कर्मकर्ता और कवि रजनी तिलक ने पूरी ज़िंदगी मेहनतकशों की शोषण मुक्ति और सम्मान के नाम कर दिया- जसम

गंगाधर पान तावड़े का जाना प्रतिरोध के एक महत्वपूर्ण स्तंभ का जाना है- जसम सामाजिक कार्यकर्ता और प्रख्यात साहित्यकार रजनी तिलक का 30 मार्च 2018 को रात 11 बजे दिल्ली के सेंट स्टीफंस हॉस्पिटल में देहांत हो गया। पिछले दिनों एक यात्रा में स्लिप डिस्क हो जाने से जटिलता बढ़ गयी। अंततः उनका आधा से अधिक शारीर पैरालाइज हो गया। उन्हें सेंट स्टीफंस हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। ऑपरेशन के बाद भी हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ। अंततः उनको बचाया न जा सका। आप का जन्म 27 मई…

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आधी रात कांपते हाथों, रुंधे कंठ और बहते हुए आंसुओं के बीच लिखा गया एक पत्र

 प्रधानमंत्री के नाम शहीद चन्द्रशेखर की मां का पत्र संतोष सहर   17 अप्रैल 1997 की वह शाम कभी नहीं भूलती जब मैं ‘ समकालीन लोकयुद्ध ‘ के एक साथी को लेकर दरौली क्षेत्र के विधायक कॉ. अमरनाथ यादव के विधायक आवास पहुंचा था। मां कौशल्या वहीं ठहरी हुई थीं। जब हम पहुंचे, उनको एक चौकी पर बैठा पाया। उन्होंने मुझे अपनी ही बगल में बिठाया। उनके सामने कुछ खाने को रखा हुआ था। लेकिन, वो लगातार रोये जा रही थीं और बोले जा रही थीं। डेढ़- दो घण्टे गुजर…

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मानसा में सखी सुल्तान

  इस 23 मार्च को पंजाब के मानसा कस्बे में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की तीन ख़ूबसूरत मूर्तियों का अनावरण किया गया. अनावरण  भाकपा माले महासचिव कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य के हाथों हुआ. इसी के साथ माले के पांच दिन चलने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई लेकिन यह आलेख सम्मेलन के बारे में नहीं है. ऊंची टँकी वाले जिस छोटे-से साफ सुथरे पार्क में ये मूर्तियां स्थापित हैं, वहां से एक ऊबड़-खाबड़ सी सड़क घूम कर गेहूं की कच्ची फसलों के लहराते समंदर के किनारे स्थित सम्मेलन-स्थल की तरफ़…

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‘ स्वायत्तता’ का आगमन अर्थात अकादमिक संस्थानों को दुकान में तब्दील करने की तैयारी

(दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर  उमा राग का यह लेख  ‘  द वायर ’ में  29 मार्च को प्रकाशित हुआ  है )   हम से छीन लिया गया कॉपी कलम किताब कैद कर लिया गया हमारे सपने को फिर हम से कहा गया तुम स्वायत्त हो हमारे अधिकारों को छीनने के लिए उन्होंने एक नया शब्द गढ़ा है ‘स्वायत्तता’ जैसे उन्होंने कभी अंगूठा काटने को कहा था ‘ गुरु दक्षिणा ‘ –प्रदीप कुमार सिंह कितनी सच है यह पंक्ति कि हमारे अधिकारों को छीनने के लिए ही अक्सर सत्ता नए-नए…

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कुम्भ मेले का लोगो : कला की सरकारी समझ का नायाब नमूना

अख़बार में छपे फोटो से पहले तो मुझे यह लगा कि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री प्रयाग में 2019 में होने वाले कुम्भ मेले का पोस्टर जारी कर रहे हैं , पर खबर पढने  से पता चला कि यह पोस्टर नहीं बल्कि कुम्भ मेला- 2019 का आधिकारिक लोगो है । लोगो या प्रतीक चिन्ह मूलतः एक पहचान चिन्ह ही होता है जिसका सांकेतिक और कलात्मक होने के साथ-साथ व्यावहारिक होना जरूरी है जिससे उसकी प्रतिलिपि बनाना सहज ( रिप्रोड्यूसिबल) हो और किसी कार्यक्रम के प्रचार के लिए उसका व्यापक…

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एंगेल्स की शाहकार किताब ‘ द ओरिजिन आफ़ द फ़ेमिली, प्राइवेट प्रापर्टी एंड द स्टेट ’

गोपाल प्रधान 2010 में त्रिस्तम हन्ट की नई भूमिका के साथ एंगेल्स की महान किताब ‘ द ओरिजिन आफ़ द फ़ेमिली, प्राइवेट प्रापर्टी एंड द स्टेट ’ का प्रकाशन फिर से पेंग्विन बुक्स से हुआ। भूमिका इतनी महत्व की है कि उसका स्वतंत्र परिचय भी मूल पुस्तक के परिचय से कम जरूरी नहीं है। किताब के लिखे जाने की कहानी यह है कि 1883 में मार्क्स के देहांत के बाद उनके कागजों को एंगेल्स ने जब उलटना शुरू किया तो उनमें एक ऐसा दस्तावेज मिला जिसने एंगेल्स का ध्यान तुरंत…

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सी पी आई (एम एल ) लिबरेशन ने 2 अप्रैल की दलित स्ट्राइक का पुरजोर समर्थन किया

पश्चिमी बंगाल और दूसरे स्थानों पर अल्पसंख्यकों पर हिंसा की घटनाओं की कड़ी निंदा की मानसा, पंजाब।  सी पी आई (एम एल) लिबरेशन के मानसा में जारी राष्ट्रीय महाधिवेशन में देश भर में कल आर एस एस द्वारा राम नवमी के त्यौहार के मौके को अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत और हिंसा फ़ैलाने की साजिश के लिए इस्तेमाल किये जाने की कड़ी निंदा की गई. भाकपा माले ने मोदी सरकार द्वारा एस सी/एस टी एक्ट को कमजोर करने के लिए लाए जा रहे संशोधनों  को दलित विरोधी बताया और इसके प्रतिवाद में दलित…

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आरएसएस-भाजपा को शिकस्त देना फौरी कार्यभार – भाकपा (माले)

भाकपा-माले के 10वें राष्ट्रीय महाधिवेशन के चौथे दिन राष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थिति और वामपंथी कार्यभार पर व्यापक चर्चा हुई मानसा, पंजाब। भाकपा-माले के 10वें राष्ट्रीय महाधिवेशन के चौथे दिन 26 मार्च को राष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थिति पर व्यापक चर्चा हुई जिसमें 30 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने बहस में हिस्सा लिया और 100 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने अपने लिखित सुझाव और संशोधन दिए। निवर्तमान केंद्रीय कमिटी की ओर से राजनीतिक प्रस्ताव राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने पेश किया। राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया है कि ‘जिस राजनीतिक शून्य ने फासीवादी शक्तियों को अस्तव्यस्त…

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फासीवाद की निर्णायक शिकस्त के लिए देश के राजनीतिक एजेंडे और माहौल को बदलना होगा : कॉ. दीपांकर भट्टाचार्य

  भाकपा माले के 10 वें महाधिवेशन में महासचिव कॉ. दीपांकर भट्टाचार्य का उद्घाटन भाषण    माले के 10वें पार्टी महाधिवेशन में शामिल भारत की विभिन्न वामपंथी पार्टियों से आये साथियों, अंतर्राष्ट्रीय वाम और प्रगतिशील आन्दोलन से आये सम्मानित अतिथियों, प्रतिनिधि, अतिथि, पर्यवेक्षक और कार्यकर्ता साथियों, इस उद्घाटन सत्र में मैं आप सब का क्रांतिकारी अभिवादन और गर्मजोशी भरा स्वागत करता हूँ. इस महाधिवेशन के कुछ पहले ही हमने गौरवशाली नवम्बर क्रान्ति का शताब्दी वर्ष मनाया है. 2017 महान नक्सलबाड़ी किसान आन्दोलन का 50वां साल भी है. इस 10वें महाधिवेशन…

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‘ हिंदुत्व का हिन्दू धर्म से कोई लेना देना नहीं ’

नई दिल्ली में ‘ देशप्रेम के मायने : संदर्भ आंबेडकर और भगत सिंह ’ नई दिल्ली.  भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस की पूर्व संध्या और डॉ. अम्बेडकर के महाड़ सत्याग्रह को याद करते हुए चार प्रमुख लेखक-संगठनों- जलेस, दलेस, प्रलेस और जसम ने मिलकर ‘ देशप्रेम के मायने : संदर्भ आंबेडकर और भगत सिंह ’ का आयोजन 22 मार्च को गांधी शांति प्रतिष्ठान, दिल्ली में किया। अध्यक्ष मंडल की तरफ से बोलते हुए चंचल चौहान ने कहा कि भगत सिंह और आंबेडकर जैसे आंदोलनकर्ता जिन दिनों भारत की राजनीतिक तथा सामाजिक…

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मार्क शगाल का एक ऐतिहासिक प्रतिरोध चित्र ‘ व्हाइट क्रुसिफिक्शन ’

  ( तस्वीरनामा की पांचवी कड़ी में रूसी चित्रकार मार्क शगाल और उनके प्रसिद्ध चित्र ‘व्हाइट क्रुसिफिक्शन’ के बारे में बता रहे हैं प्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक ) मार्क शगाल (1887-1985) रूसी चित्रकार थे जिन्होंने जर्मनी के नेशनल सोशलिस्ट पार्टी के यहूदियों के प्रति बढ़ते अत्याचारों के विरुद्ध  ‘व्हाइट क्रुसिफिक्शन’ शीर्षक से एक महत्वपूर्ण चित्र बनाया था.  मार्क शगाल एक प्रगतिशील आधुनिक चित्रकार होने के साथ साथ धर्म से यहूदी थे , इसलिए भी उनकी गतिविधियों को हिटलर द्वारा प्रतिबंधित किया गया था. 1937 में जर्मनी में नाज़ियों ने एक…

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बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर में ढाई महीने में 414 बच्चों की मौत

गोरखपुर, 23 मार्च। बीआरडी मेडिकल कालेज में वर्ष 2018 में भी बच्चों की मौत में कोई कमी नहीं आ रही है। वर्ष 2018 के ढाई महीनों में 414 बच्चों की मौत हो गई है. इसमें नवजात शिशु, इंसेफेलाइटिस मरीज और अन्य बीमारियों से ग्रस्त बच्चे हैं. यह जानकारी गोरखपुर न्यूज लाइन को मेडिकल कालेज से विश्वसनीय सूत्रों से मिली है. बीआरडी प्रशासन अगस्त महीने में आक्सीजन कांड के बाद से बच्चों की मौत के बारे में अधिकृत जानकारी नहीं दे रहा है. इस कारण मीडिया को सूत्रों पर निर्भर रहना…

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जीविका के संसाधनों पर हक़ जमाने के लिए जनता को राजनीति पर हक़ जमाना होगा – कॉ. दीपांकर भट्टाचार्य

मानसा (पंजाब). मानसा में सी पी आई (एम् एल ) लिबरेशन के 10 वें महाधिवेशन की शुरुआत के मौके पर आज यहाँ शहीद भगत सिंह, राजगुरु एवं सुखदेव की प्रतिमाएं स्थापित की गयीं और देश विदेश से आये हजारों कार्यकर्ताओं ने एक बड़ी जनसभा की. कांसे की बनीं प्रतिमाओं का लोकापर्ण सी पी आई (एम एल) लिबरेशन के महासचिव कॉ. दीपांकर भट्टाचार्य, शहीद भगत सिंह के भांजे प्रो. जगमोहन सिंह, नाट्यकार सेमुअल जॉन, प्रो. बावा सिंह, प्रो. अजैब टिवाना एवं रिसेप्शन कमेटी के अन्य मेम्बरों की उपस्थिति में किया गया.…

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यहीं कही रहेंगे केदारनाथ सिंह

मंगलेश डबराल, वरिष्ठ कवि हिन्दी कविता की एक महत्वपूर्ण पीढी तेज़ी से विदा हो रही है. यह दृश्य  दुखद और  डरावना  है जहां ऐसे बहुत कम कवि बचे हैं जिनसे कविता का विवेक और प्रकाश  पाया जा सके. पिछले वर्ष कुंवर नारायण, चंद्रकांत देवताले, दूधनाथ सिंह, और अब केदारनाथ सिंह. केदार जी रक्तचाप, मधुमेह या हृदयाघात जैसी व्याधियों  से मुक्त थे जो अस्सी वर्ष पार करने वाले व्यक्ति को प्रायः अपनी गिरफ्त में ले लेती हैं और सब को उम्मीद थी कि वे निमोनिया पर काबू पाकर फिर से लेखन…

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पटना में दिखाई गई फ्रेंच मानवविज्ञानी निकोलस जाउल की दलित संघर्ष पर केंद्रित फिल्म ‘संघर्ष ’

  पटना में दो दिवसीय ‘समय का गीत और प्रतिरोध का सिनेमा’ आयोजन दलित उत्पीड़न और सरकार के जनविरोधी कार्रवाइयों के प्रतिरोध में गीत गाये  पटना. पटना में 16-17 मार्च को ‘‘समय का गीत और प्रतिरोध का सिनेमा’ आयोजन हुआ। हिरावल और प्रतिरोध का सिनेमा द्वारा आयोजित इस आयोजन की शुरुआत छज्जूबाग, पटना में गीत-संगीत की वीडियो-आॅडियो सीडी ‘समय का गीत’ के लोकार्पण से हुई. लोकार्पण फ्रेंच मानवविज्ञानी निकोलस जाउल और जसम के राज्य सचिव सुधीर सुमन ने किया. संतोष सहर, कवि कृष्ण समिद्ध, जसम पटना के संयोजक कवि राजेश…

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गंवई संवेदना और वैश्विक दृष्टि के कवि

अरुण आदित्य केदारनाथ सिंह करीब चार दशक से दिल्ली में रहते हुए भी ग्रामीण संवेदना के कवि बने रहे। छल-बल की इस राजधानी में भी उन्होंने अपने आस-पास गंगा-सरयू के दोआबे का एक गांव बसा लिया था। यह गांव अपनी भौतिक उपस्थिति में नहीं, बल्कि केदार जी की चेतना में बसता था। इस गांव से संबंध बनाए रखने क लिए वे बार-बार स्मृतियों में जाते हैं। सहज ग्रामीण संवेदना उन्हें एक विशिष्ट काव्य-दृष्टि देती है। इस काव्य-दृष्टि का ही कमाल है कि बरामदे में रखी हुई कुदाल तक पर वे…

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केदारनाथ सिंह के काव्य वैशिष्टय का अनुकरण नहीं किया जा सकता: प्रो विश्वनाथ प्रसाद तिवारी

साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, संस्कृतिकर्मियों ने प्रख्यात कवि केदारनाथ सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गोरखपुर, 21 मार्च। प्रेमचन्द पार्क में आज दोपहर बड़ी संख्या में जुटे साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, संस्कृतिकर्मियों ने प्रख्यात कवि केदारनाथ सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि दी और यादें साझा की। यह आयोजन प्रगतिशील लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, जनवादी लेखक संघ, प्रेमचन्द साहित्य संस्थान, भोजपुरी संगम, संगम, सुधा संस्मृति संस्थान, इप्टा, अलख कला समूह आदि ने मिल कर किया था। श्रद्धांजलि सभा में साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि अपने समकालीन कवियों-रघुवीर सहाय, सर्वेश्वर…

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‘ संस्कृति खरगोश की तरह है, जो आने वाले खतरे का आभास देती है ’

कौशल किशोर   यह कैसा समय है कि साथ के लोग साथ छोड़े जा रहे हैं. कुंवर जी और दूधनाथ सिंह को हम ठीक से अभी याद भी नहीं कर पाये थे कि हमारे अत्यंत प्रिय कवि केदारनाथ सिंह के निधन की बुरी खबर मिली. कई बार लगता है कि हम पके आम के बाग में हैं. कब कौन टपक पड़े कहना मुश्किल है. अब तो अधपके और कच्चे भी गिर रहे हैं. सुशील सिद्धार्थ के दाह संस्कार की राख अभी ठण्डी भी नहीं हो पाई कि दूसरे ही दिन…

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‘आदमी के उठे हुए हाथों की तरह’ हिन्दुस्तानी अवाम के संघर्षों को थामे रहेगी केदारनाथ सिंह की कविता : जसम

कवि केदारनाथ सिंह को जन संस्कृति मंच की श्रद्धांजलि जनतांत्रिक मूल्यों की अकाल-वेला में केदारनाथ सिंह की कविता जनप्रतिरोध के सारसों की अप्रत्याशित आवाज़ थी. उनका संग्रह ‘अकाल में सारस’ 1988 में प्रकाशित हुआ था, जिसमें इसी शीर्षक की एक कविता है. कविता इस तरह शुरू होती है- “तीन बजे दिन में आ गए वे जब वे आए किसी ने सोचा तक नहीं था कि ऐसे भी आ सकते हैं सारस एक के बाद एक वे झुंड के झुंड धीरे-धीरे आए धीरे-धीरे वे छा गए सारे आसमान में धीरे-धीरे उनके…

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‘ कविता भविष्य में गहन से गहनतर होती जाएगी ’

  ( प्रख्यात कवि प्रो. केदारनाथ सिंह ने 26 फरवरी 2016 को गोरखपुर के प्रेमचंद पार्क में प्रो परमानंद श्रीवास्तव की स्मृति में ‘ कविता का भविष्य ’ पर व्याख्यान दिया था. यह आयोजन प्रेमचंद साहित्य संस्थान ने किया था. इस व्याख्यान में भविष्य की कविता पर उन्होंने कई महत्वपूर्ण बातें की थी. प्रस्तुत है व्याख्यान का प्रमुख अंश )   आज का समय अपने सारे गड्डमड्ड स्वरूप के भीतर से अपनी सच्ची कविता खोज रहा है. इस कविता की तलाश बड़े पैमाने पर जारी है. यह कार्य नई पीढ़ी…

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