पूरब अपनी सम्पदा बर्तानिया को अर्पित कर रहा है

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 (साम्राज्यवादी शक्तियाँ अपने स्वार्थ में चित्रकला का किस तरह से उपयोग कर सकती हैं , इसका सबसे सार्थक उदाहरण है  ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा बनवाया गया चित्र ‘ पूरब अपनी सम्पदा बर्तानिया को अर्पित कर रहा है ‘. यह चित्र इतालवी चित्रकार स्पिरिडीओन रोमा (1737-1781) ने बनाया था. तस्वीरनामा की तीसरी कड़ी में इस चित्र के बारे में जानकारी दे रहे हैं प्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक )

 

चित्रकला इतिहास में कई चित्र अपने कलात्मक गुणों के कारण ही नहीं बल्कि अपनी ऐतिहासिकता के लिए भी महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं. ऐसा ही एक चित्र है. ‘ पूरब अपनी सम्पदा बर्तानिया को अर्पित कर रहा है ‘ जिसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1778 में अपने लन्दन स्थित, ईस्ट इंडिया हाउस के राजस्व समिति कक्ष के लिए बनवाया था. किसी भी देश और काल के शासकों द्वारा बनवाये गए चित्र, स्वाभाविक रूप से ही उनके शौर्य और महानता को वर्णन करते है. अनेक अवसरों पर शासकों द्वारा एक झूठ को सच के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से और अपने मन मुताबिक इतिहास को तोड़ने मड़ोड़ने के लिए भी चित्रों का इस्तेमाल किया जाता रहा है. इस चित्र को भी ब्रिटिश सम्रज्यवाद के स्वार्थों को ध्यान में रख कर बनवाया गया था.

इस चित्र का निर्माण का समय (1778) महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रिटिश शासन की गिरफ्त से अमरीका (1776) आज़ाद हो चुका था और ऐसे वक़्त अपने साम्राज्यवादी स्वार्थों के लिए भारत ब्रिटिश शासकों के लिए महत्वपूर्ण हो गया था. अंग्रेज़ भारत से ईस्ट इंडिया कंपनी के माध्यम से जिस व्यापक अन्याय, अत्याचार और लूट को अंजाम दे रहे थे उसे एक बेहतर चेहरा देने के उद्देश्य से ही यह चित्र न केवल बनवाया ही गया बल्कि ईस्ट इंडिया कंपनी के राजस्व समिति के कक्ष की छत पर इसे लगवाया भी गया.

इस चित्र में सीमित रंगों का प्रयोग है जहाँ पृष्टभूमि में आकाश, समुद्र और युद्ध पोत दिख रहे है। चित्र में  बायीं ओर जहाँ सफ़ेद कपड़ों में स्त्री, ब्रटिश शासन की प्रतीक है वहीं काली स्त्री भारत का प्रतीक है। दर्शकों के लिए यह इस सच को स्थापित करने की कोशिश है कि ‘ भारत , अपने हीरे जवाहरात ,सम्पदा आदि स्वेच्छा से बर्तानिया को सौप रहा है.

चित्र का शीर्षक भी, इसी के अनुरूप इतिहास के सच को झुठलाने की कोशिश में रखा गया है. यहाँ रोमन देवता बुध ग्रह (mercury) को हाथों में दंड लिए दिखाया गया है.  वास्तव में रोमन में बुध या मर्करी को वाणिज्य के देवता के रूप में माना जाता है.  इस चित्र में बुध की उपस्थिति इस बात को रेखांकित करने के लिए किया गया है कि भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक कार्यकलापों के लिए ब्रिटिश शासन को दैवी स्वीकृति प्राप्त है. चित्र में सभी बातें न केवल मनगढंत ही हैं, बल्कि इतिहास को अपने ढंग से पेश करने की कोशिश भी है. चित्र में चीनी व्यक्ति को भी उपहार के रूप में मिंग फूलदान लिये दिखाया गया है, जबकि 1778 में चीन में ब्रिटिश साम्राज्यवाद का विस्तार नहीं हुआ था ( पर वे इसके लिए पूरी कोशिश में लगे हुए थे ) .

इस प्रकार यह चित्र केवल भारत के सन्दर्भ में ही नहीं बल्कि साम्राज्यवादी शक्तियाँ अपने स्वार्थ में चित्रकला का किस तरह से उपयोग कर सकती हैं , यह चित्र उसका एक सार्थक उदाहरण है.

स्पिरिडीओन रोमा (1737-1781) एक इतालवी चित्रकार थे , जिनके जीवन एवं कृतियों के बारे में ज्यादा जानकारियां उपलब्ध नहीं हैं. उन्होंने मूलतः लन्दन में रह कर ही चित्र बनाये थे और उपरोक्त चित्र ‘ पूरब अपनी सम्पदा बर्तानिया को अर्पित कर रहा है’ उनकी सबसे चर्चित कृति है.

 

 

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