ज्ञान और विचार का केंद्र शिब्ली अकादमी

दुर्गा सिंह शिब्ली मंजिल या शिब्ली अकादमी या दारुलमुसन्निफ़ीन (हॉउस ऑफ़ राइटर या लेखकों का अपना घर) आज़मगढ़ में स्थित ऐसी जगह है, जिससे कोई भी स्कॉलर अचंभित हुए बिना नहीं रहेगा. इसकी परिकल्पना अल्लामा शिब्ली नोमानी ने की थी. इसके लिए उन्होंने अपना बंगला और एक आम का बाग़ दिया. अपने परिवारीजनों से ज़मीन मांगी. भोपाल और हैदराबाद रियासत से मदद मांगी. बेगम भोपाल ने पैसों से मदद की. इसके अलावा उन्होंने अपने शागिर्दों को इसमें इन्वाल्व किया. जो लोग ऐसी हैसियत में थे उनसे ताल्लुक रखने वाले सबको…

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डॉ. संजय कुमार पर हुए बर्बर हमले के ख़िलाफ़ दिल्ली टीचर्स इनिशिएटिव का बयान

दिल्ली टीचर्स इनिशिएटिव प्रो. संजय कुमार पर हुए बर्बर हमले की कठोर शब्दों में भर्त्सना करता है. प्रो. संजय कुमार महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी, बिहार में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद पर कार्यरत हैं. 17 अगस्त को उन पर जानलेवा हमला किया गया. महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय शिक्षक संगठन के अध्यक्ष प्रो. प्रमोद मीणा के अनुसार कुलपति प्रो. डॉ. अरविंद अग्रवाल, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवनेश कुमार और असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ. दिनेश व्‍यास आदि के इशारे पर रचित एक षड्यंत्र के तहत अराजक तत्‍वों ने पहले डॉ. संजय कुमार के साथ…

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विश्वविद्यालयों में बढती प्रशासनिक तानाशाही के खिलाफ लखनऊ में धरना

शैक्षिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों में बढती प्रशासनिक तानाशाही व शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ अभिभावक मंच ने 13 जुलाई को परिवर्तन चौक के पास आचार्य नरेन्द्र देव की समाधि स्थल पर धरना व प्रतिरोध सभा का आयोजन किया.

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देशी-विदेशी पूँजी के मुनाफे को बढ़ाने के लिए उच्च शिक्षा के ऊपर लगातार हमले होंगे

उच्च शिक्षा में हो रहे बदलावों को मात्र भाजपा-कांग्रेस के नजरिए से नहीं, बल्कि शासक वर्ग के नजरिए से देखना ही ठीक होगा. तभी हम प्रतिरोध के स्वरूप को भी सही दिशा में ले जा सकते हैं.

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापकों की नियुक्ति के लिए हुई स्क्रीनिंग में अपारदर्शिता व भेदभाव के खिलाफ़ प्रदर्शन

आइसा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अध्यापकों की नियुक्ति के लिए हुई स्क्रीनिंग कमेटी में अपारदर्शिता व भेदभाव के खिलाफ आज प्रदर्शन किया और कुलपति को ज्ञापन सौंपा.

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गुजरात में पाठ्यपुस्तकों का भगवाकरण

   लोकेश मालती प्रकाश    “अपने विषय-वस्तु व रूप से [पाठ्यपुस्तकें] वास्तविकता की विशिष्ट रचनाओं, संभावित ज्ञान के व्यापक ब्रह्मांड में से चुनने और व्यवस्थित करने के विशिष्ट तौर-तरीकों को प्रकट करती हैं। रेमण्ड विलियम्स जिसे चयनशील परंपरा कहते हैं, वे उसी का मूर्त रूप हैं – यानी किसी खास व्यक्ति का चयन, वैध ज्ञान और संस्कृति की किसी खास व्यक्ति की दृष्टि – एक ऐसी परंपरा जो किसी एक समूह की सांस्कृतिक पूंजी को मान्यता देने की प्रक्रिया में दूसरों की सांस्कृतिक पूंजी को अमान्य बना देती है। माइकेल…

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‘ स्वायत्तता’ का आगमन अर्थात अकादमिक संस्थानों को दुकान में तब्दील करने की तैयारी

(दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर  उमा राग का यह लेख  ‘  द वायर ’ में  29 मार्च को प्रकाशित हुआ  है )   हम से छीन लिया गया कॉपी कलम किताब कैद कर लिया गया हमारे सपने को फिर हम से कहा गया तुम स्वायत्त हो हमारे अधिकारों को छीनने के लिए उन्होंने एक नया शब्द गढ़ा है ‘स्वायत्तता’ जैसे उन्होंने कभी अंगूठा काटने को कहा था ‘ गुरु दक्षिणा ‘ –प्रदीप कुमार सिंह कितनी सच है यह पंक्ति कि हमारे अधिकारों को छीनने के लिए ही अक्सर सत्ता नए-नए…

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