‘ बलिदान ’ : किसान-जीवन त्रासदी और प्रेमचंद की कहानी कला

मेरी अपनी समझ से हिंदी कहानी में ‘जादुई यथार्थवाद’ कला का भ्रूण इस कहानी में देखा जा सकता हैं ,साथ ही कहानी कला की ऊँचाई और उत्कृष्टता भी. और इसका उपयोग करके प्रेमचंद यह सच्चाई बता जाते हैं कि किसान की आत्मा उसके खेतों में होती है, और उसे किसी छल-बल से उसके हक से वंचित नहीं किया जाना चाहिये.

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प्रेमचंद : साम्प्रदायिकता और संस्कृति (वीडियो प्रस्तुति -नासिरुद्दीन )

प्रेमचंद के दौर में भी फिरकापरस्ती यानी साम्प्रदायिकता, नफरत फैलाने और बाँटने का अपना जरूरी काम बखूबी कर रही थी. आजादी के आंदोलन की पहली पांत के लीडरों की तरह ही प्रेमचंद का भी मानना था कि स्वराज के लिए इस मसले का खत्म होना जरूरी है.

15 जनवरी 1934 को छपा उनका एक लेख है- साम्प्रदायिकता और संस्कृति. यह लेख काफी मशहूर है और अक्सर हम इससे टकराते हैं.

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मुजफ्फरपुर बालिका गृह बलात्कार कांड के खिलाफ वाम दलों का 2 अगस्त को बिहार बंद

मुजफ्फरपुर बालिका गृह बलात्कार कांड, दलितों पर बढ़ते हमले और गरीबों को उजाड़ने के खिलाफ वामदलों ने संयुक्त रूप से 2 अगस्त को बिहार बंद का आह्वान किया है.

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‘वे दर्ज होंगे इतिहास में/पर मिलेंगे हमेशा वर्तमान में/लड़ते हुए/और यह कहते हुए कि/स्वप्न अभी अधूरा है

भारतीय जनता के महानायक और भाकपा माले के संस्थापक महासचिव कामरेड चारू मजूमदार की 46 वें शहादत दिवस को लखनऊ के लेनिन पुस्तक केन्द्र में संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया.

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मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड :बिहारी समाज पहले दिन से आंदोलित है

कुमार परवेज मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड को मीडिया में अब जगह मिल रही है क्योंकि इसे अब दबाया नहीं जा सकता. दबाने के बहुत प्रयास हुए थे, लेकिन बिहारी समाज ने ऐसा होने नहीं दिया. घटना की जानकारी के पहले दिन से ही वह लड़ रहा है, पता नहीं रवीश कुमार ने ने अपने लेख में ऐसा क्यों लिखा कि सांस्थानिक यौन उत्पीड़न की ऐसी वीभत्स घटना पर बिहारी समाज सोता रहा. नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है. मुजफ्फरपुर के अखबारों में 2 जून को यह घटना सामने आई. उसके…

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रिहाई मंच के महासचिव ने फर्जी मुठभेड़ के आरोपी थानेदार से जान को खतरा बताया

रिहाई मंच ने कहा कि महासचिव राजीव यादव ने आजमगढ़ पुलिस कप्तान को शिकायती पत्र भेजते हुए कहा है कि मुठभेड़ों का सवाल उठाने पर आजमगढ़ कन्धरापुर थाना प्रभारी अरविन्द यादव द्वारा दी गयी धमकी से उनको मानसिक आघात पहुंचा है और उनको अरविन्द यादव से जान को खतरा है.

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भाकपा (माले) के वरिष्‍ठ नेता कामरेड डी.पी. बख्‍शी का निधन

पार्टी के वरिष्‍ठतम सदस्‍यों में एक कामरेड बख्‍शी नक्‍सलबाड़ी और कामरेड चारु मजूमदार के आह्वान पर साठ के दशक में दुर्गापुर रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज के अपने साथियों विनोद मिश्र और बृजबिहारी पाण्‍डे के साथ आन्‍दोलन में कूद पड़े और तब से लगातार भाकपा(माले) के निर्माण व विकास में उनका अविस्‍मणीय योगदान रहा. वे 70 वर्ष के थे.

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पटना के गर्दनीबाग में भूमिहीनो, गरीबों व दुकानदारों को उजाड़ने के खिलाफ दो दिन अनशन

गर्दनीबाग में बरसों से रह रहे भूमिहीन-गरीबों को सरकार के निर्देश पर उजाड़ा जा रहा है. प्रशासन ने गरीबों की झोपड़ियां ढाहनी शुरू कर दी हैं. गर्मी और अब बारिश में हजारों परिवार पेड़ के नीचे अपना जीवन गुजर बसर कर रहे हैं. उनके पास अन्यत्र न तो कोई जमीन है और न ही किराये के मकान में वे रह सकते हैं. बिजली व पानी सप्लाई भी बाधित कर दी गई है.

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फासीवाद के खिलाफ मजबूत वाम एकता आज की जरूरत : दीपंकर भट्टाचार्य

“ त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में जनतंत्र की हत्या बंद करो ” नारे के साथ 24 जुलाई को दिल्ली के संसद मार्ग पर पांच प्रमुख वामपंथी पार्टियों का संयुक्त धरना हुआ. धरने में दिल्ली व आस-पास के क्षेत्रों के वामपंथी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.

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मोहन भारद्वाज ने मैथिली साहित्य में आधुनिक-प्रगतिवादी दृष्टिबोध स्थापित किया: जसम

जन संस्कृति मंच ने मैथिली के वरिष्ठ आलोचक मोहन भारद्वाज के निधन पर शोक संवेदना जाहिर करते हुए कहा है कि उनका निधन भारतीय साहित्य की प्रगतिशील साहित्यिक धारा के लिए एक अपूरणीय क्षति है. नागार्जुन और राजकमल चौधरी के बाद की पीढ़ी के जिन प्रमुख साहित्यकारों ने मैथिली साहित्य में आधुनिक-प्रगतिवादी मूल्यों और नजरिये के संघर्ष को जारी रखने की चुनौती कुबूल की थी, मोहन भारद्वाज उनमें से थे.

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वैज्ञानिक-चित्त की खोज में पूरे जीवन बेचैन रहने वाला एक शिक्षाविद्

यशपाल बराबर इस बात को रेखांकित करते थे कि देश में सभी अपने बच्चों को विज्ञान पढ़ाना चाहते तो हैं किंतु वैज्ञानिक दृष्टि नहीं देना चाहते. बच्चों के आगे समाज की पूरी संरचना विज्ञान के प्रतिकूल है. बगैर दृष्टि और समझ के विज्ञान शिक्षा का मूल्य उनके लिए नहीं था. विज्ञान शिक्षा का मतलब उनके लिये सभी तरह की संकीर्णताओं, कूपमंडूकताओं और क्षुद्रताओं को विज्ञान की कसौटी पर जांचना-परखना है.

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फासीवाद के खिलाफ संघर्ष में मार्क्स के विचार से बेहतर विचार नहीं- दीपंकर भट्टाचार्य

क्रोनी पूंजीवाद, सांप्रदायिक विभाजन और मनुवादी के बीच गठजोड़ है. लिचिंग स्थाई परिघटना बना दी गई है. लिचिंग करने वालों को पता है कि उन्हें सत्ता का संरक्षण मिला है. यह फासीवाद राज्य नही तो क्या है. ऐसे राज्य या तानाशाही के खिलाफ संघर्ष में मार्क्स के विचार से बेहतर विचार नहीं.

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संसद के अविश्वास मत से सड़क का अविश्वास मत पड़ेगा मोदी सरकार को भारी

 पुरुषोत्तम शर्मा 20 जुलाई को संसद के अन्दर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को भारी मतों से गिराकर विश्वास मत हासिल करने में कामयाब हो गई है. संसद के अन्दर के इस गणित और नतीजे को सत्ताधारी, विपक्ष और देश तथा दुनियां के लोग पहले से जानते थे. इसी लिए सबकी दिलचस्पी सरकार के रहने न रहने में नहीं थी बल्कि इस बात में थी कि 2019 के मई में होने वाले अगले आम चुनावों का एजेंडा क्या होगा जिस पर सभी पार्टियां सदन में…

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स्वामी अग्निवेश पर हमले के विरोध में लखनऊ, रांची, गोरखपुर में विरोध प्रदर्शन

जन आंदोलनों के सम्मानित नेता स्वामी अग्निवेश पर झारखण्ड में हुए प्राणघातक हमले का जगह-जगह प्रतिरोध हो रहा है. विभिन्न संगठनों ने लखनऊ, रांची और गोरखपुर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया.

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महिलाओं पर बढ़ती हिंसा के खिलाफ़ पटना में महिला संगठनों का जोरदार प्रदर्शन

महिलाओं पर बढ़ती हिंसा और सरकारी संरक्षण में रहने वाली लड़कियों के साथ बिहार के अनेक हिस्सों में बलात्कार की घटनाओं पर मुख्यमंत्री की चुप्पी के विरोध में 20 जुलाई को कई महिला संगठनों ने मिलकर काला दिवस मनाया और मुख्यमंत्री के समक्ष प्रदर्शन किया.

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वह पीड़ा का राजकुंवर था

नीरज प्यार की अहमियत और अपरिहार्यता पर बराबर इसरार करते रहे और वास्तविक जीवन में उसे असंभव जानकर उसकी करुणा से भी आप्लावित रहे. यथार्थ का एहसास न होता, तो यह शोक कहाँ से उपजता ? अहम बात यह है कि इसका उन्हें मलाल नहीं, गर्व है; क्योंकि यह पीड़ा उनके नज़दीक सच्ची मनुष्यता या जन-पक्षधरता और उससे भी अधिक जन से एकात्म होने की निशानी है.

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मोदी सरकार की नई एमएसपी किसानों के साथ खुला धोखा

नई एमएसपी का गहराई से मूल्यांकन करें तो यह लगभग 15 प्रतिशत की औसत बढोतरी बैठती है. अगर आप मुद्रा स्फीति की बढ़ती दर से इसकी तुलना करें तो हर साल लगभग 4 प्रतिशत की दर से मुद्रास्फीति बढ़ती है. इसका मतलब यह हुआ कि मोदी जी के चार साल के कार्यकाल में ही मुद्रास्फीति की दर जो 16 प्रतिशत बढी उसे ही नई एमएसपी में चालाकी से समायोजित कर दिया गया है.

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पटना में नागरिक प्रतिवाद सभा आयोजित कर स्वामी अग्निवेश पर जानलेवा हमले की भर्त्सना

प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश पर विद्यार्थी परिषद व भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं द्वारा किये गए जानलेवा हमले के खिलाफ बुधवार को कारगिल चौक, पटना में नागरिक प्रतिवाद सभा आयोजित की गई है. सभा में उपस्थित सैकड़ों लोगों ने एक स्वर में लोकतंत्र पर जारी इस चौतरफा हमले के विरोध में एकजुटता दिखलाई.

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विभाजकारी राजनीति के खिलाफ एकताबद्ध आंदोलन की राह पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का किसान

भारतीय किसान यूनियन के बिखराव के बाद अपने-अपने स्तर पर सक्रिय किसान यूनियन के इन ग्रुपों के बीच किसानों की संगठित ताकत को फिर बटोरने पर सहमति बनी है. सभी कार्यकर्ता किसानों के मुद्दे पर संयुक्त रूप से लड़ने और किसानों की एकता को तोड़ने की विभाजनकारी राजनीति को परास्त करने का संकल्प लेते दिखे. यह आज के भारत के किसान आंदोलन के लिए एक अच्छी सीख हो सकती है.

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भीड़-दंड को प्रोत्साहित करता राज्य तंत्र

लिंचिंग में शरीक अधिकांश के लिए यह दंडमुक्त अपराध है. राज्यतंत्र ने इस दोहरेपन के साथ तालमेल बिठा लिया है. विभिन्न राजनीतिक संगठनों, सोशल मीडिया की पहलकदमियों और नागरिक संगठनों ने इसके खिलाफ चौतरफा प्रतिवाद किया है. घृणा-राजनीति फैलाने की मशीनरी के खिलाफ जन-विमर्श को परिपक्व करना लिंचिंग पर लगाम के लिए जरूरी हो गया है.

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