना के साथ ही उपयुक्त दृष्टिक्रम का प्रयोग कर सपना ने बहुत ही प्रभावशाली चित्र रचा है. यद्यपि संयोजन के लिहाज से देखा जाए तो पहली नजर में सपना का यह चित्र दो अलग अलग चित्र में विभाजित नजर आता है, मगर शायद यह उनका चित्रण कौशल है कि वह इस स्तर तक जोखिम उठा कर दो विरोधी स्थिति का चित्रण करती हैं.

इसी श्रृंखला और इसी आकार का दूसरा चित्र जिसमें संयोजन के स्तर पर सपना ने इसी तरह का प्रयोग किया है. देखने से इसको बेहतर तरीके से समझा जा सकता है. इसकी पृष्ठभूमि भी मुख्य रूप से पीले-काले अर्थात दो विरोधी वर्ण की ही है जिसमें लाल और सफेद का प्रयोग कर छटाओं में विविधता तथा छाया- प्रकाश पैदा की गई है, इसके संयोजन में एकदम असंतुलन के हद तक जा कर संतुलन बनाए रखने का अद्भुत प्रयोग किया गया है.

ऐसा प्रयोग विषय सम्प्रेषणीयता के लिहाज से सटीक तो है ही और शायद यह सपना सिंह की खासियत भी है. हालांकि सपना सिंह को संयोजन के स्तर पर थोड़ा सजग रहने की जरूरत है. सपना सिंह की दूसरी खासियत विरोधी रंगो के संयोजन की है. इस तरह के प्रयोग में लय और संतुलन टूटने का अधिकाधिक खतरा रहता है, लेकिन सपना सिंह की यह दक्षता है कि वे लयबद्धता और संतुलन को एकदम किनारे पर जाकर भी सुंदरता से संभाल लेती हैं. यह उनकी दक्षता भी है और साहस भी.

उनकी तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण खासियत है विषय का चयन। दबे कुचले के पक्ष में, न्याय के पक्ष में, जनता के पक्ष में, उनके चित्र होते हैं. स्त्री आकृतियाँ केवल स्त्री की आकृतियाँ नहीं हैं बल्कि यह आकृतियाँ हर दबे कुचले मेहनतकश वर्ग की है जो अपने संघर्षों के बदौलत नया जमाना गढ़ रहा है. सपना सिंह के चित्र जन संस्कृति का वहन पूरी प्रतिबद्धता से करते हैं.

इसके अलावे विभिन्न अवसरों पर भित्तिचित्रण और कविता पोस्टर भी सपना सिंह कमाल का बनाती हैं.  यद्यपि सपना सिंह कला की दुनिया में अभी नई ही हैं तथापि उन्होंने कई प्रतिष्ठित प्रदर्शनियों और कार्यशाला में सराहनीय भागीदारी की हैं. सपना सिंह की निरंतर सक्रियता कला जगत में सुखद वितान रचेगी.

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