कामगार महिलाओं के संघर्ष का दिवस है महिला दिवस, मिथक और बाजार का नहीं

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( राधिका मेनन के रेखा चित्रों से जानिए अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस का

इतिहास )

महिला दिवस की शुभकामनाएं एक दिन पहले से आने लगीं। इन शुभकामना संदेशों में कुछ औरतों के सौन्दर्य पर थे, कुछ अच्छी बेटी, पत्नी, बहू, मां होने पर था। कछ ऐसे मैसेज भी थे जिसमें बधाई देने के साथ ही महिला दिवस पर चेहरे की मालिश कराने पर 30 फीसदी का डिस्काउंट देने की बात कही गई थी।
आठ मार्च की सुबह से तो महाभारत की महिला किरदारों की ताकत पर कहानी गढते हुए संदेश आए जिसमें कहा गया था कि अच्छी औरत, मां, बहू होने से इज्जत खुद मिल जाती है। हंसी आना तब बंद हुई जब महिलाएं भी इसको व्हाट्सअप करने लगीं। तुरन्त कागज फैलाया और लगा कि कुछ बातें स्पष्ट कह दी जाएं। इतिहास को याद दिलाया जाय। हां ! उस इतिहास को और उस समाजवादी विमर्श के गौरवपूर्ण किस्सों को जिसे मिटाकर अब मिथक गढ़ा जा रहा है। 1911 के बाद बहुत संघर्ष हुए पर वे किसी दिन और ………. .

आइये, -अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास को इन रेखा चित्रों के जरिये जानते हैं-

 

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