इस ‘सिस्टेमेटिक’ सिस्टम से कब आजादी मिलेगी

शालिनी वाजपेयी बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित बालिका गृह में सब ‘सिस्टेमेटिक’ चल रहा था। यहां मैंनें ‘ठीक’ शब्द का प्रयोग जानबूझ के नहीं किया है। महिला आयोग, यूनीसेफ, राज्य बाल संरक्षण समिति, जिला बाल संरक्षण समिति, किशोर न्याय निगरानी समिति सभी ने बालिका गृह का ‘सिस्टेमेटिक’ निरीक्षण किया और सब कुछ सिस्टेमेटिक पाया। हर तिमाही बालिका गृह का निरीक्षण करने वाले जिलाधिकारी, अपर निदेशक समाज कल्याण विभाग तथा अन्य अधिकारियों ने भी कुछ अन-सिस्टेमेटिक नहीं पाया। यदि टाटा समाज विज्ञान संस्थान (टिस) की ऑडिट रिपोर्ट में इस बालिका गृह…

Read More

उनसे झुकने को कहा गया वो रेंगने लग गए

मार्च 1971 में हुए चौथी लोकसभा के चुनाव अपने आप में खासे महत्वपूर्ण थे। कांग्रेस इंदिरामयी हो चुकी थी। तब मार्गदर्शक-मण्डल शब्द तो गढ़ा नहीं गया था लेकिन इंदिरा गांधी को चुनौती दे सकने वाले सभी वरिष्ठ धुरंधर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (ओ) में सिमट गए थे। अपने तूफानी चुनावी दौरों में इंदिरा गांधी जनता को ये बताना नहीं भूलती थीं कि वे जवाहरलाल नेहरू की बेटी हैं और देश सेवा, त्याग, बलिदान उनके परिवार की परंपरा है। माहौल ऐसा बन गया था कि अमेरिका की पत्रिका ‘न्यूज़वीक’ ने लिखा रैलियों…

Read More

अमन की शहादत

हम मीडिया के लोग आराम कुर्सियों पर बैठकर भी संघर्षविराम के पक्ष में नहीं खड़े हो पाते हैं, लेकिन जिस शख्स ने अपने कश्मीर को जलते देखा था, जिसने युवाओं को गुस्से में पत्थर मारते देखा था, जिसने अलगाववादियों और आतंकियों की गोली से कश्मीरियों को मरते देखा था और आतंकियों और सेना के संघर्ष में आम नागरिको को मरते देखा था, वह शख्स संघर्ष विराम के पक्ष में पुरजोर तरीके से खड़ा था.

Read More

‘ यह बाबा पूजने लायक नहीं है, ये बापू बहुत गंदा है ’

अब मेरा मन और घबराने लगा, मुझे लगा अब कहां रह गई। कुछ देर बाद जब बेटी बाहर निकली तो बदहवास थी….। उसका यह हाल देखकर मेरा दिल वहीं पर धक्क बोल गया। मैंने उससे पूछा क्या हुआ, वह बस इतना बोली, ‘ चलो यहां। यह बाबा पूजने लायक नहीं है। ये बापू बहुत गंदा है। ‘

Read More