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आजादी, बराबरी, इंसाफ और भाईचारा भोजपुर के क्रांतिकारियों का सपना था : दीपंकर

का. जगदीश मास्टर, का. रामेश्वर यादव, का. रामनरेश राम, का. जौहर और का. विनोद मिश्र के स्मारक व क्रांति-पार्क का भव्य लोकार्पण हुआ

आरा (बिहार). ‘का. जगदीश मास्टर, का. रामेश्वर यादव, का. रामनरेश राम, का. जौहर और का. विनोद मिश्र ने जनता के जिस लड़ाई को भोजपुर में खड़ा किया, वह पूरे राज्य और देश में फैलता चला गया। आज भी भोजपुर के आंदोलन से पूरे देश में क्रांति, आजादी, समता, बदलाव और लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने वालों को ऊर्जा मिल रही है। भोजपुर आंदोलन के महान नेताओं की स्मृति में बने क्रांति पार्क ऐसे तमाम ताकतों के लिए प्रेरणास्रोत का काम करेगा।’’

का. विनोद मिश्र की बीसवीं बरसी के अवसर पर 18 दिसंबर को आरा बस स्टैंड के पास नवनिर्मित क्रांति पार्क और भोजपुर आंदोलन के पांच नेतृत्वकारी कामरेडों के स्मारक का लोकार्पण करने के बाद ‘लोकार्पण समारोह’ में भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने ये बातें कहीं।

का. दीपंकर ने कहा कि आज का दौर जनता के लिए एक कठिन दौर है, जब देश और बिहार- दोनों जगहों पर ऐसी सरकारें हैं, जो लोकतांत्रिक हक-अधिकार मांगते किसानों, मजदूरों, महिलाओं, नौजवानों, आदिवासियों आदि को कुचल रही हैं। संविधान द्वारा दिए गए लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला जा रहा है और एक फासीवादी तानाशाही निजाम थोपने की कोशिश की जा रही है। सत्ता संविधान के बजाए मनुवाद को लागू कर रही है। हमारी सांप्रदायिक एकता और भाईचारे को नष्ट किया जा रहा है। 2019 में हमें मोदी-जोगी-अमित शाह जैसों को शिकस्त देना होगा। देश में फासिस्ट सरकार का आना एक बड़ा हादसा है। आगामी चुनावों में हमें एक-एक वोट का इस्तेमाल इस देश को बचाने और फासीवाद को शिकस्त देने के लिए करना होगा।

उन्होंने कहा कि झूठ के खिलाफ सच, हिंसा के खिलाफ अमन और उन्माद के खिलाफ भाईचारा व एकता के लिए हमें 1857, 1942, नक्सलबाड़ी और भोजपुर आंदोलन की महान विरासत को लेकर जबर्दस्त संघर्ष की तैयारी करनी होगी। जहां आजादी, बराबरी, इंसाफ और भाईचारा की गारंटी हो, वैसे नए भारत का निर्माण ही भोजपुर के हमारे महान नेताओं का सपना था। इस सपने को साकार करने लिए हम अपनी पूरी ताकत लगाएंगे।

का. दीपंकर ने कहा कि हाल के विधानसभा चुनावों के परिणाम एक झांकी हैं, इस सिलसिले को 2019 में जारी रखना होगा। उन्होंने कहा कि भोजपुर से लाल झंडा को संसद में भेजना होगा।

का. दीपंकर ने 84 के जनसंहार के आरोपी सज्जन कुमार को अदालत द्वारा दी गई सजा का स्वागत करते हुए कहा कि इसी तरह बाबरी मस्जिद शहीद करके देश को दंगों की आग में झोंकने वालों, गुजरात में कत्लेआम करने वालों और बथानी, बाथे समेत तमाम जनसंहारों के आरोपियों और उनके संरक्षकों को सत्ता से बेदखल करने के साथ-साथ उन्हें जेल में भी डालना होगा।

का. दीपंकर ने कहा कि नक्सलबाड़ी के बज्रनाद ने भारत के कम्युनिस्ट आंदोलन को नई ऊर्जा और आवेग दिया था, पर शासकवर्ग ने उसका भीषण दमन किया और उसने सोच लिया कि उसने क्रांति की उस कोशिश को कुचल दिया है, लेकिन नक्सलबाड़ी की चिंगारी जैसे ही एकवारी पहुंची, तो वह व्यापक होती चली गई। सत्तर के दशक में भोजपुर के हमारे साथियों ने सामंती उत्पीड़न और भीषण राज्य दमन को झेलते हुए और शहादतें देते हुए पार्टी को आगे बढ़ाया। चाहे आपातकाल का दौर हो या उसके बाद बनी सरकारों द्वारा जनता के साथ धोखाधड़ी का सिलसिला हो या अस्सी के दशक के वोट देने के अधिकार के लिए तीखे संघर्ष का या जनसंहारों के बल पर गरीब-मेहनतकशों की राजनीतिक दावेदारी को रोकने की कोशिश के प्रतिकार का, हर नाजुक और कठिन दौर में भोजपुर ने रास्ता दिखाने का काम किया।

का. दीपंकर ने कहा कि ये पांच मूर्तियां भोजपुर की क्रांतिकारी विरासत की प्रतीक हैं। शासकवर्ग हरसंभव कोशिश करता है कि लोग अपनी क्रांतिकारी विरासत को भूल जाएं, लेकिन उनकी यादें उस विरासत को आगे बढ़ाने का काम करती है  इस तरह के स्मारक और क्रांति-पार्क और बनाए जाने चाहिए। हम इसमें भोजपुर के क्रांतिकारी आंदोलन के साथ-साथ स्वाधीनता आंदोलन के उन महान नेताओं के भी स्मारक बनाएंगे, जिन्होंने आजादी और बराबरी के सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष किया, शहादतें दीं, अपना पूरा जीवन लगाया।

का. दीपंकर ने कहा कि क्रांति-पार्क देश भर में क्रांति और बदलाव में दिलचस्पी रखने वालों लोगों के सहयोग के बल पर बना है। यह क्रांति-पार्क एक मिसाल बने, आरा शहर के तमाम प्रबुद्ध लोग और क्रांतिकारी जनता इस विरासत को आगे बढ़ाएगी, ऐसी उन्होंने उम्मीद जाहिर की।

आज भाकपा-माले कार्यालय से एक विशाल ‘संकल्प मार्च’ निकाला गया, जो शहर के मुख्य मार्ग से गुजरते हुए क्रांति-पार्क पहुंचा। इस मौके पर भाकपा-माले के केंद्रीय कमेटी की तीन दिवसीय बैठक के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से आरा पहुंचे भाकपा-माले नेताओं, बिहार और भोजपुर के वरिष्ठ नेताओं और उपस्थित जनता ने पांचों नेताओं की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की।

पोलित ब्यूरो सदस्य का. स्वदेश भट्टाचार्य ने झंडात्तोलन किया। इस अवसर पर का. जगदीश मास्टर के पुत्र अशोक कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह, पुत्रिया उषा सिंह, आशा व लीला तथा परिवार के अन्य सदस्यों, का. रामेश्वर यादव के पुत्र बिहारी यादव, का. रामनरेश राम की बेटी सूर्यवंती और नाती राकेश कुमार ने भी पुष्पांजलि अर्पित की। लोकार्पण समारोह का संचालन का. श्यामचंद्र चौधरी ने किया।

संकल्प सभा से पूर्व वरिष्ठ माले नेता का. नंद किशोर प्रसाद ने केंद्रीय कमेटी, राज्य कमेटी के सदस्यों, तमाम माले कार्यकर्ताओं और वहां मौजूद जनता का स्वागत किया। लोकार्पण समारोह की शुरुआत शहीद गीत से हुई।

इस अवसर पर सांस्कृतिक सत्र में जनकवि कृष्ण कुमार निर्माेही ने भोजपुर के शहीदों और विनोद मिश्र पर रचित अपने जनगीत सुनाए। हिरावल के संतोष झा और राजन कुमार ने रमता जी के गीत ‘क्रांति के रागिनी हम त गईबे करब’ और विजेंद्र अनिल के गीत ‘लिखने वालों को मेरा सलाम’ सुनाया। पुकार टीम के कामता और ललन यादव ने ‘साथी कदम-कदम बढ़ते जाना’ गीत सुनाया।

सांस्कृतिक सत्र का संचालन सुधीर सुमन ने किया। इस अवसर पर आलोचक रामनिहाल गुंजन, कथाकार सुरेश कांटक, कवि-आलोचक जितेंद्र कुमार, चित्रकार राकेश दिवाकर, विस्मय चिंतन, मूर्तिकार विनीत बिहारी आदि भी मौजूद थे।

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