एंगेल्स की शाहकार किताब ‘ द ओरिजिन आफ़ द फ़ेमिली, प्राइवेट प्रापर्टी एंड द स्टेट ’

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गोपाल प्रधान

2010 में त्रिस्तम हन्ट की नई भूमिका के साथ एंगेल्स की महान किताब ‘ द ओरिजिन आफ़ द फ़ेमिली, प्राइवेट प्रापर्टी एंड द स्टेट ’ का प्रकाशन फिर से पेंग्विन बुक्स से हुआ। भूमिका इतनी महत्व की है कि उसका स्वतंत्र परिचय भी मूल पुस्तक के परिचय से कम जरूरी नहीं है। किताब के लिखे जाने की कहानी यह है कि 1883 में मार्क्स के देहांत के बाद उनके कागजों को एंगेल्स ने जब उलटना शुरू किया तो उनमें एक ऐसा दस्तावेज मिला जिसने एंगेल्स का ध्यान तुरंत खींचा । 1877 में प्रकाशित अमेरिकी मानवशास्त्री हेनरी मार्गन की किताब ‘एनशिएन्ट सोसाइटी: रिसर्चेज इन द लाइन्स आफ़ ह्यूमन प्रोग्रेस फ़्राम सेवेजरी थ्रू बार्बरिज्म टु सिविलाइजेशन’ से ढेर सारे उद्धरण और उन पर टिप्पणियां दर्ज थीं । इन्हें पढ़कर एंगेल्स ने उत्तेजना में काउत्सकी को पत्र लिखा कि जैसे डार्विन का क्रांतिकारी महत्व जीव विज्ञान के लिए है उसी तरह मार्गन की इस किताब का महत्व आदिम समाज के सिलसिले में होगा। मार्क्स की इन्हीं टिप्पणियों से प्रेरित होकर एंगेल्स ने अपनी किताब लिखी।

इस किताब में एंगेल्स की खूबियों के दर्शन होते हैं । बीसवीं सदी में जिन देशों में मार्क्सवादियों के शासन स्थापित हुए उनमें स्त्रियों के संबंध में बने कानूनों पर इस किताब का प्रत्यक्ष प्रभाव सर्वविदित है। यहां तक कि पश्चिमी देशों के समाजवादी नारीवाद के पीछे भी इस किताब का स्पष्ट प्रभाव है । इसमें लैंगिक विषमता पर जोरदार हमला किया गया है, परिवार संस्था की ऐतिहासिक आलोचना की गई है और उत्तर-समाजवादी देशों में इस किताब की मान्यताओं की विरासत बनी हुई है। इन सबके चलते यह किताब आधुनिक सामाजिक संबंधों को समझने के लिए बुनियादी दृष्टि प्रदान करती है ।

मार्गन अमेरिकावासी विकासवादी मानवशास्त्री थे और वे मानव समाज के प्रगतिशील विकास की धारणा में यकीन करते थे । मार्गन के अनुसार बर्बरता से सभ्यता की ओर सामाजिक विकास का प्रत्येक चरण भरण पोषण के बढ़ते हुए स्रोतों का परिणाम था जो परिवार के बदलते हुए रूपों में प्रतिबिम्बित होता है । मार्गन भी डार्विन की जैव विकासवादी सैद्धांतिकी से प्रभावित हैं और मानते हैं कि बर्बरता से पहले के मनुष्य वानराभ प्राणी जैसे ही थे और आग, तीर-धनुष तथा पत्थर की कुल्हाड़ी के सहारे लम्बे समय में विकसित होते रहे । सभ्यता में प्रवेश से पहले मनुष्य खेती-बारी, पशुचारण और लौह अयस्क गलाने का काम सीख चुका था ।

मार्गन का कहना था कि इनमें से प्रत्येक युग की अलग पारिवारिक संरचना थी । परिवार का ढांचा स्थिर नहीं समाज के विकास के साथ ही विकासमान रहा है । उनका मानना था कि शुरू में अर्थात बर्बर अवस्था में सामूहिक विवाह व्यवस्था का चलन था और यौन स्वतंत्रता अबाध थी । इसी अवस्था में युग्म विवाह की शुरुआत हुई और उसी के साथ गोत्र आधारित समाज का विकास हुआ । विवाहित युग्म सामुदायिक वंशगत आवासों में रहते थे । इसी के बाद पितृसत्तात्मक परिवार का विकास हुआ जिसमें मुखिया पुरुष होता था और उस परिवार में एकाधिक पीढ़ियों का एक साथ रहना होता था । मुखिया का पत्नियों, बच्चों, गुलामों और नौकरों पर अधिकार होता था । बर्बरता के अंतिम चरण में एक-पत्नी-व्रती परिवार का उदय हुआ । इसमें पुरुष का परिवार पर पूरा स्वामित्व स्थापित हुआ । विभिन्न समाज इसी रास्ते पर भिन्न भिन्न गति से आगे बढ़े ।

इस समूचे शोध के दौरान मार्गन को अचम्भा इस बात पर हुआ कि कई बार भाषा परिवार के मौजूदा रूप के मेल में नहीं होती थी । उनके अपने समय में एक-पत्नी-व्रती परिवार की बहुलता के बावजूद भाषा में विचित्र यौन संबंधों के अवशेष मौजूद थे । लगता था जैसे भाषा में अतीत के पारिवारिक रूपों के कंकाल बचे रह गए । मार्गन को जो चीज भाषा में मिली उसी के सहारे एंगेल्स ने पुराने पारिवारिक स्वरूपों को तलाशने की कोशिश शुरू की । परिवार के इस पुराने रूप को बदली समार्थिक ताकतों के चलते बदलना पड़ा था । मार्गन की खोज ने उत्पादन के साधनों के स्वामित्व में बदलाव के साथ परिवार के रूप में बदलाव की बात साबित कर दी । मनुष्य के प्राकृतिक अस्तित्व की प्रथम अवस्था में कबीला, जमीन पर उसका सामुदायिक स्वामित्व और इसी तरह की पारिवारिक संरचना थी । मार्गन की किताब मार्क्स और एंगेल्स के लिए कच्चा माल बन गई क्योंकि आदिम इतिहास में उनकी घनघोर रुचि थी ।

एंगेल्स की विशेष रुचि का एक कारण स्त्री समस्या के बारे में प्रकाशित अगस्त बेबेल की किताब थी जिसमें बेबेल ने कहा था कि इतिहास के आरम्भ से ही स्त्रियों और मजदूरों का दमन उत्पीड़न आम बात रहा है । बेबेल के अनुसार परिवार के विकास से पहले से ही स्त्री कबीले की संपत्ति मानी जाती थी और उसे इनकार करने का अधिकार नहीं होता था । यही बात कार्ल काउत्सकी ने भी आदिम यौन संबंधों पर लिखी एक लेखमाला में दोहराई । इससे एंगेल्स को भू-स्वामित्व के आरम्भिक तरीकों और विवाह पद्धतियों के बीच संबंध महसूस हुआ । अगस्त बेबेल और काउत्सकी के विपरीत एंगेल्स का कहना था कि आदिम मानव समाज में पितृसत्ता नहीं थी बल्कि सामुदायिक यौन संबंधों की व्यवस्था रही होगी । आदिम समाज में स्त्री का उत्पीड़न उन्हें आधुनिक विकार का प्रक्षेपण महसूस हुआ । आधुनिक समाज में आकर यौन स्वच्छंदता पुरुष का विशेषाधिकार बना, अतीत में यह सुविधा पुरुष के साथ स्त्री को भी प्राप्त थी । मार्गन की किताब के बारे में मार्क्स की टिप्पणियों से एंगेल्स को अपनी मान्यता की पुष्टि मिलती लगी और इसके आधार पर उन्होंने अगस्त बेबेल और काउत्सकी की अनैतिहासिक मान्यता के विरोध में लिखने का निश्चय किया क्योंकि मार्गन की किताब पढ़ने का मौका सबको नहीं भी मिल सकता था ।

एंगेल्स ने काउत्सकी को पत्र लिखकर सूचित किया था कि मार्गन की खोज से इतिहास के भौतिकवादी नजरिए की पुष्टि होती है । अतीत को समझने का यह नजरिया मार्क्स और एंगेल्स ने शुरू में ही विकसित कर लिया था जिसमें धर्म, वर्ग, राजनीतिक प्रणाली आदि सामाजिक संरचनाओं को आर्थिक और तकनीकी ताकतों का उत्पाद माना गया था । इसमें सबसे महत्वपूर्ण तत्व संपत्ति संबंध थे । इसके आधार पर सबसे अधिक रूपायित होने वाला तत्व राज्य था । संपत्ति संबंधों के अनुरूप राजनीतिक व्यवस्था का रूपांतरण होता चलता है । इस रूपांतरण का संचालक वर्ग संघर्ष होता है । यह तो मार्क्स एंगेल्स की सामान्य ऐतिहासिक भौतिकवादी दृष्टि थी । मार्गन की खोज से परिवार भी अधिरचना के विभिन्न पहलुओं में शामिल हो गया जो उत्पादन में होने वाले बदलावों के अनुरूप बदलता दिखाई पड़ने लगा । एंगेल्स ने अपनी किताब के पहले संस्करण की भूमिका में इस बात पर खासा जोर दिया ।

मार्गन की यही बात एंगेल्स ने ग्रहण की कि परिवार भी धर्म, राजनीति और संस्कृति की तरह उत्पादन पद्धतियों से उपजा है । अत्यंत आदिम अवस्था के बाद जैसे जैसे श्रम की उत्पादकता बढ़ती गई उसी तरह विनिमय, निजी संपत्ति, तकनीक और विषमता में भी बढ़ोत्तरी हुई । इसके साथ ही पहले से मौजूद सामाजिक संरचनाओं पर दबाव तेज होने लगा । उत्पादन पद्धतियों में बदलाव के साथ ही बदलते परिवार का स्वरूप आज निजी संपत्ति की प्रभुता के अनुरूप एक-पत्नी-व्रती आधुनिक परिवार में प्रकट हुआ है । इसका विकास आदिम, प्राकृतिक सामुदायिक संपत्ति पर निजी संपत्ति की विजय के समानांतर हुआ है । एंगेल्स ने मार्गन की खोज के साथ मार्क्स के ऐतिहासिक भौतिकवाद को जोड़ने के अतिरिक्त एक बुनियादी बात कही । उनके अनुसार किसी भी समय और देश के सामाजिक संगठन के निर्धारण में एक ओर मजदूर के विकास की अवस्था तो दूसरी ओर परिवार के विकास की अवस्था निर्णायक होते हैं । इस मान्यता के साथ ही मार्क्सवादी सैद्धांतिकी में स्त्री का सवाल बहुत ऊपर उठ गया । उत्पादन संबंधों के साथ ही मनुष्य के पुनरुत्पादन और परिवार के संचालन में स्त्रियों की भूमिका को भी महत्व दिया गया ।

इसी आधार पर एंगेल्स ने मानव इतिहास में स्त्री की संप्रभुता में कमी की बात उठाई । पहले ही एंगेल्स इस बात को मानते थे कि आदिम समाज में संतान की माता ही निश्चित की जा सकती थी । इसके चलते स्त्री का सम्मान तो होता ही था उसका सामाजिक प्राधिकार भी मजबूत था । मार्गन ने जिस कबीले का अध्ययन किया था वहां स्त्रियों को बुर्जुआ समाज के मुकाबले अधिक स्वतंत्रता हासिल थी । लेकिन एकल परिवार में संक्रमण के साथ स्त्री की स्वतंत्रता का क्षरण क्यों हुआ ? इसके जवाब में एंगेल्स कहते हैं कि श्रम विभाजन और निजी संपत्ति पर आधारित पूंजीवादी उत्पादन संबंधों के आगमन के साथ ही आए एकल परिवार में विरासत का हस्तांतरण पिता से पुत्र को होना शुरू हुआ । इसके लिए पुत्र के जैविक पिता का निश्चय और स्त्री स्वच्छंदता पर बंधन जरूरी था । स्त्री की ऐतिहासिक हार हुई । घर में भी पुरुष का स्वामित्व कायम हुआ और स्त्री गुलाम बनी । उसे पुरुष की वासना को संतुष्ट करना था और संतान पैदा करनी थी । संतान के पितृत्व को निश्चित करने के लिए स्त्री पर पुरुष का स्वामित्व थोपा गया । अगर वह अपनी पत्नी की हत्या भी कर दे तो अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहा होगा । स्त्री को पातिव्रत्य निभाना था, पुरुष ने अपने लिए स्वच्छंदता का अधिकार सुरक्षित रखा ।

एंगेल्स के इस विश्लेषण के चलते लैंगिकता ऐतिहासिक और सामाजिक निर्मिति की तरह नजर आने लगी । जहां अगस्त बेबेल ने पुरुष प्रभुत्व को अनादि काल से मौजूद माना था वहीं एंगेल्स ने उसे हाल की परिघटना साबित किया जिसका उभार निजी संपत्ति के विकास के साथ हुआ । उन्होंने देखा कि पुराने समाजों में स्त्री न केवल स्वाधीन बल्कि सम्मानित भी रही थी । आदिम साम्यवाद के खात्मे के साथ स्त्री की बदहाली शुरू होती है । इससे तय हुआ कि पुरुष प्रभुत्व अस्थायी है और लैंगिक विषमता का संबंध शरीर से नहीं, बल्कि खास आर्थिक व्यवस्था से है । इतिहास की गति में जैसे पूंजीवाद को खत्म होना है उसी तरह पुरुष प्रभुत्व भी समाप्त होगा । अपनी इस घोषणा के कारण एंगेल्स की यह किताब स्त्री समुदाय के लिए आशा का संदेश लेकर आई थी ।

मार्क्स और एंगेल्स ने जर्मन विचारधारा में ही आधुनिक श्रम विभाजन को घर के भीतर तक विस्तारित होते हुए देखा था । उनके मुताबिक निजी संपत्ति और विषमता का नाभिक परिवार के भीतर होता है जहां पत्नी और बच्चों की स्थिति दासों के समान होती है । एंगेल्स इससे आगे बढ़कर कहते हैं कि सामाजिक वर्गों के बीच शत्रुता के बीज आधुनिक एकल परिवार में पुरुष द्वारा स्त्री के उत्पीड़न में हैं । सामाजिक उत्पादन से विरहित और घरेलू कामकाज की निजी दुनिया में धकेल दी गई स्त्री अपने पति की नौकरानी बनकर रह जाती है । परिवार के भीतर संपत्ति का मालिक होने के चलते पुरुष बुर्जुआ होता है और पत्नी सर्वहारा होती है । एंगेल्स के क्रोध का विषय आधुनिक बुर्जुआ परिवार है जिसके भीतर व्यापक विषमता संस्थाबद्ध होती है । इसको वे पूंजीवादी वर्गीय संबंधों का लघु विश्व समझते थे । परिवार के भीतर की नैतिकता का ही पूरक बाहर का पाखंड भरा आचरण होता है । एकल परिवार का द्वंद्वात्मक विपरीत वेश्यावृत्ति है । मजदूर से पत्नी का अंतर यह होता है कि मजदूर अपने शरीर को टुकड़ा टुकड़ा रोज बेचते हैं जबकि पत्नी उसे एक ही बार जिंदगी भर के लिए सौंप देती है ।

एंगेल्स के अनुसार वेश्यावृत्ति और विवाहेतर संबंध एकल विवाह संस्था की अप्राकृतिक मांगों और परिवार के भीतर असमान शक्ति संबंधों का परिणाम होते हैं । परिवार की आधुनिक संस्था का निर्माण ही स्त्री की गुलामी के आधार पर हुआ है इसलिए इसमें पूंजीवादी व्यवस्था की तरह ही तनाव और अंतर्विरोध हमेशा बने रहेंगे । वंश परंपरा को बनाए रखने के लिए विवाहेतर संबंधों को क्रूरता के साथ दंडित किया जाएगा लेकिन उनकी मौजूदगी बनी रहेगी । पाखंड यह है कि पुरुष ने अपने लिए इन संबंधों का अधिकार सुरक्षित रखा और स्त्री से इसे छीन लिया । परिवार के इस रूप नें मजदूर वर्ग पर भी प्रभाव डाला । एंगेल्स को आशा है कि पूंजीवाद ने जिस तरह स्त्री को भी कारखाने के कामगार बना डाला है उससे मजदूरों के परिवार के भीतर उसके उत्पीड़न का कोई भौतिक आधार नहीं रह गया । एकल परिवार के आगमन के साथ जुड़े स्त्री के साथ क्रूर व्यवहार के अवशेष मात्र इन परिवारों में दिखाई देते हैं । फिर भी स्त्री की पराधीनता पूंजीवाद के जरिए नहीं खत्म होगी बल्कि साम्यवाद में ही इसकी समाप्ति संभव है । विरासत में मिलने वाली संपत्ति को साझा सामाजिक संपदा में बदलकर ही परिवार के वर्तमान रूप को बदला जा सकता है ।

काउत्सकी को लिखी एक चिट्ठी में एंगेल्स ने लिखा कि पुरुष और स्त्री के बीच सच्ची समानता तभी स्थापित हो सकती है जब पूंजी का शोषण खत्म हो और घरेलू काम को सार्वजनिक उद्योग में बदल दिया जाए । शायद चार्ल्स फ़ूरिए के चलते एंगेल्स को साम्यवाद के दौरान यौन और पारिवारिक संबंधों में मार्क्स से अधिक रुचि थी । एंगेल्स को लगता था कि विवाह का आधार आपसी पसंद के अतिरिक्त कुछ और नहीं होना चाहिए और ऐसा प्रेमवश ही हो सकता है । साम्यवाद में परिवार का एक नया रूप स्थापित होगा जो आदिम स्वतंत्रता के माहौल में मौजूद रिश्तों का उन्नत स्वरूप होगा ।

हन्ट का कहना है कि परिवार के इतिहास के सिलसिले में जितनी मौलिक बातें एंगेल्स ने कहीं उतनी मौलिक बातें राज्य की उत्पत्ति के सिलसिले में नहीं कहीं लेकिन उसमें भी मार्क्स-एंगेल्स की विकसित सोच दिखाई देती है । घोषणापत्र में उन्होंने लिखा था कि आधुनिक राज्य समूचे पूंजीपति वर्ग के मामलों की देखरेख करने वाला प्रबंधक निकाय भर होता है । इस किताब में उनका कहना है कि आदिम सामुदायिकता की समाप्ति और विरोधी कबीलों तथा वर्गों की उत्पत्ति के साथ राज्य एक अनिवार्य बुराई की तरह सामने आया । इन विरोधी वर्गों के टकरावों से ऊपर उठकर वह समाज को निर्देशित करने लगा । इसके साथ ही इन विरोधी वर्ग हितों के बीच राज्य के विभिन्न निकायों पर कब्जे की लड़ाई शुरू हो गई । आर्थिक रूप से दबंग वर्ग का मजबूत राज्य उत्पीड़ित वर्ग को दबाने और उसका शोषण करने लगा । बहरहाल पूंजीवादी उत्पादन संबंध और एकल परिवार की तरह ही एंगेल्स राज्य प्राधिकार के वर्तमान रूप को ऐतिहासिक माना । साम्यवादी क्रांति वर्तमान सामाजिक वर्गों को खत्म कर देगी और इसके साथ ही उन वर्गों को उनकी जगह पर बनाए रखने वाले राज्य का भी समापन होगा । वह पुरातात्विक वस्तुओं के संग्रहालय में मिला करेगा ।

आजकल इस किताब की अधिकांश मान्यताओं पर सवाल उठाया जाता है । खुद एंगेल्स के अनेक राजनीतिक फैसलों की आलोचना की जाती है । सही है कि मताधिकार संबंधी आंदोलन को एंगेल्स मध्यवर्गीय आंदोलन मानते थे लेकिन इसके कारण महिलाओं को वोट देने से उन्होंने कभी परहेज नहीं किया । इससे एंगेल्स के व्यक्तिगत और दार्शनिक जीवन के बीच तनाव देखने का भी मौका मिला है । बहुत कम चिंतक ऐसे रहे हैं जिनका जीवन उनके आदर्शों के अनुरूप बीता हो और एंगेल्स के साथ तो और बड़ी समस्या थी । कपड़ा मिल मालिक के बतौर उनके अस्तित्व और उनकी राजनीतिक सोच में बहुत विराट खाई थी । स्त्रियों के साथ उनके संबंधों की भी पर्याप्त चर्चा हुई है । बाद में उनके प्रगाढ़ रिश्ते आयरलैंड की मिल मजदूर मेरी बर्न्स से बने । बीस सालों तक यह रिश्ता चला । मेरी के जरिए ही उनका साबका मानचेस्टर में मौजूद लघु आयरलैंड से हुआ जो ज्यादातर मजदूरों की बस्ती था । इसके चलते ही उनकी समाजवादी सोच को ठोस आधार मिला । हालांकि इस रिश्ते में भी बहुतों को मालिक गुलाम का शक्ति संबंध महसूस होता है । सही है कि मेरी से एंगेल्स ने कभी विवाह नहीं किया लेकिन लगाव बहुत जबर्दस्त था । उनकी मृत्यु पर वे बेहद दुखी हुए ।  फिर जल्दी ही मेरी की बहन लिज़ी के साथ एंगेल्स के रिश्ते बन गए । लिज़ी पढ़ी लिखी नहीं थीं लेकिन एंगेल्स उनकी समाजवादी भावना का बहुत सम्मान करते थे । लिज़ी के साथ ही वे मानचेस्टर से लंदन रहने आए और उनके साथ ही लिज़ी के देहांत तक रहे । लिज़ी के देहांत से कुछ क्षण ही पहले एंगेल्स ने खोजकर एक पादरी बुलाया और लिज़ी की इच्छा का सम्मान करते हुए चर्च के नियमों के अनुसार विवाह किया ।

हन्ट ने उस जमाने की अधिकांश मध्यवर्गीय स्त्रियों के विचारों की एंगेल्स की आलोचना को उनका स्त्रीद्वेष माना है । फिर भी उन्होंने माना है कि इस घेरे के बाहर की जुझारू स्त्रियों की वे हमेशा इज्जत करते रहे थे । लेखक की निजी संकीर्ण्ताओं से अलग यह किताब तत्कालीन समाज की बुनियादी नारीवादी आलोचना है तथा समतापरक साम्यवादी समाज का स्वप्न है । इसी वैचारिक ऊर्जा के चलते बीसवीं सदी में एंगेल्स की यह किताब महत्वपूर्ण साबित हुई । यूरोपीय महाद्वीप में नवजात मार्क्सवादी और समाजवादी आंदोलन के घेरे से बाहर निकलकर स्त्री मुक्ति की राजनीति का व्यापक महत्व प्रतिष्ठित हुआ । स्त्री मताधिकार के आंदोलन में समाजवादी आगे रहे और द्वितीय इंटरनेशनल ने अपने सभी घटक दलों से स्त्री-पुरुष के बीच कानूनी और राजनीतिक समानता के लिए आंदोलन चलाने की अपील की ।

 

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