मजदूर दिवस पर भारी बारिश के बीच पटना के गांधी मैदान में उमड़े हजारों लोग

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भाजपा-भगाओ, बिहार बचाओ जन अधिकार पदयात्रा के पटना पहुँचने पर हुआ महासम्मेलन

काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा – भाजपा को भगाने के लिए लाल झंडे और माले की ताकत वाला मोर्चा चाहिए.

वाम दलों के प्रतिनिधि भी हुए शामिल. विभिन्न तबकाई संगठनों के प्रतिनिधियों ने सम्मेलन को किया संबोधित.

पटना. बिहार के पांच स्थानों से 23 अप्रैल से  भाकपा-माले के आह्वान पर निकली भाजपा-भगाओ, बिहार बचाओ जनअधिकार पदयात्रा का जत्था जैसे ही पटना के गांधी मैदान में प्रवेश किया, भारी बारिश की शुरूआत हो गई. एक सप्ताह से कड़ी धूप और कई तरह के संकटों को झेलते हुए पटना पहुंचे पदयात्रियों को एक बार फिर से बारिश के संकट का सामना करना पड़ा. सबने पिछली चुनौतियों की तरह इसे भी बखूबी झेला और जब तक बारिश होते रही, भाजपा भगाओ, बिहार बचाओ और लोकतंत्र बचाओ-देश बचाओ के नारे के साथ गांधी मैदान को गुंजायमान करते रहे.

जनकवियों ने अपने गीतों के जरिए बारिश का कोई असर नहीं होने दिया गया. 12 बजे से महासम्मेलन की कार्रवाई आरंभ हुई और फिर वह अपराह्न 3 बजे तक चलते रही. महासम्मेलन में गांव-गांव से आए दलित-गरीबों, महिलाओं, अकलियत समुदाय के लोगों के अलावा अन्य दूसरे संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए. रसोइया संघ, आशाकर्मी, इंसाफ मंच, आॅल इंडिया बेदारी कारवां, जमैतुल राइन, भीम आर्मी आदि संगठनों के प्रतिनिधियों ने महासम्मेलन में शामिल होकर पदयात्रियों का अभिनंदन किया और उनके संघर्षों के प्रति अपनी एकजुटता जाहिर की.

महासम्मेलन की शुरूआत में भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने पार्टी की बिहार राज्य कमिटी की ओर से तमाम जत्थों का क्रांतिकारी अभिनंदन किया और जनअधिकार पदयात्रा व महासम्मेलन के परिप्रेक्ष्य को रखा.

पदयात्रा में शामिल खेग्रामस के महासचिव धीरेन्द्र झा, खेग्रामस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद, ऐक्टू के राष्ट्रीय सचिव आरएन ठाकुर, ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, बिहार राज्य वि़द्यालय रसोइया संघ की सरोज चौबे , बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ की शशि यादव केंद्रीय कमिटी के सदस्य नईमुद्दीन अंसारी, खेग्रामस के बिहार राज्य सचिव गोपाल रविदास, अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ, गोपगुट के रामबली प्रसाद, केंद्रीय कमिटी सदस्य वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता, प्रोफेसर अरविंद डे शामिल थे.

उसके पश्चात माले के वरिष्ठ नेताओं, वाम दलों के प्रतिनिधियों, पदयात्रा में शामिल अन्य नेताओं द्वारा मंच ग्रहण किया गया. मजदूर दिवस के अवसर पर सभी शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई. हिरावल के साथियों द्वारा शहीद गीत और क्रांतिकारी शायर फैज अहमद फैज की नज्म ‘ हम मेहनतकश जगवालों से…’ के गायन के साथ सभा की शुरूआत हुई.

महासम्मेलन के मुख्य वक्ता भाकपा-माले के महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य थे. उन्होंने पदयात्रियों का गर्मजोशी से अभिनंदन किया और कहा कि इस पदयात्रा में अपनी मांगों के साथ 10-12 साल के बच्चे भी शामिल हैं. उनकी अपनी मांगें हैं. उनके स्कूल में बेंच नहीं है, पढ़ाई नहीं होती है. उसी प्रकार से रसोइया, बालू मजदूर, निर्माण मजदूर, किसान आदि तबका भी अपने-अपने मुद्दों के साथ इस महासम्मेलन में शामिल हो रहे हैं. इन सभी तबकों के संघर्षों को हमारी पार्टी सलाम करती है.

माले महासचिव ने कहा कि भाजपा भगाओ-बिहार बचाओ का नारा केवल हमारी पार्टी अथवा इस पदयात्रा का नारा नहीं है, बल्कि यह आज के समय की मांग है. देश और विभिन्न राज्यों की सत्ता में बैठकर भाजपा जो कर रही है, उसकी मिसाल नहीं मिलती. किसानों की जमीन छीन रही है. चंपारण सत्याग्रह के सौ साल हुए, सरकार ने खूब जश्न मनाया, लेकिन बेतिया राज की जमीन आज भी जमींदारों-चीनी मिल मालिकों के कब्जे में है. आजादी के 70 साल बाद भी राजा-महाराजा व अंग्रेजों का कानून चल रहा है. आज भी तय नहीं हो पाया कि चंपारण की जमीन वहां के गरीबों की जमीन है.

पिछले साल की जुलाई महीने से अबतक बेरोजगारी की दर दुगुनी हो गई है. उसमें गुणात्मक वृद्धि हुई है. दूसरी ओर प्रधानमंत्री पकौड़ा बेचने के लिए कहते हैं. त्रिपुरा के उनके नए मुख्यमंत्री पान बेचने को कह रहे हैं. लेकिन जब नौजवान पकौड़ा अथवा पान की दुकान लगाने जाते हैं, तो पुलिस उन्हें भगा देती है. कहती है यहां स्मार्ट सिटी बनेगी.

उन्होंने कहा कि आज उस लाल किले को डालमिया के हाथों 25 करोड़ में बेच दिया गया, जो हमारे देश की आजादी का प्रतीक है. डालमिया कोई पूंजीपति नहीं है बल्कि उसी ग्रुप का आदमी है. वे विश्व हिंदू परिषद के आदमी हैं और बाबरी मस्जिद विध्वंस के आरोपी हैं. बिहार के लोग इस डालमिया को अच्छे से जानते हैं. यह वही डालमिया है जिसने बिहार को बर्बादी के रास्ते ढकेल दिया. इसलिए भाजपा को न केवल सत्ता से बेदखल करने बल्कि उसकी नफरत, उन्माद-उत्पात की राजनीति को पूरी तरह से उखाड़ फेंकना होगा. भाजपा ऐसी पार्टी है जो चुनाव हारकर भी सता हथिया लेती है. बिहार में चुनाव हारने के बाद भी उसने चोर दरवाजे से सत्ता हथिया ली. इसलिए जहां भी चुनाव हो, भाजपा को खदेड़ बाहर करना व उसे सत्ता से बेदखल करना आज हम सबका प्रमुख कार्यभार है.

उन्होंने कहा कि आज भी महिलाओं की सुरक्षा व सम्मान की गारंटी नहीं हो पाई है, यह बेहद शर्मनाक है कि कठुआ में 8 वर्ष की बच्ची के बलात्कारी-हत्यारे को भाजपा बचाने में लगी है और उनके लिए तिरंगा यात्रा निकाल रही है. यह तिरंगे का भी अपमान है. इसलिए इस पार्टी का नाम हमने बलात्कारी जानलेवा पार्टी रखा है. जब पूरे देश में कठुआ की घटना और बलात्कारियों के पक्ष में तिरंगा मार्च करने का विरोध किया, तो भाजपा ने दो मंत्रियों का इस्तीफा दिलवाया. लेकिन कल फिर एक बार फिर एक ऐसे विधायक को मंत्री बना दिया गया जो उस जुलूस में शामिल थे. इस पार्टी में ऐसे ही लोग मिलेंगे, जो बलात्कारियों के पक्ष में खड़े दिखेंगे.

दलित उत्पीड़न के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया कि इसका गलत उपयोग हो रहा है. लेकिन राजस्थान से खबर आ रही है कि एक दलित को घोड़ी पर चढ़ने नहीं दिया गया. दलितों को मूंछ नहीं रखने पर प्रताड़ित किया जा रहा है. आरक्षण पर तरह-तरह की उलटी दलीलें दी जा रही हैं. लेकिन हम कहना चाहते हैं कि आरक्षण कोई भीख नहीं, बल्कि हमारा संवैधानिक अधिकार है. भाजपा एससी-एसटी कानून में संशोधन का समर्थन करती है, लेकिन मध्यप्रदेश में पुलिस की नौकरी में दलितों के शरीर पर एससी-एसटी लिख दिया गया. जब 2 अप्रैल को एससी-एसटी कानून में संशोधन के खिलाफ भारत बंद हुआ, तो हमने देखा कि यह सरकार आंदोलनकारियों को तरह-तरह से प्रताड़ित करने में लग गई है. हत्यारों-दंगाइयों को जेल से रिहा किया जा रहा है. सही फैसला देने वाले जजों की हत्या हो रही है. कोई गवाह नहीं बच पाएगा. इन लोगों ने न्यायपालिका को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया है. आदित्यनाथ पर जो मुकदमे हैं, भाजपा नेताओं पर बलात्कार के मुकदमे हैं, उसको खत्म करने के आदेश दे दिए गए हैं. यदि ऐसे लोग देश की सत्ता में बने रहेंगे, तो संविधान, कानून, इंसानियत, आजादी का कोई मतलब नहीं रह जाता.

उन्होंने कहा कि कुछ लोग 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में वामपंथ की गलती का सवाल उठाते हैं. उस चुनाव में बिहार की जनता भाजपा के खिलाफ जनादेश दिया था. उसी से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे. लेकिन हमने देखा कि कुछ ही दिन में वे भाजपा के साथ जा मिले और आज बिहार में भाजपा की सत्ता चल रही है, जिसके सामने नीतीश कुमार ने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया है. यदि इसी नाम पर मेहनतकशों-दलितों-गरीबों का वोट नीतीश कुमार को दिलवा दिया जाता, तो आज वामपंथ का क्या होता ? वामपंथ का वोट हमारे पास ही है. 2015 का मोर्चा नकली मोर्चा था. नीतीश कुमार सत्ता के भूखे हैं. कभी जयप्रकाश तो कभी लोहिया का नाम लेते हैं, लेकिन भाजपा की गोद में सरेंडर कर गए हैं. ऐसा कोई मोर्चा नहीं बन सकता जिसमें लाल झंडा न शामिल हो. बिहार के मजदूर-किसान, अकलियत, मजदूर-किसान, छात्र-नौजवान इस मोर्चा का निर्माण करेंगे और भाजपा के साथ कदम-कदम पर लड़ेगे. वामपंथ की असली पहचान खेतों व खलिहानों में गरीबों, नौजवानों-किसानों के संघर्षों की है.

उन्होंने कहा कि 5 मई 2018 को महान विचारक कार्ल मार्क्स  के जन्म के दो सौ साल पूरे हो रहे हैं. भाजपा-आरएसएस विदेशी होने के नाम पर मार्क्स व लेनिन के विचारों पर हमेशा हमले करती रही है. पिछले दिनों त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति तोड़ने की घटना इसकी बानगी है. लेकिन सिर्फ लेनिन ही नहीं अंबेडकर और पेरियार की मूर्तियां भी तोड़ी जा रही हैं. इसलिए मामला विचारधारा के देशी-विदेशी होने का नहीं है, बल्कि संघ-भाजपा द्वारा समाज और लोकतंत्र का विनाश का है. सामाजिक बदलाव और बराबरी के संघर्ष में मार्क्स के महान विचार हमारे जरूरी हथियार हैं.

संघ-भाजपा भगत सिंह की जगह सावरकर, गांधी की जगह गोडसे, अंबेडकर को हटाकर गोलवलकर को लाना चाहते हैं. कुंवर सिंह का विजयोत्सव मना रहे हैं, लेकिन आजादी के आंदोलन के प्रतीक लाल किला को गिरवी रख दिया है.

महासम्मेलन को माले महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य के अलावा खेग्रामस के महासचिव काॅ. धीरेन्द्र झा, ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव काॅ. राजाराम सिंह, सीपीआईएम के राज्य सचिव अवधेश कुमार, एसयूसीआईसी के राज्य सचिव मंडल सदस्य सूर्यकर जितेन्द्र, आरएसपी के महेश नारायण सिंह, अखिल हिंद फारवर्ड ब्लाक के राज्य सचिव टीएन आजाद, केंद्रीय कमिटी के सदस्य मनोज मंजिल, आइसा के महासचिव संदीप सौरभ आदि नेताओं ने संबोधित किया. पदयात्रा में शामिल नेताओं ने अपने वक्तव्य के दौरान अपने अनुभवों को भी महासम्मेलन में साझा किया.

जन अधिकार पदयात्रा के दौरान पटना में विभिन्न स्थानों पर हुआ स्वागत

आज पटना के विभिन्न मार्गों से पदयात्रायें गांधी मैदान पहुंची. माले महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य, राज्य सचिव कुणाल और अन्य नेतागण हड़ताली मोड़ से ही पदयात्रा में शामिल हुए. 10 बजे हड़ताली मोड़़ पर ऐक्टू, महासंघ गोप गुट, महिलाएं व आम नागरिकों द्वारा पदयात्रियों का स्वागत किया गया.

रेडियो स्टेशन पर संस्कृतिकर्मी, लेखक, बुद्धिजीवी व पटना के नागरिक पदयात्रियों का स्वागत हुआ. दरभंगा से चलने वाली यात्रा का स्वागत 1 मई की सुबह गायघाट पर भाकपा-माले की पटना सिटी एरिया कमिटी द्वारा किया यगा.

उसी जत्थे का स्वागत महेन्द्रू में भीम आर्मी व विभिन्न दलित छात्र संगठनों द्वारा किया गया. पटना विश्वविद्यालय में आइसा द्वारा पदयात्रियों का स्वागत किया गया.  11 बजे चिरैयाटांड़ पुल पर गया व बिहारशरीफ की पदयात्रा का सामूहिक रूप से स्वागत किया गया.

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