महात्‍मा गाँधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय के कुलपति धमकी देते हैं -कौओं की तरह टांग दिये जाओगे

पटना/ नई दिल्ली. महात्‍मा गाँधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, मोतिहारी, बिहारके शिक्षक संघ ने कुलाध्‍यक्ष (राष्‍ट्रपति) को पत्र भेजकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अरविन्द कुमार अग्रवाल पर गंभीर आरोप लगते हुए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है. इस पत्र में शिक्षक संघ ने कुलपति पर  परिवीक्षा अवधि में शिक्षकों को बर्खास्‍त करने की धमकी देने, आरक्षण के नियमों का खुला उल्‍लंघन करने, कारण बताओ नोटिसों के द्वारा विश्‍वविद्यालय में आतंकी माहौल बनाने, यौन उत्‍पीड़न की झूठी शिकायतों द्वारा शिक्षकों का मानसिक उत्‍पीड़न करने, शिक्षकों के खिलाफ विद्यार्थियों का इस्‍तेमाल करने, अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी…

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पीएचएमसी, पटना में डॉ संजय कुमार के इलाज में लापरवाही, हालत बिगड़ने पर एम्स लाया गया

जानलेवा हमले में बुरी तरह घायल महात्‍मा गाँधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, मोतिहारी के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ संजय कुमार की हालत और बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए एम्स ले जाया गया है. पीएचएमसी, पटना में उनके इलाज में घोर लापरवाही बरती गई. इलाज के दौरान डॉ संजय 12 बार बेहोश हो हुए लेकिन चिकित्‍सकों ने बेपरवाही पूर्वक कहा कि मॉब लिंचिंग में यह सब नॉर्मल चीजें होती हैं. यही नहीं उन्हें एम्स रेफर करने में भी पीएचएमसी, पटना के जिम्मेदारों ने अड़ंगा लगाया.

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महात्‍मा गाँधी विश्‍वविद्यालय मोतिहारी के कुलपति ने पीएच.डी. डिग्री के बारे में गलत जानकारी दी

महात्‍मा गाँधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, मोतिहारी के शिक्षक संघ ने कुलपति प्रो. अरविन्द अग्रवाल पर पीएच.डी. के बारे में गलत जानकरी देने का आरोप लगाया है. शिक्षक संघ ने कहा है कि कुलपति प्रो. अरविंद ने अपनी पीएच.डी. उपाधि जर्मनी के प्रतिष्ठित विश्‍वविद्यालय हेडलबर्ग से दिखाई थी जबकि इनकी पीएच.डी. राजस्‍थान विश्‍वविद्यालय से है. शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय और भारत सरकार को यह जानकारी देते हुए अपनी पीएच.डी. विषयक महत्‍वपूर्ण जानकारियाँ छिपाने और गलत सूचना मंत्रालय और यूजीसी में देने के लिए कुलपति प्रो. अरविन्द अग्रवाल को अविलंब बर्खास्‍त करने और पुलिस व अदालत में उनके विरुद्ध मामला दर्ज़ कराने की मांग की है.

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प्रेमचंद का यह जो ‘हिन्दू पाठ’ है

प्रेमचंद को गलत ढ़ंग से प्रस्तुत कर संघ परिवार अपने पक्ष में हिन्दी मानस को निर्मित करने में लगा है। यह हमला एक साथ प्रेमचंद और पाठकों के मानस पर हमला है। प्रेमचंद के सामने हमेशा ‘समानता का ऊँचा लक्ष्य’ था। उन्होंने यह साफ लिखा है कि ‘धर्म और नीति का दामन पकड़ कर वहां उस लक्ष्य तक नहीं पहुंचा जा सकता’। वे पूंजीवादी सभ्यता – ‘महाजनी सभ्यता’ के विरोधी थे। प्रेमचंद के प्राचीन अध्येता गोयनका ‘महाजनी सभ्यता’ द्वारा व्यक्त आक्रोश को ‘सामाजिक’ न मानकर ‘व्यक्तिगत’ मानते थे। सवाल करते हैं ‘रहस्य’ कहानी ‘महाजनी सभ्यता’ से कहां मिलती है ?

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बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर और दिल्ली में स्वामी अग्निवेश पर हमला

सौरभ यादव   जिस समय दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा निकाली जा रही थी, उसी दौरान बिहार के मोतिहारी जिले मे महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत, जेएनयू के पूर्व छात्र संजय कुमार पर वीसी समर्थक गुंडों ने हमला कर दिया। संजय कुमार ने थाने में दर्ज की गई अपनी शिकायत में बताया कि वो कमरे में बैठ कर अपनी पढ़ाई-लिखाई सम्बंधित कार्य कर रहे थे कि तभी 20-25 लड़को का एक झुंड आया और उन्हें पीटने…

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‘ भीड़-तंत्र’ को कैसे समझें !

कॉर्पोरेट मीडिया की अगुआई में इन दिनों सत्ता के सभी संस्थान एक हाथ से साम्प्रदायिक नफ़रत बाँट रहे हैं, दूसरे हाथ से भारत की सम्पदा-सम्प्रभुता का सौदा कर रहे हैं – देशभक्ति के नाम पर यह काम खुलेआम हो रहा है। सवाल यह है कि नफ़रत के ‘विकास’ की दक्षिणपंथी राजनीति क्या केवल अफ़वाह के दम पर संचालित है ? आमतौर पर यही माना जा रहा है जो कि पूरी तरह सही नहीं है ! हमें इस सवाल का जवाब चाहिए कि नफ़रत के ‘ ग्राहक ’ का उत्पादन कैसे हो रहा है, कहाँ हो रहा है ? दूसरी बात यह कि किसी टीकधारी को देशभक्ति की पुड़िया खिलाना इतना सरल क्यों हो रहा है ? यह ‘देशभक्त’ हिंसा हत्या की बन्द गली में ऐसे कैसे फँस जा रहा है कि असत्य-अन्याय की जयकार ही उसका कर्तव्य हो रहा है ? वैचारिक रूप से अन्धे और मानसिक रूप से बहरे इस ‘फासिस्ट’ की निर्मिति में उस राजनीति की भी कोई भूमिका बन रही है क्या – जो सामाजिक न्याय और अम्बेडकरवाद के नाम पर की जा रही है ? भक्ति भाव में पगी, देशभक्ति की सगी सामाजिक चेतना निजीकरण के किन स्रोतों से पोषित है, भेदभाव के किन मूल्यों से प्रेरित है जो इन दिनों ‘भीड़-तंत्र’ का हिस्सा बनने को अभिशप्त है.

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अटल बिहारी वाजपेयी और भारतीय दक्षिणपंथ की विकास यात्रा

आरएसएस के सिद्धांतकार गोविन्‍दाचार्य ने उन्‍हें भाजपा का उदारवादी ‘मुखौटा’ कहा था, जबकि आडवाणी भाजपा का असली चेहरा थे. वे एक ऐसे दौर में भाजपा के सर्व प्रमुख प्रतिनिधि थे जब भाजपा को अपनी साम्‍प्रदायिक फासीवादी राजनीति के लिए एक मुखौटे की जरूरत थी. प्रथम राजग गठबंधन सरकार के सहयोगियों के लिए जिन्‍हें आडवाणी या मोदी जैसे ‘कट्टर’ माने जाने वाले संघियों को समर्थन देने में असुविधा हो सकती थी, बाजपेयी का मुखौटा उनके लिए उपयोगी था.

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नुलकातोंग फर्जी मुठभेड़ : माओवादियों के नाम पर निर्दोष मूलनिवासियों की हत्या

मूलनिवासियों के साथ हमारी वृहद बातचीत और गहरी जांच-पड़ताल में यह स्पष्ट हो जाता है कि यह मुठभेड़ नहीं बल्कि मूलनिवासियों को जल-जंगल-जमीन और उनके संस्कृति से बेदखल करने के लिए ऑपरेशन प्रहार-4 था. मौके पर कोई माओवादी नहीं था बल्कि सैकड़ों की संख्या में सुरक्षा बलों के जवानों को देखकर ग्रामीण भागने और छिपने की कोशिश कर रहे थे जिन पर बिना कुछ कहे और बताए गोलियां बरसा दी गईं. मरने वालों में दो-तीन नाबालिग थे. सुकमा एसपी का बयान गलत साबित हो रहा है. पत्रकारों और सिविल सोसायटी के लोगों को स्वतंत्र रूप से इन युद्ध क्षेत्रों में जाने से पहले थाने में जानकारी देने के लिए कहा जा रहा है और बिना किसी जिम्मेदार अधिकारियों के अनुमति के जाने से रोका जा रहा है. उनके कामों में विध्न पहुंचाया जा रहा है.

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समय को संबोधित सुभाष राय की कविताएँ

वरिष्ठ पत्रकार एवं जनसंदेश टाइम्स के प्रधान सम्पादक सुभाष राय का कविता संग्रह भले ही देर से आया हो पर अपने समय को सम्बोधित महत्वपूर्ण कविता संग्रह है. वे लम्बे समय से लिख रहे हैं. वे एक मंजे हुए सशक्त और परिपक्व कवि हैं. उनके कविता संग्रह का शीर्षक सलीब पर सच सटीक और अपने समय को निरुपित करता है. कौन कह सकता है कि आज सच सलीब पर नहीं है. उनकी पैनी नजर अपने समय को देखती-परखती है और हर कड़वी सच्चाई को बेख़ौफ़ और बेबाकी से बयां करती है.

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स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर वाराणसी में निकाला गया संविधान, लोकतंत्र व आजादी बचाओ मार्च

वाराणसी। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर संविधान, लोकतंत्र व आजादी बचाओ मार्च अंबेडकर पार्क कचहरी से जिला मुख्यालय तक निकाला गया। मार्च व सभा के माध्यम से संविधान जलाने वालों को गिरफ्तार करने, उमर खालिद के हमलावरों को जेल भेजने व मिर्जापुर में दलितों पर दमन ढाने वालों पर तत्कार कार्रवाई करने की मांग उठाई गई। मार्च का आयोजन आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, इंसाफ मंच, अर्जक संघ, महिला जागृति समिति व भाकपा माले द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। सभा को संबोधित करते हुए एबीएसएस के जिला अध्यक्ष श्याम…

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मोदी सरकार के खिलाफ किसानों का राष्ट्रव्यापी “जेल भरो” आन्दोलन

पुरुषोत्तम शर्मा साम्राज्यवाद विरोधी ‘भारत छोड़ो दिवस’ के मौके पर 9 अगस्त 2018 को नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ देश भर के किसानों का जोशीला ‘जेल भरो आंदोलन’ सफल रहा.  इस राष्ट्रव्यापी विरोध कार्यक्रम में देश भर में लाखों किसान सड़क पर उतरे. किसानों के इस राष्ट्रव्यापी जेल भरो आंदोलन का आह्वान अखिल भारतीय किसान महासभा और अखिल भारतीय किसान सभा ने किया था. यह पहला ऐसा मौका है जब देश भर में किसानों के सवाल पर इतने व्यापक पैमाने पर ‘जेल भरो’ और विरोध कार्यक्रम हुआ है. देश के…

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सामाजिक कार्यकर्ताओं पर देशद्रोह के केस के खिलाफ रांची में प्रदर्शन

झारखंड के 20 सामाजिक कार्यकर्ताओं पर लगाए गए देशद्रोह के केस के खिलाफ वरिष्ठ लेखकों, बुद्धिजीवियों व सांस्कृतिक -सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने 10 अगस्त को शहीद स्मारक पर नागरिक प्रतिवाद ( बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे) कार्यक्रम आयोजित किया.

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मंजू वर्मा का इस्तीफा जनांदोलनों की जीत, नीतीश व सुशील मोदी भी कटघरे में

आखिरकार बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को अपना इस्तीफा देना पड़ा है. निसन्देह यह बिहार के महिला आंदोलन की जीत है. ऐपवा के नेतृत्व में बिहार की महिलाएं विगत 8 जून से ही संघर्षरत हैं. गर्मी हो या बरसात मुजफ्फरपुर से लेकर पटना की सड़कों पर वे लगातार लड़ती रहीं. उन्हीं के संघर्षों का नतीजा है कि शेल्टर गृहों में हो रहे संगठित यौन उत्पीड़न व आर्थिक भ्रष्टाचार को एक मुद्दे के बतौर सामने लाया जा सका.

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कौशल किशोर का कविता संग्रह ‘ नयी शुरुआत ‘ : ‘ स्वप्न अभी अधूरा है ‘ को पूरा करने के संकल्प के साथ

    शैलेन्द्र शांत  “नयी शुरुआत’ साठ पार कवि कौशल किशोर की कविता की दूसरी किताब है  । सांस्कृतिक , सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में निरंतर सक्रिय रहे कौशल किशोर के इस संग्रह में 1969 से 1976 तक की कवितायें शामिल हैं. यानी कांग्रेसी शासन से मोहभंग की शुरुआत के बाद नक्सलबाड़ी किसान आंदोलन से लेकर आपातकाल तक की. कवि अपने वक्तव्य में खुद कहते हैं कि -‘बहुत कच्चापन मिलेगा इनमें ‘.  साथ ही यह भी कि – ‘पर यह कवि के बनने का दौर है ‘ .  आगे यह…

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हमारी संवेदना को विस्तार देता है साहित्य : प्रोफेसर हरीश त्रिवेदी

वाराणसी. साहित्य चिंतक एवं अंग्रेजी के प्रोफेसर हरीश त्रिवेदी ने कहा है कि साहित्य हमारी संवेदना को विस्तार और निखार देता है. साहित्य दूसरों के दुःख की अनुभूति कराकर हमारा दुःख कम करता है और हमारे सुख को व्यक्ति सीमा से ऊपर उठाता है. प्रोफेसर हरीश त्रिवेदी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कला संकाय के राधाकृष्णन सभागार में ” साहित्य हमें क्या देता है ” विषय पर आयोजित गोष्ठी में बोल रहे थे. यह आयोजन त्रैमासिक पत्रिका ‘साखी’ के अट्ठाइसवें अंक के लोकार्पण मौके पर किया गया था. प्रो त्रिवेदी ने कहा…

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बिहार बंद के समर्थन में लखनऊ में धरना

मुजफ्फरपुर बालिका गृह बलात्कार कांड के दोषियों को सजा दिलाने के लिए बिहार बंद के समर्थन में आज 2 अगस्त को परिवर्तन चौक पर ऐपवा द्वारा धरना तथा विरोध सभा का आयोजन किया गया. इसमें आइसा, इंकलाबी नौजवान सभा के कार्यकर्ता तथा अनेक लोकतान्त्रिक बुद्धिजीवी शामिल हुए .

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बिहार बंद : पटना में महिलाओं के साथ पुलिस की धक्कामुक्की, बंद समर्थकों ने ट्रेनें रोकी

वाम दलों द्वारा आहूत आज के बिहार बंद का व्यापक असर देखा जा रहा है. कई स्थानों पर रेलवे के परिचालन को बाधित किया गया है, तो राष्ट्रीय व राज्य पथों पर भी जगह-जगह बंद समर्थकों ने जाम लगा रखा है. समाज के विभिन्न तबके के लोगों ने मुजफ्फरपुर यौन उत्पीड़न व बिहार में दलित-गरीबों पर हमले के खिलाफ आयोजित आज के बिहार बंद को सक्रिय समर्थन दिया है.

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यथार्थवाद की आधारशिला है सेवासदन – ज्ञानेन्द्रपति

वाराणसी : हिन्दी के अप्रतिम कथाकार प्रेमचन्द की 138वीं जयन्ती पर ‘‘क’’ कला वीथिका, लंका में उनके प्रथम हिन्दी उपन्यास ‘‘ सेवासदन ’’ पर आधारित फिल्म का प्रदर्शन व परिचर्चा का आयोजन किया गया.  सेवासदन आज से 100 वर्ष पहले लिखा गया उपन्यास है जिसमें प्रेमचन्द ने सामाजिक विडम्बनाओं पर करारा प्रहार किया है. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रख्यात कवि ज्ञानेन्द्रपति ने सेवासदन की चर्चा करते हुए उन्होंने इसे यथार्थवाद की आधारशिला के रूप में निरूपित किया.  सेवासदन आज भी हिन्दी साहित्य के लिए आदर्श है.  उन्होंने सेवासदन और तत्कालीन…

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पटना में प्रेमचंद जयंती पर हिरावल ने ‘निर्वासन’ का मंचन किया

पटना.कथा सम्राट प्रेमचंद जयंती के अवसर पर आज स्थानीय छज्जूबाग में हिरावल के कलाकारों ने प्रेमचंद की कहानी ‘निर्वासन’ का नाट्य प्रदर्शन किया। साथ ही, फिरकापरस्ती के विरुद्ध रचनाओं का गायन किया. इस अवसर पर हिरावल की ओर से ‘निर्वासन’ के आधार पर निर्मित फिल्म को भी जारी किया गया.  नाटक और फिल्म में काम करनेवाले कलाकार प्रीति प्रभा और राम कुमार हैं. महिलाओं पर बढ़ रही हिंसा और सांप्रदायिक फासीवादी माहौल के खिलाफ आयोजित इस कार्यक्रम के मौके पर उपस्थित दर्शकों को संबोधित करते हुए लेखक संतोष सहर ने…

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प्रेमचंद ने राष्ट्रवाद की अवधारणा के फासीवादी चरित्र को काफी पहले ही देख लिया था : प्रो. रविभूषण

प्रेमचंद ने आज से काफी पहले ही आवारा पूंजी के ग्लोबल चरित्र और उसके साम्राज्यवादी गठजोड़ की शिनाख्त कर ली थी . उन्होंने राष्ट्रवाद की अवधारणा के फासीवादी चरित्र को काफी पहले ही देख लिया था.

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