संविधान, लोकतंत्र, न्याय, समानता, बन्धुत्व के लिए यूपी यात्रा का आगाज

लखनऊ। सामाजिक संगठनों ने संविधान, लोकतंत्र, न्याय, समानता, बन्धुत्व के लिए आज यूपी यात्रा का आगाज किया। इस मौके पर यूपी प्रेस क्लब लखनऊ में पत्रकारों को संबोधित करते हुए सामाजिक संगठनों ने कहा कि संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय पर बदस्तूर हमला जारी है। ऐसे में यह यात्रा गांव-कस्बों के आंदोलनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने की कोशिश है। यह अभियान यूपी में चार चरणों में होगा। आज पहले चरण की शुरुआत की गई जो लखनऊ से प्रारम्भ होकर सुल्तानपुर, जौनपुर, आज़मगढ़, मऊ, बलिया, गाज़ीपुर, वाराणसी, भदोही, इलाहाबाद,…

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मगर हथकड़ियां खनकी, वह उस आवाज से डर गया

मोदी सरकार जिनको देश के दुर्दांत दुश्मन के तौर पर पेश करना चाह रही थी, ऐसा कोहराम मचाने की कोशिश की गई, गोया देश की सब समस्याएं इन अधेड़ उम्र के लोगों की वजह से हों, उन्हें तो सुप्रीम कोर्ट ने जेल ही नहीं भेजने दिया. दिल्ली उच्च न्यायालय के सामने तो पुलिस हकलाते नज़र आई. सत्ता जिन्हें देश के सबसे बड़े दुश्मन के रूप में पेश कर रही थी, उनके पास मिला क्या, ये भी बड़ा रोचक है. सरकार तो बड़ी चीज है, पुलिस के अदने से सिपाही के…

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घोषित हो या अघोषित, भारत पूरी तरह मोदी आपातकाल के दौर से गुजर रहा : दीपंकर भट्टाचार्य

भाकपा-माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा है कि घोषित हो या नहीं, भारत आज पूरी तरह मोदी आपातकाल के दौर से गुजर रहा है, और इसका इलाज उसी तरह किया जाना चाहिए जैसा कि लोगों ने 1977 में इंदिरा आपातकाल का किया था. उन्होंने कहा कि उमर खालिद पर हमले का प्रयास, दाभोलकर, पंसारे, कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्या, स्वामी अग्निवेश पर बार-बार हमले और मानवाधिकार प्रचारकों का निरंतर उत्पीड़न लोकतंत्र को एक फासीवादी शासन के अधीन करने की एक ही रणनीति का हिस्सा हैं. आज जब आम लोगों के लिए लड़ने वाले वकीलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और लेखकों पर हमले हो रहे हैं और और उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है, तो लोगों को उनके पक्ष में खड़े रहना होगा और बिना शर्त उनकी रिहाई के लिए आवाज उठानी होगी. लोकसभा चुनाव की पूर्व संध्या पर ऐसी कार्रवाई शासकों के हताशा को ही दिखाती है. आने वाले चुनावों में वे अपनी निर्णायक हार भी देख रहे हैं.

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मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली. लेखकों, बुद्धिजीवियों व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के घर छापेमारी और कवि वरवर राव, वकील सुधा भारद्वाज, मानवाधिकार कार्यकर्ता अरुण फ़रेरा, गौतम नवलखा और वरनॉन गोंज़ाल्विस की गिरफ्तारी के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. बुधवार को छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड आदि राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए. इन विरोध प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में नागरिक, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता, मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल हुए. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ भवन पर वामपंथी संगठनों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका…

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लेखकों, बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी के खिलाफ़ प्रतिरोध तेज करें-जसम

नई दिल्ली. जन संस्कृति मंच ने लेखकों, बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के घर छापेमारी और गिरफ्तारी को जनता के बीच भय और आतंक फ़ैलाने की कार्रवाई करार देते हुए मोदी सरकार के इस अघोषित आपातकाल के खिलाफ़ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन को और व्यापक व तेज करने का आह्वान किया है. जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय महासचिव मनोज कुमार सिंह ने जारी बयान में कहा कि 28 अगस्त को देश के कई राज्यों में कई लेखकों, बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के घर छापेमारी की गयी और कवि वरवर राव,…

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इस राजनीतिक लड़ाई में मैं हर कीमत चुकाने को तैयार हूं : गौतम नवलखा

गिरफ्तारी के बाद प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा का संदेश यह समूचा केस इस कायर और प्रतिशोधी सरकार द्वारा राजनीतिक असहमति के खिलाफ़ की गई राजनीतिक साजिश है जो भीमा कोरेगांव के असली दोषियों को बचाने के लिए जी जान लगा रही है और इस तरह से उसने अपने उन घोटालों और नाकामियों की ओर से ध्‍यान बंटाने का काम किया है, जो कश्‍मीर से लेकर केरल तक फैली हुई हैं। एक राजनीतिक मुकदमे को राजनीतिक तरीके से ही लड़ा जाना चाहिए और मैं इस अवसर का स्‍वागत करता हूं।…

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उत्तराखंड के पूर्व महानिदेशक बी.एस. सिद्धू पर एनजीटी ने 46.14 लाख का जुर्माना लगाया

उत्तराखंड पुलिस के पूर्व महानिदेशक बी.एस. सिद्धू पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल-एन.जी.टी.) ने 46,14,960 रुपये ( छियालिस लाख चौदह हजार नौ सौ साठ रु.) का जुर्माना लगाया है. प्रदेश में नौकरशाही में भ्रष्टाचार का चर्चा तो बहुत होता रहा है, लेकिन पुलिस के सर्वोच्च पद पर रह चुके किसी अफसर के खिलाफ सजा या आर्थिक दंड का संभवतः पहला मामला है. जिस मामले में सिद्धू को भारी भरकम आर्थिक दंड की सजा हुई है. इस पूरे मामले को देखें तो ऐसा लगता है कि कोई फिल्मी कहानी चल रही है, जिसमें उच्च पद पर बैठा व्यक्ति खलनायक का रोल अदा कर रहा है.

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प्रो मैनेजर पांडेय को उदयराज सिंह स्मृति सम्मान

चर्चित साहित्यिक पत्रिका ‘ नई धारा ’ द्वारा वर्ष 2018 ‘ उदयराज सिंह स्मृति सम्मान ’ प्रसिद्ध समालोचक प्रो मैनेजर पांडेय को दिया जाएगा जिसके तहत उन्हें एक लाख रुपये सहित सम्मान पत्र, स्मृति चिन्ह दिया जायेगा. इसके साथ ही सुप्रतिष्ठित लेखक डाॅ मंगलमूर्ति (लखनऊ), चर्चित पत्रकार, कवि एवं व्यंग्यकार सुभाष राय (लखनऊ) तथा पत्रकार-कवि विजय चोरमार (कोल्हापुर, महाराष्ट्र) वर्ष 2018 के ‘नई धारा रचना सम्मान ’ से नवाजे जायेंगे जिसके प्रति प्रत्येक लेखकों को 25-25 हजार रुपये सहित सम्मान पत्र, प्रतीक चिन्ह दिए जायेंगे.

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‘ आज की कविताएं आत्मचेतस व्यक्ति की प्रतिक्रिया है ’

अनिमेष फाउंडेशन लखनऊ की ओर से फ्लाइंग ऑफिसर अनिमेष श्रीवास्तव की स्मृति में ‘आज की कविता के स्वर’ एवम कविता पाठ का आयोजन किया गया. अनुराग पुस्तकालय लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता हरी चरण प्रकाश ने की. उन्होंने अपने वक्तव्य में कविता के समय संदर्भों को व्याख्यायित किया और कहा की कविता गतिमान रहती है जो समय के साथ बदलती रहती है.युवा कवि एवं आलोचक अनिल त्रिपाठी ने ‘आज की कविता के स्वर’ पर अपने विचार रखते हुए मुक्तिबोध का हवाला देते हुए कहा कि आज की कविता आत्मचेतस व्यक्ति की प्रतिक्रिया है.

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हजारों लोगों ने मानव शृंखला बना मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में नीतीश-मोदी का इस्तीफा मांगा

मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व सुशील कुमार मोदी के इस्तीफे, सभी शेल्टर गृहों की सीबीआई जांच और जांच से जुड़े मामलों के मीडिया में प्रकाशन पर रोक के आदेश को तत्काल रद्द करने की मांग पर 28 अगस्त को वाम दलों के आह्वान पर पूरे बिहार में मानव शृंखला का आयोजन किया गया. मानव शृंखला को राजद, समाजवादी पार्टी, हम आदि पाटियों ने भी अपना सक्रिय समर्थन दिया. पूरे बिहार में दसियो हजार लोगों ने दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक कतारबद्ध होकर बलात्कार की संस्कृति के खिलाफ आवाज उठाई और उसपर तत्काल रोक लगाने की मांग की.

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बगोदर में बिजली आपूर्ति की लचर व्यवस्था के खिलाफ आइसा-इनौस ने लालटेन मार्च निकाला

बगोदर (गिरीडीह)। झारखण्ड के बगोदर में बिजली आपूर्ति की लचर व्यवस्था के खिलाफ 28 अगस्त की देर शाम बिजली उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा. भाकपा माले के छात्र-युवा संगठन आइसा-इनौस के  नेतृत्व में सैकड़ो बिजली उपभोक्ताओं ने बगोदर बाजार में लालटेन मार्च निकाला और सभा की. सभा में वक्ताओं ने बगोदर में बदहाल बिजली व्यवस्था पर सांसद-विधायक की कुंभकर्णी निद्रा के लिए उन्हें जमकर कोसा. लालटेन मार्च बगोदर बस पड़ाव से निकलकर जीटी रोड होते हुए समूचे बाजार का भ्रमण कर पुनः बस पड़ाव पहुँचकर नुक्कड़ सभा मे तब्दील हो…

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मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां अघोषित आपातकाल है-भाकपा माले

नई दिल्‍ली. भाकपा माले ने आज दिल्ली, मुम्बई, रांची, हैदराबाद आदि स्थानों पर सामाजिक व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं , लेखकों की गिरफ्तारी और उनके घर पर छापों की कार्रवाई को अघोषित आपातकाल बताया है। भाकपा माले की सेंट्रल कमेटी के सदस्य प्रभात कुमार ने आज जारी एक बयान में कहा कि आज जिस तरह से कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां की गई हैं, बहुत से कार्यकर्ताओं, लेखकों और असहमति रखने वालों के घरों में छापे डाले जा रहे हैं, यह पूरी तरह से कुख्‍यात आपातकाल की याद दिला रहा है. उन्होंने कहा कि आज…

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पूनम वासम की कविताएँ सजग ऐंद्रिय बोध और वस्तु-पर्यवेक्षण की कविताएँ हैं

हिन्दी कविता में आदिवासी जमीन से आने वाली पहली कवयित्री सुशीला सामद हैं। उनका संग्रह “प्रलाप” नाम से 1935 में, सुभद्रा कुमारी चौहान और महादेवी वर्मा के संग्रहों के लगभग साथ ही छपा था। उस समय उनकी स्वीकार्यता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि उनके इस पहले ही संग्रह की भूमिका सरस्वती पत्रिका के ख्यात संपादक देवीदत्त शुक्ल ने लिखी। उस छोटी-सी भूमिका में वे दो महत्त्वपूर्ण सूत्र प्रस्तावित करते हैं, जिनपर पुनर्विचार की ज़रूरत है। वे लिखते हैं कि “प्रलाप नामधारी इस करूण-रस-पूर्ण ‘अंतर्लाप’ को पढ़कर…

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शिवराज सरकार की हिटलरशाही

मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार द्वारा लगातार ऐसे कदम उठाये गये हैं जो कुछ अलग ही तस्वीर पेश करते हैं. इस दौरान कई ऐसे कानून लाने और पाबंदियां लगाने की कोशिशें की गयी हैं जो नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन तो करते ही हैं साथ ही लोकतंत्र का गला घोंटने वाले हैं. पूरी कोशिश की गयी है कि सरकार की जवाबदेही कम हो, नागरिकों के अधिकारों में कटौती की जा सके. कुछ ऐसे कानून लाने के प्रयास भी किये गये हैं जो पुलिस प्रशासन को निरंकुश बनाने वाले हैं और इससे उनकी जवाबदेहिता कम होती है.

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फ़ासीवाद की ओर यात्रा: चौराहे पर अमेरिका

बड़े व्यवसायी, तानाशाह सरकार और फौजी ढांचे का यही संयुक्त मोर्चा सभी देशों में फ़ासीवादी शासन के उभार के वक्त नजर आया है. इसके अलावे चर्च, भूपति और बादशाहत जैसे शक्ति के पारंपरिक उपकरणों पर भी इसकी प्रचुर निर्भरता रही है. हां यह है कि आज के फ़ासीवाद की गतिशीलता अधिक मजबूत, विकसित और तकनीकी हो चली है. लेखक का मानना है कि दोनों विश्वयुद्धों के बीच के फ़ासीवाद के कुछ तत्व इस दौर के अमेरिकी और यूरोपीय फ़ासीवाद में अभी स्पष्ट नहीं दिखाई पड़ रहे. इनमें उन्होंने नेता की व्यक्ति पूजा, एक ही पार्टी का एकाधिकार, समानांतर सैन्य टुकड़ियां, वर्दी जैसे प्रतीक और विकराल राजकीय प्रचार तंत्र आदि को गिनाया है.

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नफरत की विचारधारा और बढ़ती असहिष्णुता

हिन्दू राष्ट्रवादी ब्रिगेड अब इस भगवाधारी स्वामी को निशाना बना रही है. उन पर हमला, उसी श्रृंखला का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत डॉ दाभोलकर की हत्या से हुई थी. उसके बाद कामरेड गोविन्द पंसारे मारे गए, फिर डॉ कलबुर्गी और उनके बाद गौरी लंकेश. समाज में जैसे-जैसे असहिष्णुता बढ़ रही है, वैसे-वैसे असहमति के लिए स्थान कम होता जा रहा है. जो भी व्यक्ति शासकों की सोच से इत्तेफाक नहीं रखते, उन्हें चुन-चुन कर निशाना बनाया जा रहा है. चूंकि हमलावरों को पता है कि शासक दल के नेता न केवल उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होने देगें बल्कि वे उनकी प्रशंसा करेंगे इसलिए ऐसे लोगों की हिम्मत बढ़ रही है.

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बिहार : बिहिंया ने बर्बर मध्ययुगीन घटनाओं का दिलायी याद

भोजपुर के बिहियां में भीड़तंत्र के नाम पर उन्मादी गिरोह द्वारा एक महिला जो अपने जीवन जीने के जद्दोजहद में वर्षों से बिहियां बाज़ार पर नर्तकी का काम कर रही थी, को निर्वस्त्र कर मारते-पीटते नीतीश-मोदी की लाडली पुलिस के मौजूदगी में सरेबाज़ार घुमाया गया की जितनी भी निंदा की जाय कम है. वैसे तो मुज्जफरपुर से लेकर बिहिंया तक सरकार के संक्षण में हीं नहीं सहयोग से पूरे बिहार में महिलाओं – बच्चियों पर हिंसा-बलात्कार की घटनाओं की बाढ़ सी आ गयी है.

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हिंसा और उन्माद की राजनीति के इस दौर में विवेक की एक दुर्लभ आवाज़ थे कुलदीप नैयर

वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का आज निधन हो गया। वे 95 वर्ष के थे. वह तीन दिन से दिल्ली के एक अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे. बुधवार की रात करीब साढ़े बारह बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. कुलदीप नैयर यूएनआई, पीआईबी, ‘द स्टैट्समैन’, ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के साथ लम्बे समय तक जुड़े रहे. वह डेक्कन हेराल्ड (बेंगलुरु), द डेली स्टार, द संडे गार्जियन, द न्यूज, द स्टेट्समैन, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून पाकिस्तान, डॉन पाकिस्तान आदि समाचार पत्रों में स्तंभ लेख लिखते रहे. वे द टाइम्स’ लन्दन के संवाददाता भी रहे. कुलदीप…

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मैंने गिर्दा को कैसे जाना

(गिर्दा के स्मृति दिवस 22 अगस्त पर गिर्दा की याद) बात 1994 की है. उत्तराखंड आंदोलन पूरे ज़ोर पर था. इसी बीच में उत्तराखंड आंदोलन पर नरेंद्र सिंह नेगी जी का कैसेट आया. आन्दोलन पर 7-8 गीत उसमें थे. उन्हीं में से एक गीत था- ततुक नी लगा उदेख,घुनन मुनई नि टेक जैंता इक दिन त आलो ऊ दिन यो दुनि में मैं उस समय 12वीं में पढ़ता था और उत्तरकाशी में अपने चाचा जी के साथ रहता था. गीत सुना तो न मेरी समझ में गीत आया और न…

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गांव की साझी सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन गति और उसके संकट को केन्द्र में रखती है हेमंत कुमार की कहानी ‘रज्जब अली’

(हाल ही में ‘पल-प्रतिपल’ में प्रकाशित हेमंत कुमार की कहानी ‘रज्जब अली’ को हमने समकालीन जनमत पोर्टल पर प्रकाशित किया , जिस पर पिछले दिनों पोर्टल पर काफी चर्चा हुई और बहसें भी आयीं। बहस को आगे बढ़ाते हुए प्रस्तुत है कहानी पर युवा आलोचक और ‘कथा’ के संपादक दुर्गा सिंह की टिप्पणी: सं) कहानी गांव की साझी सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन गति और उसके संकट को केन्द्र में रखती है।यह संकट विभाजनकारी साम्प्रदायिक राजनीति द्वारा पैदा किया गया है। यह संकट पहले भी मौजूद था, लेकिन वह गांवों के सामूहिक ताने-बाने…

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