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January 19, 2020
जेरे बहस व्यंग्य

अब फिट होगा इंडिया

लोकेश मालती प्रकाश

सरकार ने देश की सेहत दुरुस्त करने का बीड़ा उठा लिया है। इसके लिए बाकायदे फिट इंडिया मूवमेंट को खुद प्रधानमंत्रीजी ने हरी झन्डी दिखाई। कुछ रोज़ पहले प्रधानमंत्री जी ने प्लास्टिक के खिलाफ़ क्रान्ति करने का आह्वान किया था। स्वच्छ भारत अभियान चल ही रहा है। अगले महीने पोषण आंदोलन भी शुरू होने वाला है।

एक समय था जब आन्दोलन व क्रान्तियाँ जनता करती थी। बड़े-बड़े साम्राज्यों के खिलाफ़ आम लोगों ने आन्दोलन किए। बाद में सरकारों को लगा कि जनता को आन्दोलन क्रान्ति वगैरह के चक्कर में बड़े कष्ट सहने पड़ते है। इसलिए इसकी ज़िम्मेदारी भी सरकारों ने अपने ऊपर ले ली।

सो आंदोलन-क्रान्ति वगैरह अब सरकारें ही चलाती हैं। इससे सबको सुभीता रहता है। शान्ति बनी रहती है। बल्कि अब अगर जनता इस गली में भटकती है तो सरकार की भृकुटियाँ तनने लगती हैं। राष्ट्र की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगता है।

हालाँकि सरकारी अभियानों-आंदोलनों की गति बिल्कुल निराली होती है। कुछ साल पहले ‘मेक इन इंडिया’ अभियान शुरु किया गया। तब से अब तक देश का उत्पादन घट गया है। अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ गई है। इस वजह से फिट इंडिया आन्दोलन किस अंजाम पर पहुँचेगा इसे लेकर थोड़ी चिन्ता भी हो रही है।

प्रधानमंत्री ने लोगों से फिटनेस का दृढ़ संकल्प लेने को कहा है। उन्होंने उदाहरण के साथ समझाया है – जिस तरह परीक्षाओं में बढ़िया नम्बर लाने के लिए कोई बच्चा संकल्प लेता है तो उसकी पूरी जीवन शैली उसी हिसाब से बदल जाती है। वैसा ही संकल्प।

कहने का मतलब यह कि जो बच्चे अच्छा प्रदर्शन नहीं करते उनमें संकल्प की कमी होती है। परीक्षाओं और नम्बरों के दबाव में जो आत्महत्या कर लेते हैं उनमें संकल्प की कमी है। किसी और की कोई गलती नहीं। कहीं और कोई समस्या नहीं। कमी है तो बस दृढ़ संकल्प की।

प्रधानमंत्री ने ‘लाइफ़स्टाइल डिज़ीज’ का भी जिक्र किया। डाइबटीज़,बीपी,हृदयरोग वगैरह जैसी बीमारियाँ। और इनको ठीक करने का अचूक नुस्खा भी दिया। लाइफ़स्टाइल डिज़ीज़ का इलाज है लाइफ़स्टाइल बदल देना। कितना आसान!

बेटी के लिए जात-बिरादरी का नौकरीपेशा वर खोजने की लाइफ़स्टाइल के कारण जिन बापों का बीपी बिगड़ रहा है उनको रोज़ दस किलोमीटर दौड़ना चाहिए। सेहत भी स्टेबल रहेगी और क्या पता दौड़ते-दौड़ते कोई खानदानी वर भी मिल जाए।

और अगर वर पक्ष की डिमान्ड का ग्राफ़ ऊपर की तरफ भागा तब भी दस किलोमीटर रोज़ दौड़ने वाले बाप का बीपी नहीं बिगड़ेगा। सब मंगल होगा।

नौकरी ढूँढ रहे नौजवानों को भी अपनी लाइफ़स्टाइल बदल कर मोटरसाइकिल,बस,आटो या मेट्रो की बजाय पैदल ही दफ़्तरों की खाक़ छाननी चाहिए। नौकरी मिले न मिले अच्छी सेहत मिल जाएगी। और अच्छे स्वास्थ्य से बड़ा धन क्या है!

जिनकी नौकरी छूट गई है उनको तो अपनी लाइफ़स्टाइल बदलने का सुनहरा मौका मिला है। अब जितने घंटे नौकरी करते थे उतने घंटे व्यायाम कीजिए। सेहत का लाभ उठाइए।

नौकरी छूटने वाली है तो भी परेशान मत होइए। सुबह-शाम घर से हनुमान मंदिर तक दौड़ लगाइए। भगवान और सेहत दोनों पर असर होगा। नौकरी बचे न बचे जीवन बचा रहेगा। और क्या चाहिए।

पितृसत्ता, पूँजीवाद, व्यवस्था वगैरह बदलने की बात करना बेमानी है। खुद को बदल दीजिए। चुटकी बजाते ही सब ठीक हो जाएगा। बीमारी की जड़े तो हमारे भीतर हैं।

विवेकानन्द के हवाले से प्रधानमंत्री जी ने कहा कि सुख-समृद्धि तो बाइ-प्रोडक्ट है। जीवन में कुछ करने की लगन हो तो सुख-समृद्धि अपने आप आ जाते हैं। यानी जो दुखी हैं या दरिद्र हैं यह उनकी कमी है। उनमें कुछ कर गुजरने का ‘पैशन’नहीं है।

कुछ समय पहले ऐसी खबरें आईं थी कि भारत में लोग भारी संख्या में अवसाद से ग्रसित हैं। बल्कि इस मामले में देश अमरीका और चीन को भी मात दे रहा है। कश्मीर में लगभग आधी आबादी में अवसाद के लक्षण पाए गए हैं। नौकरी-पेशा लोग भारी तनाव में हैं।

ये सब लोग इसलिए परेशान और दुखी हैं क्योंकि इनके जीवन में कोई पैशन नहीं है। कोई उद्देश्य नहीं है। इनको अपने जीवन का कोई उद्देश्य बनाना चाहिए। नई सरकार ने कितने सारे ऐसे उद्देश्यों का खूब प्रचार किया है। गाय की सेवा का उद्देश्य। पकौड़े तलने का उद्देश्य। वाट्सएप में रमने का उद्देश्य। कश्मीर में ज़मीन खरीद कर वहाँ की लड़कियों से शादी का उद्देश्य। और अब सुबह-शाम दौड़ने का उद्देश्य।

सबसे बड़ी बात तो यह है कि फ़िट इंडिया वीर रस में डूबा हुआ होगा। प्रधानमंत्रीजी ने बताया कि पहले स्कूलों में’त’से’तलवार’पढ़ाते थे। संकीर्ण सोच के लोगों ने इस पर विवाद किया तो ‘त’से’तरबूज’पढ़ाने लगे। इससे देश में वीर रस की परम्परा को ठेस पहुँची। लेकिन’त’से’तलवार पढ़ाने का दौर फिर से आ गया है। फिट वही है जो दूसरे की गर्दन पर तलवार रख सके। प्रधानमंत्रीजी ने अपने आचरण से यह सिद्ध किया है।

अब देश फ़िटनेस का उत्सव मनाएगा। तलवार का पाठ पढ़ा कर वीर रस का संचार किया जाएगा। जो फिट नहीं वह वीर नहीं। जो वीर नहीं वह देश के किस काम का?मेरी तो सलाह है किस सरकार अनफिट लोगों से इंसान का दर्जा छीन कर उनको तरबूजे का दर्जा दे दे और उनके साथ क्या किया जाना चाहिए यह ‘त’से तलवार का पाठ पढ़ने वाले फिट वीरों पर छोड़ दे। इस तरह फिट इंडिया मूवमेंट कामयाबी की बुलन्दियों को छू लेगा।

(फीचर्ड इमेज गूगल से साभार ।)

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