मुजफ्फरपुर के बाद अब यूपी में भी सरकारी बालिका संरक्षण गृहों से लड़कियां गायब, भाकपा माले और ऐपवा का राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश में देवरिया के सरकारी बालिका संरक्षण गृह में जिस तरह से 18 लड़कियों की गुमशुदगी और भाजपा मंत्रियों के संरक्षण में बेबस लड़कियों से देह व्यापार का आश्चर्यजनक मामला प्रकाश में आया. ठीक इसी तरह से एक के बाद एक हरदोई, प्रतापगढ़ के शेल्टर होम से भी लड़कियो के गायब होने की खबरें आती जा रही हैं. भाकपा माले और ऐपवा ने 8 अगस्त को प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से मांग की कि देवरिया समेत प्रदेश के सभी सरकारी संरक्षण गृहों की उच्च स्तरीय स्वतन्त्र जांच…

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मंजू वर्मा का इस्तीफा जनांदोलनों की जीत, नीतीश व सुशील मोदी भी कटघरे में

आखिरकार बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को अपना इस्तीफा देना पड़ा है. निसन्देह यह बिहार के महिला आंदोलन की जीत है. ऐपवा के नेतृत्व में बिहार की महिलाएं विगत 8 जून से ही संघर्षरत हैं. गर्मी हो या बरसात मुजफ्फरपुर से लेकर पटना की सड़कों पर वे लगातार लड़ती रहीं. उन्हीं के संघर्षों का नतीजा है कि शेल्टर गृहों में हो रहे संगठित यौन उत्पीड़न व आर्थिक भ्रष्टाचार को एक मुद्दे के बतौर सामने लाया जा सका.

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कौशल किशोर का कविता संग्रह ‘ नयी शुरुआत ‘ : ‘ स्वप्न अभी अधूरा है ‘ को पूरा करने के संकल्प के साथ

    शैलेन्द्र शांत  “नयी शुरुआत’ साठ पार कवि कौशल किशोर की कविता की दूसरी किताब है  । सांस्कृतिक , सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में निरंतर सक्रिय रहे कौशल किशोर के इस संग्रह में 1969 से 1976 तक की कवितायें शामिल हैं. यानी कांग्रेसी शासन से मोहभंग की शुरुआत के बाद नक्सलबाड़ी किसान आंदोलन से लेकर आपातकाल तक की. कवि अपने वक्तव्य में खुद कहते हैं कि -‘बहुत कच्चापन मिलेगा इनमें ‘.  साथ ही यह भी कि – ‘पर यह कवि के बनने का दौर है ‘ .  आगे यह…

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हमारी संवेदना को विस्तार देता है साहित्य : प्रोफेसर हरीश त्रिवेदी

वाराणसी. साहित्य चिंतक एवं अंग्रेजी के प्रोफेसर हरीश त्रिवेदी ने कहा है कि साहित्य हमारी संवेदना को विस्तार और निखार देता है. साहित्य दूसरों के दुःख की अनुभूति कराकर हमारा दुःख कम करता है और हमारे सुख को व्यक्ति सीमा से ऊपर उठाता है. प्रोफेसर हरीश त्रिवेदी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कला संकाय के राधाकृष्णन सभागार में ” साहित्य हमें क्या देता है ” विषय पर आयोजित गोष्ठी में बोल रहे थे. यह आयोजन त्रैमासिक पत्रिका ‘साखी’ के अट्ठाइसवें अंक के लोकार्पण मौके पर किया गया था. प्रो त्रिवेदी ने कहा…

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वीरेन डंगवाल की याद और सृजन, कल्पना, रंगों, शब्दों और चित्रों की दुनिया

डॉ. कामिनी त्रिपाठी शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय बैकुंठपुर में आयोजित त्रिदिवसीय ‘वीरेन डंगवाल जन्म दिन समारोह’ का समापन 8 अगस्त को छात्राओं द्वारा वीरेन दा की कविताओं का पोस्टर बनाते हुए सम्पन्न हुआ | कार्यक्रम के पहले दिन लगभग 30 छात्राओं ने ‘नवारुण’ द्वारा प्रकाशित वीरेन दा की संपूर्ण कविताओं के संग्रह ‘कविता वीरेन’ से अपनी पसंद की कविताओं का चयन कर अपने अंदाज़ में उनका पाठ किया | छात्राओं द्वारा चयनित कविताओं को देखने से एक बात बहुत आसानी से समझी जा सकती है कि वीरेन दा की कविताएं…

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