प्रेमचंद का यह जो ‘हिन्दू पाठ’ है

प्रेमचंद को गलत ढ़ंग से प्रस्तुत कर संघ परिवार अपने पक्ष में हिन्दी मानस को निर्मित करने में लगा है। यह हमला एक साथ प्रेमचंद और पाठकों के मानस पर हमला है। प्रेमचंद के सामने हमेशा ‘समानता का ऊँचा लक्ष्य’ था। उन्होंने यह साफ लिखा है कि ‘धर्म और नीति का दामन पकड़ कर वहां उस लक्ष्य तक नहीं पहुंचा जा सकता’। वे पूंजीवादी सभ्यता – ‘महाजनी सभ्यता’ के विरोधी थे। प्रेमचंद के प्राचीन अध्येता गोयनका ‘महाजनी सभ्यता’ द्वारा व्यक्त आक्रोश को ‘सामाजिक’ न मानकर ‘व्यक्तिगत’ मानते थे। सवाल करते हैं ‘रहस्य’ कहानी ‘महाजनी सभ्यता’ से कहां मिलती है ?

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सरकारी खजाने से चुनावी यात्रा का औचित्य

  जावेद अनीस मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान अपने लम्बे कार्यकाल के दौरान बेहिसाब घोषणाओं, विकास के लम्बे-चौड़े  दावों और विज्ञापनबाजी में बहुत आगे साबित हुये है, वे हमेशा घोषणा मोड में रहते हैं और उनकी सरकार के चमचमाते विज्ञापन प्रदेश के साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी खुले जेब के साथ प्रसारित होते हैं जिसमें मुख्य रूप से शिवराज और उनकी सरकार की ब्रांडिंग की जाती है. अब विधान सभा चुनाव से ठीक पहले सीएम शिवराज सिंह द्वारा ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ निकली जा रही है यह पूरी तरह से एक…

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विश्व कविता : तादयूश रुज़ेविच की कविताएँ

  〈 तादयूश रुज़ेविच (9 अक्टूबर 1921-24 अप्रैल 2014) पोलैंड के कवि, नाटककार और अनुवादक थे। उनकी कविताओं के बहुत सी भाषाओं में अनुवाद हुए हैं। उनका शुमार दुनिया के सबसे बहुमुखी और सर्जनात्मक कवियों में किया जाता है। नोबेल पुरस्कार के लिए कई बार उन्हें नामित किया गया। सन 2000 में उनकी किताब ‘मदर इज लीविंग’ के लिए उन्हें पोलैंड का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ‘नाईक पुरस्कार’ प्रदान किया गया। रुज़ेविच की कविताओं में द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका साफ़  दिखाई देती है और उसे व्यक्त करते समय कवियों की…

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