विष्णु प्रभाकर : उनके पैरों में गति और कंठ में संगीत था

एक बार किसी ने पूछा था–‘ विष्णु जी, तुम्हें दो वरदान मांगने का अवसर मिले तो क्या मांगोगे ? ’ तुरन्त उत्तर दिया उन्होंने–‘ पैरों में गति और कंठ में संगीत।’ विष्णु जी का पूरा व्यक्तित्व ही संगीतमय था और यह भी सही है कि उनके पैरों में पंखों जैसी गति थी। उनके दो ही व्यसन थे–घूमना और लिखना।

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वाराणसी में रैली कर भाकपा माले ने जनता के सवालों पर मोदी-योगी सरकार से जवाब मांगा

सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही है. देश के भीतर आतंकवाद का मसला हो या विदेश नीति का मामला हो या विकास का मामला हो. अच्छे दिन की बात तो छोड़ ही दीजिए बुरे से बुरे दिन की साक्षी बन गई है यह सरकार.

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