अभिव्यकित की आज़ादी पर हमला कर चुनाव पूर्व साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रयास है अलीगढ़ वि वि की घटना–जसम

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लखनऊ. जन संस्कृति मंच की उत्तर प्रदेश इकाई ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छत्रसंघ भवन में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी होने के नाम पर हिन्दू संगठनों द्वारा बवाल करने तथा पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के कार्यक्रम को न होने देने और उनपर हमला करने की कोशिश की भर्त्सना की है. जसम ने कहा की शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर रहे अमुवि के छात्रनेताओं तथा छात्रों पर पुलिस और हिन्दू संगठनों के गुंडों द्वारा किया गया हमला एक फासिस्ट कार्रवाई है। जसम देश भर के सभी लोकतंत्र पसंद जनमत को इस घटना के खिलाफ आवाज उठाने की अपील करता है।

जन संस्कृति मंच  उत्तर प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष कौशल किशोर और सचिव रामायण राम ने आज जारी बयान में कहा कि एक बार फिर से अमुवि में हुई यह घटना साबित करती है कि देश की सत्ता में काबिज आरएसएस-बीजेपी की सरकार साम्प्रदायिक उन्माद भड़का कर चुनावी वैतरणी पार करना चाहती है। कर्नाटक के आसन्न विधानसभा चुनाव व कई राज्यों के लोकसभा सीटों व विधानसभा के उपचुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में यह घटना सोच समझ कर अंजाम दी गई है  ताकि साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण कराया जा सके।

पूरे देश मे भगवा ब्रिगेड मुसलमानों, दलितों, महिलाओं और वंचित तबकों पर हमले कर रहा है। चुनाव से ठीक पहले संघ ऐसे मुद्दों को सामने लाकर विवाद पैदा करता है जिससे हिन्दू-मुस्लिम मुद्दे को हवा मिले। संघ अपने फासीवादी कारनामे के तहत कभी गोमांस के नाम पर, कभी गोरक्षा के नाम पर या लव जिहाद के नाम पर लगातार मुस्लिम अल्पसंख्यक आबादी के खिलाफ नफरत फैलाता है, अमुवि की यह घटना भी संघ  के इसी अभियान की अगली कड़ी है।

देश के विश्वविद्यालयों में स्वतन्त्र सोच और विचारधाराओं, विविधता और अभिव्यक्ति की आज़ादी के खिलाफ आरएसएस और सरकार ने एक तरह की जंग छेड़ रखी है। जेएनयू,हैदराबाद केंद्रीय वि वि, जाधवपुर वि वि, बीएचयू के बाद अब अमुवि को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि अलीगढ़ मुस्लिम वि वि काफी पहले से ही हिंदुत्व के निशाने पर रहा है। संघ पहले से ही इसके अल्पसंख्यक स्टेटस के खिलाफ रहा है।

जिन्ना की तस्वीर के बहाने बवाल खड़ा करने और अपनी देश भक्ति का प्रमाण प्रस्तुत करने वाले संगठन व राजनीतिज्ञ भारतीय इतिहास की बहसों से न तो वाकिफ हैं न वे होना चाहते हैं। जिन्ना को भारत विरोधी बताने वाले लोग सावरकर जिन्होंने द्विराष्ट्र के सिद्धांत का प्रतिपादन किया था, को अपना आदर्श बनाए हुए हैं। जिन्ना या इतिहास के किसी भी नेता का मूल्यांकन इतिहास के संदर्भ में होता है। लेकिन आरएसएस और इसके प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष आनुषंगिक संगठनों को इतिहास से कोई लेना देना नहीं, इनका एकमात्र मकसद किसी भी बहाने से उन्माद पैदा करके समाज मे साम्प्रदायिक विभाजन पैदा करना है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि ऐसे साम्प्रदायिक और असामाजिक तत्वों को केंद्र व राज्य की सरकारों को खुला समर्थन हासिल है।  जसम इस उन्माद की करवाई की निंदा करते हुए अमुवि के छात्रों,अध्यापकों व अलीगढ़ की लोकतंत्रपसन्द अमनपसंद जनता की शांतिपूर्ण प्रतिवाद का भरपूर समर्थन करता है।हम उनके संघर्ष में उनके साथ खड़े हैं।

 

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