एक कविता : मेट्रो-महिमा : वीरेन डंगवाल

नवारुण प्रकाशन से वीरेन डंगवाल की समग्र कविताओं का संग्रह ‘कविता वीरेन’ छपने वाला है जिसमें उनके सभी संग्रहों और उसके बाद की अन्य कविताएँ भी शामिल हैं। उसी संग्रह से एक कविता है: ‘मेट्रो महिमा’। यह कविता न सिर्फ़ वीरेन की काव्य-यात्रा के दिलचस्प पड़ावों को दिखाती है, बल्कि इस दौर में तकनीक और पूँजी के हस्तक्षेप की पड़ताल भी करती है।

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और तुमने अपने पिता को आखिरी बार कब देखा ?

इस विख्यात तैल चित्र का शीर्षक जितना नाटकीय है , उतना ही नाटकीय यह चित्र भी है. चित्र का शीर्षक ” और तुमने अपने पिता को आखिरी बार कब देखा ? ” वास्तव में किसी लम्बी अवधि के नाटक का अंतिम संवाद सा लगता है जो एक बेहद गम्भीर प्रश्न के रूप में उच्चारित हुआ है और जिसके उत्तर में मंच पर एक खामोशी ठहर सी गई है. 1878 में ब्रिटिश चित्रकार विलियम फ्रेडरिक यमीस द्वारा बनाए गए इस चित्र में यह ‘ खामोशी ‘ या यों कहें कि जवाब का इंतज़ार , मानो चित्र में उपस्थित हर एक चरित्र और इस चित्र के दर्शक आज भी कर रहे हैं.

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योगी राज में बढ़ती महिला हिंसा के खिलाफ लखनऊ की सड़कों पर उतरी ऐपवा की महिलाएं

महिलाओं के तेवर देखकर सड़क पर बैठ गए पुलिस अधिकारी : बोले हमारे ऊपर से होकर जाइए यूपी को अपराध, हत्या और बलात्कार की राजधानी नहीं बनने देंगे – ऐपवा सचिव लखनऊ, 21 मई. प्रदेश में बढ़ती महिला हिंसा की घटनाओं पर चारबाग रेलवे स्टेशन से मुख्यमंत्री आवास तक शांतिपूर्ण ढंग से निकल रहे ऐपवा के जुलूस को पुलिस अधिकारियों ने परमिशन न होने का हवाला देकर हुसैनगंज के निकट रोकने की कोशिश की और महिलाओं के उग्र तेवर देखकर इस कोशिश में नाकाम पुलिस अधिकारी महिलाओं के जुलूस के…

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