मार्क शगाल का एक ऐतिहासिक प्रतिरोध चित्र ‘ व्हाइट क्रुसिफिक्शन ’

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( तस्वीरनामा की पांचवी कड़ी में रूसी चित्रकार मार्क शगाल और उनके प्रसिद्ध चित्र ‘व्हाइट क्रुसिफिक्शन’ के बारे में बता रहे हैं प्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक )

मार्क शगाल (1887-1985) रूसी चित्रकार थे जिन्होंने जर्मनी के नेशनल सोशलिस्ट पार्टी के यहूदियों के प्रति बढ़ते अत्याचारों के विरुद्ध  ‘व्हाइट क्रुसिफिक्शन’ शीर्षक से एक महत्वपूर्ण चित्र बनाया था.  मार्क शगाल एक प्रगतिशील आधुनिक चित्रकार होने के साथ साथ धर्म से यहूदी थे , इसलिए भी उनकी गतिविधियों को हिटलर द्वारा प्रतिबंधित किया गया था.

1937 में जर्मनी में नाज़ियों ने एक निर्धारित योजना के तहत जर्मन आधुनिक कला कृतियों की जाँच पड़ताल शुरू की और इस दौरान जर्मनी में 16,000 कलाकृतियों को चिन्हित कर या तो नष्ट कर दिया गया या उन्हें दुसरे देशों को बेच दिया गया. म्युनिख में 1937 में आयोजित मार्क शगाल के चार चित्रों को, यहूदियों द्वारा बनाये गए ‘ भ्रष्ट कृतियों ‘ के रूप में प्रदर्शित करते हुए उन्हें नाज़ी पार्टी के विचारों के भिन्न और पार्टी के कला मानकों के विपरीत माना गया.  इस प्रदर्शनी के बाद यहूदियों पर असहनीय अत्याचारों का दौर शुरू हुआ. उनके नागरिक अधिकारों पर तमाम प्रतिबन्ध लगाए जाने लगे और यहूदियों की विशेष जनगणना करायी गयी और इस प्रकार एक व्यापक नरसंहार की तैयारियाँ होने लगी थी.

मार्क शगाल ने इस पूरे दौर के अमानवीय अत्याचार के विरोध में ‘व्हाइट क्रुसिफिक्शन ‘ शीर्षक के इस चित्र को बनाया था. इस चित्र में उन्होंने , यहूदी ईसा को शहीद के रूप में दिखाया. चित्र के ईसा के सर पर का पगड़ी और कमर में बँधे कपड़े के ज़रिये उन्होंने ईसा को एक यहूदी शहीद के रूप में चित्रित किया. इस चित्र में ईसा के सर के पीछे के गोल प्रभामंडल (ईसाई प्रतीक) के आकार के सामान ही ईसा के पैरों के पास रखे दीपदान (यहूदी प्रतीक – मेनोराह) के प्रभामंडल को भी बनाया गया है.

इस चित्र में , बर्फ से ढँका पूरा इलाका गम में डूबा हुआ सा दिखता है , जहाँ आसमान पर धुँवे के गुबार के बीच रूसी लोककथा के नायक-नायिकाओं को हम शगाल की विशिष्ट शैली में तैरते हुए देख पाते हैं. चित्र के दाहिनी ओर एक जलता हुआ सिनागॉग (यहूदी पूजा स्थल) दिख रहा है , जहाँ एक जर्मन सैनिक लूट पाट करता नज़र आता है. इस चित्र में पहले मार्क शगाल ने , सैनिक की बाह की पट्टी और सिनागॉग के ऊपर के झंडे पर नाज़ी पार्टी के  प्रतीक चिन्ह (उल्टा स्वास्तिक) को बनाया था पार बाद में उसे शगाल ने मिटा दिया था.

चित्र में बाँयी ओर नीचे कुछ बूढ़े लोग हैं , जिनके शरीर पर लिखा हुआ है ‘ मैं यहूदी हूँ ‘  . अत्याचार के इस भयानक दौर में, हिटलर ने यहूदियों के लिए यह अनिवार्य किया था कि हर यहूदी के सीने पर ‘ मैं यहूदी हूँ ‘ लिखा हो.

चित्र के बाँयी ओर ही नीचे जहाँ हम नाँव पर बैठ कर लोगों को जर्मनी छोड़ कर भागते हुए देख पाते हैं, वहीं उसके ऊपर के हिस्से में जलते हुए मकानों के खंडहर और सोवियत रूस के रेड आर्मी को यहूदियों की मदद के लिए हाथों में लाल झंडें लिए आते दिखते हैं। मार्क शगाल ने नाज़ियों द्वारा यहूदियों के नरसंहार को रोकने के लिए केवल सोविएत रूस से ही मदद की ही कल्पना की थी.

इस चित्र को गौर से देखने पर हमें लगता है कि चित्रकार ने मानों चित्र की पूरी घटनाओं को एक उड़ती हुई चिड़िये की नज़र से देखा हो , जहाँ चित्र का कोई भी अंश  दूसरे किसी अंश के आड़े नहीं आता.

आधुनिक चित्रकला के इतिहास में मार्क शगाल का नाम उनकी नितांत निजी और विशिष्ट शैली के लिए लिया जाता है , जहाँ उन्होंने  प्रायः ‘खिलंदड़ी’ के लहज़े में गंभीर बात कहने की अद्वितीय क्षमता का प्रदर्शन, अपने चित्रों में किया है.

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