दिल्ली के मुखर्जी नगर में स्थानीय गुंडों के खिलाफ आंदोलनरत छात्रों पर बर्बर पुलिसिया लाठीचार्ज

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सौरभ यादव, शोध छात्र, दिल्ली विश्वविद्यालय

मुखर्जी नगर, दिल्ली । देश भर में प्रशासनिक सेवाओं, एसएससी, बैंकिंग समेत तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के केंद्र के रूप में जाना जाने वाला दिल्ली का मुखर्जी नगर का इलाका पिछले कुछ दिनों से आंदोलित है। यूँ तो मुखर्जी नगर में रहने वाले छात्र समय-समय पर अपनी न्यायोचित मांगों के लिए प्रदर्शन करते आये हैं । UPSC से सी-सैट हटाने का मामला रहा हो या SSC स्कैम का मामला, यहां के छात्रों ने अपने हक़ की लड़ाइयां लड़ी और अपनी मांगों को सरकार से मनवाया है। लेकिन इस बार के आंदोलन का सम्बन्ध किसी प्रतियोगी परीक्षा से नहीं है बल्कि इस बार का आंदोलन स्थानीय लम्पट गुंडों द्वारा आए दिन छात्रों से मारपीट, छात्राओं से छेड़खानी, मकान मालिकों और दलालों के बने नेक्सस द्वारा किये जा रहे छात्रों के उत्पीड़न से जुड़ा है।

इस आंदोलन की शुरुआत स्थानीय गुंडो द्वारा तीन-चार दिन पहले नेहरू विहार में मामूली सी बात पर एक प्रतियोगी छात्र की पिटाई के विरोध से शुरू हुआ । छात्र को बचाने आये अन्य छात्रों को भी रॉड व डंडो तक से पीटा गया जिसमें कई छात्र बुरी तरह से घायल हुए। इस घटना के बाद छात्र एकजुट होकर पुलिस थाने पहुँचे तो पुलिस द्वारा हमेशा की तरह किसी भी तरह का न कोई आश्वासन दिया गया न ही आगे कोई कार्यवाही की गई।

अभी इस घटना को एक ही दिन बीता था कि डिम्पी नाम के एक प्रॉपर्टी डीलर ने एक अन्य छात्र को बुरी तरह से पीट दिया। जिससे आक्रोशित छात्रों ने हंगामा कर पुलिस प्रशासन पर कार्यवाही का दबाव बनाया लेकिन पुलिस ने अपराधियों पर कार्यवाही करने की बजाय प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठी चार्ज कर दिया। इस लाठी चार्ज में आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित ‘डार्क हॉर्स’ नामक पुस्तक के लेखक नीलोत्पल मृणाल समेत कई छात्रों को चोट आई हैं। जिसके परिणाम स्वरूप इस आंदोलन ने और बड़ा रूप ले लिया है और छात्रों ने फैसला लिया है कि जबतक उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं तब तक वे शांतिपूर्वक धरना देंगे।


मुखर्जी नगर सिविल,एसएससी और बैंक समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं के कोचिंग संस्थाओं का केंद्र है, जिसके आसपास नेहरू विहार, गांधी विहार, इंदिरा विकास, इंदिरा विहार नाम के मोहल्ले हैं, जिसमें लाखों की संख्या में छात्र किराए के कमरों में रहते हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं । कोचिंग से नजदीक होने की सुविधा के कारण यहां सामान्य घरों के किचेन और बाथरुम जितने बड़े कमरों में छात्र-छात्राएं रहते हैं । यहाँ बिना खिड़की और रोशनदान वाले 10×10 के सिंगल कमरे का औसतन किराया आठ से दस हज़ार होता है और अगर ये दो कमरों का फ्लैट हुआ तो यह किराया चौदह से पन्द्रह हज़ार तक हो जाता है।

मकान मालिकों और दलालों का एक पूरा सिंडिकेट अवैध तरीके से लोकल पुलिस के सहयोग से यहां काम करता है। यहां बिना दलाल के मकान मालिक कमरे किराए पर नहीं देते हैं। इसके बदले में दलाल मकान मालिकों को छात्रों से मोटा किराए दिलवाते हैं और बदले में मकान मालिक छात्रों से दलाल को उसकी दलाली के बतौर एक महीने के किराए की आधी रकम दिलाता है। अगर छात्र को दस हज़ार का कमरा लेना है तो उसे मकान मालिक को दस हज़ार रुपये किराए के साथ ही दस हज़ार एडवांस और किराए का आधा पांच हज़ार दलाल की दलाली यानी कुल मिला कर पच्चीस हजार पहले महीने में देने होते हैं । दस हज़ार एडवांस सिक्योरिटी के नाम पर लिया जाता है जो कमरे को खाली करने के बाद मकान मालिक को वापस करने होते हैं, जो मकान मालिकों द्वारा वापस नहीं करने पर आये दिन छात्रों से उनके विवाद का कारण बनता है, जिसमें मकान मालिकों द्वारा स्थानीय गुंडों के सहयोग से छात्रों को पीटा जाता है और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती ।

इस नेक्सस की वजह से पिछले कुछ सालों में इस इलाके का किराया 4 से 5 गुना हो चुका है और स्थिति ये है कि कई मकान मालिक अपने रहने वाले घरों को भी किराए पर उठा कर खुद कहीं सस्ती जगह किराए के मकान में रहने चले जाते हैं।

दिल्ली सरकार द्वारा दी जा रही बिजली-पानी की सब्सिडी का फायदा छात्रों को नहीं दिया जाता है बल्कि बिजली-पानी के नाम पर उनसे अतिरिक्त उगाही की जाती है। स्थानीय लम्पट और गुंडों की वजह से यहां कमरों में चोरियां आम बात है जिस पर पुलिस की मिलीभगत होने की वजह से कोई कार्यवाही नहीं होती।
जिस दौरान ये आंदोलन हो रहा है उस समय यहां के स्थानीय सांसद और दिल्ली BJP के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में एक स्टेज शो में व्यस्त है। आम आदमी के स्थानीय विधायक पंकज पुष्कर का भी अभी तक इस मामले में कोई बयान नहीं आया है। छात्रों के पक्ष में खड़े होने पर सरकार और विपक्ष दोनों को अपने वोट बैंक के खिसकने का डर है, जिसका प्रभाव पुलिस प्रशासन पर भी साफ देखने को मिल रहा है।
कल पुलिस द्वारा किये गए लाठी चार्ज के खिलाफ छात्रों द्वारा किये जा रहे आज के प्रदर्शन में एक तरफ पुलिस अधिकारियों ने छात्रों की मांगों को मानने का आश्वासन दिया है वही दूसरी तरफ मकान मालिक, दलाल और स्थानीय गुंडों द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों को लगातार धमकियां दी रही हैं। हाथों में रॉड ,चाकू समेत तमाम हथियार लेकर पूरे नेहरू विहार में स्थानीय गुंडे जगह-जगह गोलबंद हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी खड़ी है। यही वजह है कि छात्र अपनी मांगों को लेकर अभी भी अड़े हैं ।

उनकी मांग है कि स्थानीय गुंडों से छात्रों को सुरक्षा दी जाए और किसी भी अपराध पर पुलिस द्वारा तुरन्त कार्यवाही हो। कमरों के किरायों को रेगुलेट किया जाए,कमरों के आकार और उसमें उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार कमरों का किराया हो। बिजली-पानी का बिल दिल्ली सरकार द्वारा तय किये गए रेट पर लिया जाए। कोर्ट से एग्रीमेंट बने जिसमें स्पष्ट रूप से किराए, सिक्योरिटी और ब्रोकरेज का उल्लेख हो और कमरों के किराए की हर महीने की पक्की रसीद दी जाए।

मुखर्जी नगर एक समय तक केवल प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी के लिए ही जाना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षो में यहां पैरामाउंट, के.डी. कैम्पस जैसे कोचिंग संस्थान खुलने के कारण यह बैंक और एसएससी की परीक्षाओं का केंद्र भी बन गया है। बेरोजगारों की बढ़ती भीड़ इन कोचिंग संस्थाओं के लिए इनके बाज़ार का बढ़ना है। अपने क्षेत्र में नौकरियां नहीं होने की वजह से बड़ी संख्या में बी.टेक, एम.टेक, एम.बी.ए. किये हुए छात्र-छात्राएं पिछले कुछ सालो में मुख्यतः एसएससी और बैंक की परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुखर्जी नगर में आये हैं ।
छात्रों की भीड़ का आलम ये है कि वन-डे एग्जाम की तैयारी कराने वाली कोचिंग संस्थाओं में सत्तर से अस्सी कक्षाएं समानांतर चलती है। यही वजह है कि कोचिंग संस्थाओं ने रिहायसी इलाको में भी कक्षाएं चलानी शुरू कर दी, जिसे लेकर मुखर्जी नगर के स्थानीय नागरिक कुछ समय पहले कोर्ट गए जहाँ उन्होंने मुखर्जी नगर इलाके में छात्रों की बढती भीड़ से स्थानीय निवासियों को होने वाली असुविधाओं के साथ-साथ अवैध तरीके से कोचिंग संस्थानों द्वारा रिहायसी इलाके में कमर्शियल गतिविधि चलाने का मुद्दा भी उठाया ।

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस पर फैसला देते हुए रिहायसी इलाके में कमर्शियल गतिविधि पर रोक लगाने के साथ ऐसी जगहों पर चल रही कोचिंग संस्थाओं की कक्षाओं को सील करने का आदेश भी दिया और छात्रों की संख्या को देखते हुए कोचिंग संस्थाओं को गुंडग़ांव या नोएडा शिफ्ट होने का विकल्प भी दिया है। इसके बाद एसएससी-बैंकिंग के कुछ संस्थान अपने कुछ केंद्रों को यहां से हटा कर जहांगीरपुरी, मॉडल टाउन ले गए हैं ।
मुखर्जी नगर की पूरी अर्थव्यवस्था छात्रों पर निर्भर है, इसलिये यहां के स्थानीय लोगों को कोचिंग संस्थाओं के चले जाने के बाद आजीविका के संकट का भी डर है।

इस बीच नेहरू विहार वाले मामले में सिविल सर्विस के लिए हिंदी माध्यम की सबसे प्रतिष्ठत कोचिंग संस्थान ‘दृष्टि’ के डायरेक्टर विकास दिव्यकीर्ति ने अपने फेसबुक पेज पर छात्रों को सम्बोधित करते हुए उनकी वाजिब मांगो के लिए समर्थन दिया है और स्थानीय एमपी, एमएलए के साथ छात्रों के एक डेलिगेशन और मकान मालिकों के एक डेलिगेशन के बीच बातचीत के माध्यम से इस मसले को सुलझाने का प्रस्ताव भी दिया है। विकास दिव्यकीर्ति ने ये भी कहा है कि अगर इसके बावजूद भी छात्रों के साथ अन्याय होता है तो बाकी कोचिंग संस्थानों से बातचीत करके यहां से कोचिंग कहीं और स्थानंतरित करने जैसे विकल्प भी खुले हैं।

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One Thought to “दिल्ली के मुखर्जी नगर में स्थानीय गुंडों के खिलाफ आंदोलनरत छात्रों पर बर्बर पुलिसिया लाठीचार्ज”

  1. Anurag Singh

    बिल्कुल सही विश्लेषण किया है आपने। सभी पहलुओं पर बेबाक नज़र और मुख्यत: छात्रों की समस्याओं व अधिकारों पर कलम चलाने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद।

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